क्या सभी गुजराती समलैंगिक होते हैं?

क्या सभी गुजराती समलैंगिक होते हैं?

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Mustaqim Siddiqui
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गुजरात के एक लड़के ने ईरान के एक लड़के से ईरान के एक शहर “बुशहर” से 400 किलोमीटर दूर “साउथ पारस” असुलिया में एक गैस प्रोजेक्ट के पास बलपूर्वक समलैंगिक संबन्ध बनाया या आप कह सकते हैं की जबरदस्ती सेक्स किया। लड़के की तबियत बहुत बिगड़ गई जिस कारण उस प्रोजेक्ट पर कार्यरत ईरानियों ने भारतीय लोगों पर हमला बोल दिया जिससे कई लोग बुरी तरह जख्मी हुए, कई को बुरी तरह पिटाई लगी तो लगभग पांच सौ से ज्यादा कार्यरत भारतीय को काम छोड़ कर भागना पड़ा। गैस प्रोजेक्ट ठप पड़ गया। यह घटना अगस्त 2001 की है।

इस घटना के कुछ ही दिनों बाद मुम्बई के एक रिकरुइटिंग एजेंसी द्वारा एक इंटरव्यू होता है जिसमे भारी संख्या में बिहारियों को चयनित कर ईरान उसी प्रोजेक्ट पर भेजा जाता है। यह बात अक्टूबर 2001 की है। भाग कर इधर उधर जाने वाले भारतीय अपने कैम्प में वापस आ जाते हैं। प्रोजेक्ट कई महीनों की विलंबता के बाद दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाता है।

उसके कुछ ही महीनों बाद अचानक गुजरात दंगा शुरू होता है, ईरानियों का गुस्सा दोबारा उभार मारता है, फिर गुजराती ईरानियों का टारगेट बनते हैं। इस बार उस आक्रोश का हिस्सा वह ईरानी भी होते हैं जो पिछली बार बीच बचाव का रास्ता बनाया था, कैम्प्स के सिक्योरिटीज में भी आक्रोश दिखाई देता है। कैम्प के अंदर ईरानियों द्वारा बदले की भावनाओं से हुल्लड़ बाजी शूरी होती है। आस पास के गाँव के ईरानी जमा होने लगते हैं। कैम्प्स में भारी संख्या में ईरानी पुलिस और आर्म्ड फोर्सेज को भर दिया जाता है। उस समय उस कैम्प में लगभग 50 गुजराती मौजूद होते हैं, सभी गुजराती को अचानक एक मसीहा के रूप में प्रोजेक्ट का चीफ इंजीनियर एक कश्मीरी “गुल मोहम्मद शाह” के रूप में मिलता है और बाहर गांव से आये हुए ईरानियों से मामले को शांत करने की अपील करते हुए पूरे मामले को सुलझा देता है। हम तमाम बिहारी गुजरातियों के समर्थन में खड़े रहते हैं, एक भी बिहारी गुजरातियों को किसी भी प्रकार से ठेस नही पहुंचाता है जबके उसी समय गुजरात में मुसलमानों का कत्ल आम हो रहा था। बिहारी गुजरातियों को अपने पास रखता है। जो गुजराती कश्मीरी होने के कारण उनसे हीन भावना रखता था वही कश्मीरी उसके प्राण का रक्षक बनकर उस उग्र भीड़ में जाकर कश्मीरी पहचान के साथ पूरे मामले को निपटा देता है। गुजरातियों के साथ सभी बिहारी एवं एक कश्मीरी मौजूद प्रोजेक्ट चीफ इंजीनियर साथ खड़ा रहता है। यह है गुजरात , कश्मीर और बिहार में फर्क। यह है गुजराती शाह”अमित शाह” और कश्मीरी शाह”गुल मोहम्मद शाह” का फर्क। यह है कश्मीर और गुजरात का फर्क। यह है बिहार और गुजरात का फर्क।

मैं भी उस प्रोजेक्ट और कैम्प में गुजरातियों का साथ दिया था। लेकिन एक सवाल मेरे मन में आता है की क्या सभी गुजराती सनमलैंगिक होते हैं?

Mustaqim Siddiqui
इंसाफ इंडिया

Disclaimer : लेखक के निजी विचार हैं, तीसरी जंग का कोई सरोकार नहीं है|