बड़ा ख़ुलासा : #EVM बनाने वाली कंपनी ने अज्ञात लोगों को बेची थीं भारी संख्या में EVM मशीने, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

बड़ा ख़ुलासा : #EVM बनाने वाली कंपनी ने अज्ञात लोगों को बेची थीं भारी संख्या में EVM मशीने, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

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नई दिल्ली।EVM जैसे ही नाम सामने आता है आम आदमी की ज़बान पर ‘चुनावों में घोटाले’ की कहानियां सामने लगती हैं, अनेक बार EVM को लेकर नए नए दावे और खुलासे सामने आते रहे हैं लकिन चुनाव आयोग इनको हर बार नकारता रहा है, राजनैतिक पार्टियां चुनावों में EVM का इस्तेमाल नहीं चाहती हैं वह अपने अपने तर्क देकर बैलेट पेपर से चुनाव करने की मांग करती रही हैं| इतना सब कुछ हो रहा है मगर चुनाव आयोग और बीजेपी EVM मशीनों को लेकर संतुष्ट हैं उन्हें इनमे कोई कमी, खामी या गड़बड़ नहीं लगती है|


पिछले कुछ सालों से इलेक्ट्रॉकनिक वोटिंग मशीन लगाता सुर्खियों में बनी हुई हैं. अब EVM को लेकर दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बंबई हाईकोर्ट ने बुधवार को इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग और EVM बनाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों तथा अन्य को नोटिस भेजा है. कोर्ट में यह जनहित याचिका एक आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा दाखिल की गई थी.

आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन एस. रॉय द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति एस. एस. केमकर और न्यायमूर्ति एस. वी. कोटवल ने भारतीय निर्वाचन आयोग के अलावा, केंद्रीय गृह मंत्रालय, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी किया है. अदालत ने EVM बनाने वाली कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को भी नोटिस जारी किया है.

याचिकाकर्ता रॉय के वकील पी. पवार के मुताबिक, मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद हो सकती है. याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग और विभिन्न राज्यों के चुनाव आयोगों द्वारा दिए गए EVM और वोटर वेरीफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के ऑर्डर और दोनों कंपनियों द्वारा की गई आपूर्ति के आंकड़ों में भारी गड़बड़ी को भी उजागर किया है. रॉय द्वारा हाल ही में आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह सामने में आया था कि बेंगलुरु स्थित BEL ने भारी संख्या में EVM हाथोंहाथ डिलीवरी और डाक के माध्यम से अज्ञात लोगों को भेजी हैं.

आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी के बदले राय को जो जवाब मिला है उसके मुताबिक BEL ने मशीनों की 820 मतदान इकाइयां (BU) भेजी थीं. इसके अतिरिक्त अप्रैल 2017 में दो बार इसने 245 VVPAT कुछ प्राप्तकर्ताओं को सौंपा. रॉय ने समाचार ऐजंसी आईएएनस से बताया कि बीईएल ने यह नहीं बताया कि दोनों मौकों पर इसने बीयू किसको भेजा या कहां से VVPAT भेजा गया और क्या प्राप्तकर्ता ने उसे सुरक्षित प्राप्त किया.

रॉय के मुताबिक 820 बीयू की पूरी खेप डाक के माध्यम से भेजा गया और कुल भेजे गए माल के लिए सिर्फ नौ नाम पत्र की संख्या दर्ज की गई. भेजा गया माल 50 बीयू के दो बक्से और 60, 70, 80, 90, 100, 110 और 210 बीयू के एक-एक बक्से में भेजे गए.

रॉय ने बताया कि, “यह भ्रामक सूचना है क्योंकि प्रत्येक बक्से का एक विशेष आकार होता है जो बीयू की माप पर निर्भर करता है. बीईएल के जवाब से साफ जाहिर होता है कि पूरा प्रेषित माल नौ बक्से में भेजा गया, जबकि भारतीय डाक न तो इतना बड़ा पार्सल स्वीकार करता है और न ही इसके संचालन के लिए सक्षम है.”

with input : nationalspeak.in