सवर्णो ने संसोधित एससी/एसटी एक्ट के ख़िलाफ़ किया प्रदर्शन, आक्रोशित है सवर्ण समाज!

सवर्णो ने संसोधित एससी/एसटी एक्ट के ख़िलाफ़ किया प्रदर्शन, आक्रोशित है सवर्ण समाज!

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अनुराग मिश्रा
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शाहजहांपुर। केंद्र सरकार द्वारा पास कराये गए एससी एसटी एक्ट बिल के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने धरना प्रदर्शन कर डीएम को सम्बोधित ज्ञापन दिया। जिसमें एससी एसटी बिल व आरक्षण को समाप्त करने की मांग उठाई गई। गुरुवार को स्वर्ण महासभा के लोग सुबह 10 बजे गाँधी भवन परिसर में एकत्र होकर सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए कचहरी पहुंच कर राष्ट्रपति को सम्बोधित डीएम को ज्ञापन देते हुए कहा कि अपराधी की कोई जाति व धर्म नही होता है।

इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने एससी एसटी एक्ट के सम्बंध में एक जनहितकारी और कानून के समक्ष न्याय की जन सामान्य की समानता की भावना की स्थापना करते हुए आदेश पारित किया था। परंतु राजनीतिक दलों द्वारा अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए सम्पूर्ण समाज को अपराधी मानकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटते हुए 6 अगस्त 2018 को एससी एसटी अध्यादेश पारित करके जहां एक ओर सवर्ण समाज की नियत पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

वही सामाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न करने का काम किया है। जो समाज व राष्ट्रहित के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही केंद्र सरकार एक और सामाजिक विघटन बिल पास करने जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रमोशन में आरक्षण को निरस्त करने के विरोध में केंद्र सरकार ने न्यायालय के आदेश को रद्द करने की याचिका दी गई। हद तो तब हो गई जब केंद्र सरकार ने एससी एसटी अध्यादेश को पास करके प्रमोशन तथा रिजर्वेशन को स्थायी बनाने जा रही है। समस्त राजनीति दलों ने ने एससी एसटी अध्यादेश का समर्थन करके सवर्ण समाज के प्रति ही नही अपितु सम्पूर्ण समाज को विखण्डित करने के साथ जातीय संघर्ष को बढ़ावा देकर अपना वोट बैंक बढ़ाने का एक कुत्सित षणयंत्र किया है। जो राष्ट्र व समाज हित के लिए काफी घातक सिद्ध होगा।

एससी एसटी अध्यादेश व आरक्षण व्यवस्था से देश के युवा के साथ सवर्ण समाज हताश व निराश तथा आक्रोशित है। सवर्ण समाज का ज्वालामुखी कभी भी फूट सकता है। इस मौके पर सभी सवर्ण समाज ने राष्ट्रपति से विघटनकारी एससी एसटी एक्ट आदेश को निरस्त व जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने के लिए सरकार को सलाह दे। तथा इन अध्यादेश पर अपने हस्ताक्षर न करके इसको खारिज करने की मांग उठाई।

इस मौके पर राजाराम मिश्रा, के.डी. सिंह, सरोज श्रीवास्तव, विजय तुली, राकेश कुमार पांडेय, अपूर्व अग्निहोत्री, कीर्तिमान च्यवन, कृष्ण कुमार सिंह, महेश सक्सेना, प्रभात रंजन पांडेय, जितेंद्र नाथ तिवारी, अतुल अग्निहोत्री, शरद कुमार सिंह, विनय सिंह चड्डा, एनसी शुक्ला, जयविन्दर सिंह, नवनीत सिंह, नीरज मिश्रा, राकेश मिश्रा, श्यामजी शुक्ला, धर्मेद्र मोहन वाजपेयी, के.एल.छावड़ा, हरीश बजाज, वीरू दीक्षित, ध्रुव सक्सेना, अमरीश शुक्ला, संतोष शुक्ला, दिवाकर मिश्रा, पंकेश मिश्रा, विनय तिवारी, सुधीर पाठक आदि लोग मौजूद रहे।