मध्य प्रदेश में 60 लाख़ फ़र्ज़ी मतदाता, कॉन्ग्रेस की शिकायत पर जांच के आदेश जारी

मध्य प्रदेश में 60 लाख़ फ़र्ज़ी मतदाता, कॉन्ग्रेस की शिकायत पर जांच के आदेश जारी

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मध्य प्रदेश में 60 लाख़ फ़र्ज़ी मतदाताओं की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने जांच के आदेश दिए

कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के चुनाव आयोग से मध्य प्रदेश में, जहां भाजपा की सरकार है, 60 लाख फ़र्ज़ी मतदाता होने की शिकायत करने के बाद, आयोग ने मध्य प्रदेश में कथित अनियमित्ता की जांच के लिए 2 टीमों का गठन किया है जो 7 जून तक इस बारे में रिपोर्ट पेश करेगी। रविवार को कॉन्ग्रेस नेता कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की अगुवाई में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग में शिकायत की थी।

मध्य प्रदेश में कुल 5 करोड़ मतदाता हैं। अगर कॉन्ग्रेस का दावा सही साबित होता है तो इसका अर्थ में होगा कि इन मतदाताओं में 12 फ़ीसद नक़ली मतदाता हैं। पिछले विधान सभा चुनाव में कॉन्ग्रेस और बीजेपी के बीच वोट शेयर का अंतर मात्र 8.5 फ़ीसद था। मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव इसी साल नवंबर में होने हैं।

कॉन्ग्रेस ने अपने दावे की सच्चाई में चुनाव आयोग को सुबूत भी पेश किए हैं। बाद में नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बहुत सी मिसालें पेश कीं कि किस तरह एक मतदाता कई बार वोट डालता है। मिसाल के तौर पर उन्होंने मध्य प्रदेश के भोजपुर चुनाव क्षेत्र के लिए एक महिला को पेश किया जिसका इसी चुनाव क्षेत्र में विभिन्न पोलिंग बूथ पर 26 बार नाम लिखा हुआ था।

कमलनाथ ने कहाः “हमने चुनाव आयोग को सुबूत पेश किया कि मतदाता सूचि में लगभग 60 लाख फ़र्ज़ी मतदाताओं का नाम दर्ज है। यह ग़लती नहीं है। भाजपा के आदेश पर इस राज्य में सूचि में जान बूझ कर फेर बदल किया गया है।”

कॉन्ग्रेस पार्टी ने 101 चुनाव क्षेत्र में जांच की जिसमें उसे पता चला कि 24.65 लाख फ़र्ज़ी मतदाता हैं। इसके अलावा राज्य में आबादी और मतदाताओं के अनुपात में भी बहुत अंतर है।

कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह कहते हुएः “यह बीजेपी का काम है।” सवाल कियाः “यह कैसे मुमकिन है कि किसी राज्य में दस साल में आबादी 24 फ़ीस बढ़े और मतदाताओं की संख्या 40 फ़ीसद बढ़े।?”

कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी लिस्ट में हेर फेर के दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही की मांग करते हुए कहा कि उन्हें 10 साल चुनाव आयोजन की गतिविधियों से दूर रखने सहित उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्यवाही होनी चाहिए।