क़ौम तरक्क़ी चाहती है…तो पूरा निज़ाम भी बदलाव चाहता है!Sara Nilofar!

क़ौम तरक्क़ी चाहती है…तो पूरा निज़ाम भी बदलाव चाहता है!Sara Nilofar!

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Sara Nilofar
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आसनसोल की एक मस्जिद के इमाम मौलाना इमदादुल्लाह रशीदी याद हैं आपको? दंगे में अपना जवान बेटा खोने के बावजूद, उन्होंने मुसलमानों से बदले की भावना त्यागने और इलाके में शांति बनाए रखने की अपील की थी।

इस दर्दनाक घटना ने मुझे मौलवियों के जीवन स्तर, आमदनी, उनकी जेहनियत को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया.

हिन्दुस्तानी मुसलमानों के एक बड़े तबके की धारणा है की मुसल मानों के पिछड़ेपन / फिर्काबंदी के लिए मौलवी या आलिम भी जिम्मेदार हैं.

मुसलमानों के पिछड़ेपन का ठीकरा मौलवी/ इमाम/ मौलाना पर फोड़ना आसान है. सामने (Front End) पर इमाम/ मौलाना है…. लेकिन पीछे (Back End) पर मजहबी रहनुमा तैयार करने वाली व्यवस्था…. जैसे मदरसा निजाम, संचालन/मस्जिद कमेटी, आम मुस्लिम मुआशरा और मुस्लिम मुआशरा की व्यवस्था सुधारने में अरूचि जैसी सारी व्यवस्था में गंभीर खामियाँ है

एक एनालिसिस :

*मौलवी/ इमाम/ मौलाना ? (मौलवी बनाने की प्रक्रिया)
एक बेहद गरीब, सामान्य प्रतिभा और ग्रामीण पृष्ठभूमि का बच्चा… मदरसे की एकरसता भरी जिन्दगी, परिवार और सामाजिक गतिविधियों से दूर, दुनिया की हलचलों से बेखबर, मदरसे का कठोर नियंत्रण

*मदरसा ?(जो मौलवी/ इमाम/ मौलाना का व्यक्तित्व निर्धारक है )
दो सौ साल पुराना पाठ्यक्रम, तर्क शक्ति से दूर रटने–रटाने पर जोर, रोजगारोन्मुख पाठ्क्रम नहीं, ‘परम्परावादी’ पद्धति को सुधरने /इम्प्रूवमेंट के लिए कोई व्यवस्था नहीं, ,संचालन कमेटी की लचर रवैया

*संचालन/मस्जिद कमेटी ???(जो मदरसे का प्रबंधन की उत्तरदायी है )
प्रभावशाली लोगो का समूह, कुप्रबंधन, खुद के बच्चे कान्वेंट में, कमेटी में शिक्षाविदो और प्रतिभाशाली नवयुवकों की कमी, जकात के पैसे में पारदर्शिता का अभाव, जड़ता (Status co) को बरक़रार रखने मनोवृत्ति, उत्तरदायित्व की कमी

*मदरसे/मौलवियों की आय (जो मौलवी/ इमाम/ मौलाना की आमदनी का निर्धारक है )
चंदे का अनियमित सोर्स, मस्जिद कमेटी की मनमर्जी, जकात का कुप्रबंध, पुरानी वक्फ सम्पत्ती का ह्रास

*आम मुस्लिम मुआशरा (जिसे मदरसा तालीमी पर नज़र रखनी चाहिए )
ज्यादातर आर्थिक और तालीमी तौर पर कमजोर, मुस्लिम घेट्टो के निवासी, तालीमी व्यवस्था सुधारने में प्रतिबद्धता की कमी, दूर दृष्टि की कमी, तरक्की के लिए तीव्र इच्छा शक्ति की कमी

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अगर हमारे रहनुमा बनाने के प्रोसेस में ही गंभीर खामियां हैं तो कौम कैसे तरक्की करेगी…

कौम तरक्की चाहती है …तो पूरा निजाम भी बदलाव चाहता है

तालीमयाफ्ता संजीदा मुस्लिम नौजवान, व्यक्तिगत स्तर पर आगे आएँ… कौम की तरक्की, खुशहाली और व्यवस्था सुधार की रणनीति बनाये . व्यवस्था एफिशिएंट बनाये, रिजल्ट ओरिएंटेड बनाये,, ढुलमुल और लचर व्यवस्था को रिव्यु करके इम्प्रूव करे …….ताकि इमाम मौलाना इमदादुल्लाह रशीदी जैसे मौलवियों के जीवन स्तर और आमदनी में गुणात्मक सुधर हो और साथ ही मुस्लिम मुआसरे को काबिल रहनुमाई मिल सके

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लेख में तथ्यात्मक गलती हुई हो तो बतलाये, ताकि सुधार किया जा सके.

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Disclaimer : सभी मदरसे ,संचालन/मस्जिद कमेटी, आम मुस्लिम मुआशरा पर लागू नहीं ,आज देश में क़रीब बीस फ़ीसदी से ज़्यादा मदरसे ऐसे हैं, जिनके छात्र पढ़-लिख कर आइएएस अफ़सर तक बने.