एग्ज़िमा (खुजली ) का घरेलू इलाज…..!

एग्ज़िमा (खुजली ) का घरेलू इलाज…..!

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हकीम मोलाना सैफुल्ला कासमी

त्वचा पर खुजली, दाद, फोड़े-फुंसी हो जाने पर व्यक्ति खुजा-खुजाकर बेहाल हो जाता है और लोगों के सामने खुजाने में शर्मिंदा भी हो जाता है ।
यदि व्यक्ति कोई क्रीम या दवा लगाना न चाहें या लगाने पर भी आराम न हो तो घर पर ही यह चर्म रोगनाशक तेल बनाकर लगाएँ ओर घरेलू नुस्खे अपनाए ।

कारण :
एक्जिमा शरीर में खून की खराबी के कारण होता है। एक्जिमा होने पर अगर तुरन्त ही इसकी चिकित्सा न कराई जाए तो ये बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैलता है। कुछ लोगों में एक्जिमा सफाई न रखने और भोजन में लापरवाही बरतने की वजह से कई सालों तक बना रहता है। एक्जिमा से संक्रमित व्यक्ति के जख्म को छूने से दूसरे लोग भी एक्जिमा के शिकार हो जाते हैं। हाजमे की खराबी की वजह से कब्ज (गैस) बन जाने के कारण भी एक्जिमा हो जाता है। औरतों में मासिकधर्म से सम्बंधित रोगों के कारण भी एक्जिमा हो जाता है।

लक्षण :
एक्जिमा रोग की शुरुआत में रोगी को तेज खुजली होती है। बार-बार खुजली करने पर उसके शरीर में छोटी-छोटी फुंसियां निकल आती हैं। इन फुंसियों में बहुत तेज जलन और खुजली होती है। फुंसियों के पक जाने पर उसमें से मवाद बहता रहता है। फुंसियों के जब जख्म बन जाते हैं तो उसमें से पूरी तरह मवाद बहने लगता है ।

तेल बनाने की विधि :-
नीम की छाल, चिरायता, हल्दी, लाल चन्दन, हरड़, बहेड़ा, आँवला और अड़ूसे के पत्ते, सब समान मात्रा में पंसारी से खरीद लें
तिल्ली का तेल आवश्यक मात्रा में लें , सब आठों द्रव्यों को 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर निकाल लें और पीसकर कल्क(लुगदी ) बना लें। इसके बाद लुगदी से चार गुनी मात्रा में आप तिल का तेल और तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर मिलाकर एक बड़े बरतन में डाल दें। इसे मंद आंच पर इतनी देर तक उबालें कि पानी जल जाए सिर्फ तेल बचे। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।

👉🏼 जहाँ भी खुजली हो, दाद हो वहाँ या पूरे शरीर पर इस तेल की मलिश करें। यह तेल चमत्कारी प्रभाव करता है। लाभ होने तक यह मालिश जारी रखें, मालिश स्नान से पहले या सोते समय करें और चमत्कार देखें।

घरेलू उपयोग

👉🏼 रात को तांबे के बरतन में थोड़ा-सा दही रख दें| सुबह दही का रंग कुछ नीला पड़ जाएगा| इस दही को उसी बरतन में कुछ देर तक फेंटे| फिर इस मलहम को खुजली वाले स्थान पर लगाएं|

👉🏼सुबह कुछ दिनों तक एक चम्मच नीम की पत्तियों का रस पिएं नीम की पत्तियों को पीसकर दही में मिलाकर खुजली वाले स्थान पर प्रतिदिन लगाएं ।

👉🏼250 ग्राम तिली के तेल में 50 ग्राम दूब का रस मिलाकर कुछ देर तक आग पर पकाएं| ठंडा होने पर छानकर शीशी में भर लें| इस तेल को खुजली वाले चर्म पर लगाने से 5-6 दिनों में खुजली जाती रहती है|

👉🏼 रोज सुबह सात-आठ दिनों तक चार-पांच नीम की कोंपलें चबाकर खा जाएं| ऊपर से ताजा पानी पी लें ।

👉🏼 गरम पानी में थोड़ी-सी अजवायन चटनी की तरह पीस लें| फिर इसे खुजली पर लगाएं|

👉🏼 जीरे को कपड़छन चूर्ण पानी में गाढ़ा-गाढ़ा घोलकर खुजली वाली जगह पर लगाएं|

👉🏼 250 ग्राम तिली या सरसों के तेल में चार-पांच चम्मच दूब (घास) का रस तथा 100 ग्राम पिसी हुई हल्दी मिला लें|
अब इसको लोहे को कड़ाही में पकाएं| थोड़ी देर बाद इस तेल को छानकर बोतल में भर लें| नित्य दिन में तीन
बार रुई के फाहे से इस तेल को लगाएं|

👉🏼 नारियल के एक गुने तेल में दो गुना टमाटर का रस मिलाकर लगाएं|

👉🏼 100 ग्राम तिली के तेल में 100 ग्राम बथुए का रस मिलाकर आग पर पका लें| फिर छानकर शीशी में भर लें|
इस तेल को नित्य लगाएं|

👉🏼गेहूं के आटे में तिली का तेल मिलाकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं|

👉🏼 यदि शरीर में सूखी खुजली हो तो नीबू के रस में केले के पत्तों की राख मिलाकर लगाएं|

👉🏼 दो पके केलों को किसी बरतन में मथ लें| फिर उसमें एक नीबू का रस निचोड़कर अच्छी तरह मिला लें| इसे मलहम की तरह लगाए ।

👉🏼 नीबू के रस में एक चुटकी नौसादर मिलाकर खुजली पर लगाएं|

👉🏼नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर लगाने से खुजली नहीं होती|

परहेज :
एक्जिमा रोग में रोगी को खून साफ करने वाली औषधियों का प्रयोग करना चाहिए।
व्यक्ति को खटाई वाली ओर बासी चीजें नही खानी चाहिए जहां तक हो सके, बाजार के खुले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए । नमक और नमकीन चीजों को खाना बंद कर दें | इसके साथ-साथ अचार, नीबू, टमाटर, तेल, लाल मिर्च, चाय आदि का सेवन त्याग देना चाहिए |
दूध और दूध से बनी चीजें नही खानी चाहिए ।
नीम की साबुन या मुल्तानी मिट्टी से ही नहाना चाहिये ।
कपड़े गरम पानी से धोने चाहिए ।
طالب دعا.

तालिबे दुआ

مولانا حکیم سیف اللہ طالب قاسمی میرٹھی
طالب دواخانہ عید گاہ روڈ گلاؤٹھی بلند شہر یوپی الہند 203408
9897440400
9058315004