फिलिस्तीनियों को दी जाने वाली अमरीकी मदद बंद, अमरीका का क़दम दुस्साहस पूर्ण हमला है

फिलिस्तीनियों को दी जाने वाली अमरीकी मदद बंद, अमरीका का क़दम दुस्साहस पूर्ण हमला है

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अमरीका की ओर से फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद करने वाली संस्था यूएनआरडब्ल्यूए की मदद रोकने के एलान के बाद हमास ने फिलिस्तीन के खिलाफ वाशिंग्टन की साज़िशों के लिए विश्व समुदाय की ओर से क़दम उठाए जाने की मांग की है।

फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रवक्ता नबील अबू रुदैना ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता करने वाली संस्था की आर्थिक मदद रोकने के अमरीका के इस क़दम को दुस्साहस पूर्ण हमला बताया है। यूएनआरडब्ल्यूए का दिसंबर सन 1949 में संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के एक प्रस्ताव के बाद गठन हुआ था और इस संस्था का मक़सद, फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद करना था।

अमरीका ने अब इस संस्था की आर्थिक मदद बंद करके वास्तव में इस अंतरराष्ट्रीय संस्था को ही बंद करने की कोशिश की है ताकि फिलिस्तीनी शरणार्थियों के मामले को भी खत्म किया जाना संभव हो जाए। यह निश्चित रूप से मानवीय सहायता को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रयोग करने का अत्याधिक आलोचनीय उदाहरण है। इस से पूर्व न्यूयार्क टाइम्ज़ ने बताया था कि ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए अमरीकी मदद रोकने में प्रभावी भूमिका निभायी है।

समाचार पत्र के अनुसार जेरेड कुशनर इस तरह से फिलिस्तीनी नेताओं को शरणार्थियों के लिए अपने अधिकारों की मांग से पीछे हटने पर विवश करना चाहते हैं। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि यूएनआरडब्ल्यूए की आर्थिक मदद बंद करने के पीछे ट्रम्प का यह भी मक़सद है कि इस तरह से फिलिस्तीनियों पर दबाव डाला जाए ताकि वह सेंचरी डील पर तैयार हो जाएं । अमरीका, फिलिस्तीनी शरणार्थियों के वापसी अधिकार को खत्म करने की एेसी दशा में कोशिश कर रहा है कि जब संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्ताव क्रमांक 194 में स्पष्ट रूप से फिलिस्तीनी शरणार्थियों के वापसी के अधिकार की बात कही गयी है। गज़्ज़ा में फिलिस्तीनियों द्वारा निरंतरता के साथ जारी वापसी मार्च, इस बात का प्रमाण है कि ट्रम्प सरकार लाख कोशिश कर ले, सेंचरी डील कभी सफल नहीं होगी।