चुटकी में चिपकाये : हर कोई गांजा चढ़ाकर नहीं बोलता…यानी कुछ तो डर है : ज़रूर देखें ‘यमला पगला दीवाना 3”

चुटकी में चिपकाये : हर कोई गांजा चढ़ाकर नहीं बोलता…यानी कुछ तो डर है : ज़रूर देखें ‘यमला पगला दीवाना 3”

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Prabhjot Kaur
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अकालियों के नेता’ जी के ‘की मार कुटाई हुई अमेरिका में क्यूंकि इन अकालियों ने गुरु साहिब जी की बेअदबी करवाई ,एक सवाल में पूछती हूं आप सब से , मार कुटाई में पगड़ी उतरना क्या ये भी बेइज्जती नहीं गुरु जी की ,क्यूंकि पगड़ी भी सिख धर्म का ही चिन्ह निशानी,पहचान फिर बताओ जिन्होंने ये सब किया, क्या फर्क रह गया अकालियों और आप में ? धर्म के लिए प्यार क्या यही सिखाता है ? मैं इस हक में नहीं ‘जी के ‘को मारा पर पगड़ी क्यूं उतारी ?मैं किसी एक धर्म को नहीं मानती किन्तु सब का सम्मान करती हूं एक बराबर, पर कभी किसी धर्म का अपमान नहीं किया,
कोई बात गलत लगे तो सोरी
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Satyendra PS
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राहुल गांधी का बेल और मोदी के चेलों का भेल। हर कोई गांजा चढ़ाकर नहीं बोलता।
उस समय कुछ लोग भेल से मोबाइल बनना सुनकर पगलाए फिर रहे थे। मैंने ध्यान नही दिया कि होगा कुछ। आज Siddharth Kalhans जी का लिखा हुआ पढ़ा तो मामला साफ हुआ।
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भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) जिसे संक्षेप में बेल कहते हैं, नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। लगातार मुनाफा कमा रही है और तमाम सरकारी विभागों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बना कर सप्लाई देती है यहां तक की ईवीएम भी। चूंकि यह कंपनी जनता के उपभोग की वस्तुएं नहीं बनाती अथवा बेंचती इस लिए बहुत से लोगों को इसके बारे में ज्यादा नहीं पता। मनमोहन सरकार के समय मे बेल से भारतीय सैन्य बलों सहित अन्य सरकारी विभागों के लिए स्मार्ट फोन बनाने को कहा गया। भारत का पहला इंडिजिनस स्मार्ट फोन बनाया बेल ने पर मोदी सरकार ने इसे कोई काम नहीं दिया। विदेशी सप्लायर से फोन खरीदे।
दूसरी ओर भेल, बीएचईएल, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड टरबाइन, बिजली घरों के उपकरण आदि बनाती है। इसके बड़े आकार, कर्मचारियों की तादाद आदि के चलते भेल नाम ज्यादातर लोगों को मालूम है। कुछ समझने की भूल और कवर करने वाले भाईयों का अति ज्ञान मे बेल को भेल कहा गया और चलाया गया जिसे साहब के साइबर योद्धा ले उड़े.

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Saleem Akhter Siddiqui
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पता नही पप्पू के बोलने पर भाजपा क्यों इतनी बौखला जाती है?
जब बकौल भाजपा राहुल गांधी को कोई गंभीरता से नहीं लेता तो वही क्यों राहुल को अहमियत देती है?
यानी कुछ तो डर है।
भाजपा राहुल से सवाल कर रही है कि उन्हें हिंदुओं से नफरत क्यों है?
ये आरएसएस की आलोचना करना हिंदुओं से नफरत करना कब हुआ है?
क्या संघ और उसके संस्थापक गोलवलकर और हेडगेवार हिन्दू धर्म के परवर्तक हैं?
ये भाजपा कब राजनीति को धर्म से कब अलग करेगी?

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Rizwan Khan
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किसी विपक्ष के नेता के विदेश में कुछ भी कहने से न भारत की छवि अच्छी होती है न बुरी।
छवि बुरी होती है तमाम गाय के नाम पर हत्या, महिलाओं और बालिकाओं का शोषण और उसके बाद प्रशासन की लाचारी, बाबा सन्यासी लोगों का संवैधानिक पदों पर बैठ कर असंवैधानिक अलोकतांत्रिक बात करने और उनके आचरण से।
इतना मूर्ख नहीं है विदेशी मीडिया जो विपक्ष के नेता के कहने से छवि खराब मान ले
या सत्तापक्ष के नेता द्वारा 300 नर्तकों और कलाकारों की जम्बूरी लगाने से छवि सुधर जाए।
इन बातों से सिर्फ भारत के वोटर प्रभावित होते हैं।,