कांवड़ियों के उत्पात, गौरक्षकों के आतंक देखकर अंदाज़ा ला सकते हैं कि रामराज्य में इन गुंडों ने कितना आतंक ढाया होगा!

कांवड़ियों के उत्पात, गौरक्षकों के आतंक देखकर अंदाज़ा ला सकते हैं कि रामराज्य में इन गुंडों ने कितना आतंक ढाया होगा!

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Pradeep Kasni ( IAS _  HARIYANA )
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| समाज |||||||||||||||||||||

भोले भक्तों की जो भावनाएं कावड़गीत में प्रकट हुईं, वह शोध का विषय है।
1. भोले तुम कांवर लाओ, तेरी जोरू भोला ला देगा।*
2. आखिलेश ने डीजे बन्द कराया, मोदी-जोगी ने खुलवाया, नाचो भोले।
3. मोदी दारू की दुकान बन्द करवा दो और गांजा भाँग की दुकान गली-गली खुलवा दो। हम गांजा-भाँग पी के कांवर लाएंगे और मस्त होकर नाचेंगे।

और भी गाने हैं जिनके पीछे सामाजिक-आर्थिक कारण हैं। मसलन,
• हरियाणा में सेक्स रेसियो कम होने के चलते तीस फीसद नौजवानों की शादी नहीं होती, जिस पर पहला गाना है।
• बेरोजगार नौजवान महंगे दारू की जगह गांजा भाँग प्रीफर करते हैं। इस पर दूसरा गाना है।

\\\ दिगंबर सधन्यवाद \\\

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कांवड़ियों के उत्पात, गौरक्षकों के आतंक, भगवा रसूख़दारों के चकलाघरों की कुकरमुत्ते जैसे ग्रोथ को देखकर आप अंदाज़ा ला सकते हैं कि रामराज्य, पुष्यमित्र शुंग के शासन में इन गुंडों ने कितना आतंक ढाया होगा।

शायद सत्ताओं की शह पर इन भगवे कायरों की इसी उत्पाती प्रवृत्ति के कारण स्थानीय नागरिकों की रज़ामंदी के कारण सिकंदर, महमूद गजनवी, मुहम्मद गौरी, गुलाम, मुग़ल, अब्दाली ही नहीं, अंग्रेज़, पुर्तगाली और फ्रेंच भी भारत में शासकों के रूप में सफल हो सके।

ये समुदाय इतना बहादुर है कि जब इनकी साकार का ई पर वरद हस्त हो तभी ये यकायक बहादुर, और उत्पाती बन जाते हैं।

सत्ता का समर्थन न हो तो इनसे बड़ा कायर विश्व समुदाय में खोजना मुश्किल हो जयेगा।

सरकार ज़रा सख़्ती से क़ानून पालन करने लग जाये तो भीड़ में अपराध करबे वाले ये झुंड कहीं नहीं दिखते।
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भारत में हमेशा ही भगवा पहनावा अहिंसा और त्याग का प्रतीक रहा है. अबतक भगवा वस्त्रधारी को सभी जगहों पर हरेक देशवासी बहुत सम्मान देता रहा है.

आज गुंडे मवाली भगवा बाने में आतंक और हिंसक दबादबा बैठाकर राजनैतिक वर्चस्व कायम करने का धंधा कर रहे हैं. आरएसएस-बीजेपी इन्हें अपने सस्ते सुलभ ‘फ़ुटसोल्ज़र’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है.

ख़ूनी हिंसा के बाद देश में जो नवचेतना आयेगी उसमें धार्मिक प्रतीक अर्थहीन हो जायेंगे और भगवान् राम के नाम की आस्था और राजनीति में साफ साफ लकीर खींची जाऐगी. …
धर्मकर्म की आड़ में कोई कुकर्म नहीं हो पायेगा
मिलेगा सर्प जहाँ भी, ये दफन वहीं हो जायेगा
भारत है हर पापी को याद रहे
चंगेज़ की तरह तू भी इक दिन बेनिशां हो जायेगा

… रणबीरसिंह रमन साभार

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नोट : लेखक के निजी विचार हैं, तीसरी जंग का कोई सरोकार नहीं है|

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