#AligarhFakeEncounter_’नौशाद_मुस्तक़ीम’ के फ़र्ज़ी एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट_राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग को खुद संज्ञान लेना चाहिए

#AligarhFakeEncounter_’नौशाद_मुस्तक़ीम’ के फ़र्ज़ी एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट_राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग को खुद संज्ञान लेना चाहिए

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Azhar Shameem
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ये बड़े शर्म की बात है कि अलीगढ एनकाउंटर में मारे गए शहजाद और मुस्तकीम के परिवार से मिलने गए मंगल पांडेय सेना के अध्यक्छ अमरेश मिश्रा और सपा की पूर्व प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक और उनकी टीम पर जानलेवा हमला किया गया और ये सब उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदगी में हुआ और पुलिस मूकदर्शक बानी रही।

जिस तरह से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बुला के लाइव एनकाउंटर को अंजाम दिया गया और फिर विश्व हिंदू परिषद के मंच पर मुठभेड़ टीम में शामिल S.P और उनकी टीम को हार , माला पहना कर सम्मानित किया गया और अब जब सामाजिक , राजनीतिक संस्थाओं के नेता और कार्यकर्त्ता पीड़ित परिवार से मिल कर हकीकत जानना चाहते हैं और संतावना देना चाहते हैं तो उसमें भी बाधा पहुंचाई जा रही है और बजरंग दल ,हिन्दू युवा वाहिनी के गुंडे हमला कर रहे हैं।

 

आखिर ये हो क्या रहा है। ये तो सरासर ज़ुल्म है और मानवाधिकार और कानून व्यवस्था का उल्लंघन । इस तरह के फेक एनकाउंटर पर तो सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग को खुद संज्ञान लेना चाहिए और न्यायिक जांच या C.B.I जाँच का आदेश देना चाहिए ताकि पता चले की मुठभेड़ असली थी और मृतक सही में अपराधी थे या फिर राजनीतिक उद्देश्य के लिए और वर्दी में स्टार बढ़ा कर पदोन्नति और मेडल पाने का लालच । जिस पुलिस अधिकारी ने ये कारनामा अंजाम दिया है पहले से कुख्यात हैं और लखनऊ में टेलिकॉम कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के बाद से और भी विश्वास उठ गया है पुलिस से ।

उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि जनमित्र के बजाय हत्यारी और सरकारी आतंकी की बन गयी है और थोकभाव में किये जा रहे एनकाउंटर से सरकारी आतंकवाद का संदेश जा रहा है आम जनता में । ये शासन ,प्रशासन के लिए अच्छा नहीं है और लखनऊ एनकाउंटर के आरोपी प्रशांत चौधरी के समर्थन में जिस तरह से पुलिस कर्मी सोशल मीडिया में कंपैन चला रहे हैं , ये सरासर अनुशासनहीनता है और पुलिस मोहकमे की कार्यप्राली पर सवाल खड़ा करता है ।