#एशिया के देश PART 10 : ’उत्तर कोरिया का इतिहास’

#एशिया के देश PART 10 : ’उत्तर कोरिया का इतिहास’

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उत्तर कोरिया
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कोरिया जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य
조선민주주의인민공화국
जोसन मिंजुजुई इंमिं गोंगहुआगुग

ध्वज कुल चिह्न
राष्ट्रवाक्य: 강성대국
“शक्तिशाली और समृद्ध देश”
राष्ट्रगान : देशभक्ति का गीत (राष्ट्रगान उत्तर कोरिया) (अंग्रेज़ी: Aegukka)

राजधानी और सबसे बडा़ नगर – प्योंगयांग
39°2′N 125°45′E
राजभाषा(एँ) – कोरियाई भाषा
निवासी – उत्तरी कोरियाई, कोरियाई
सदस्यता- {{{membership}}}
सरकार – जूचे समाजवादी गणराज्य,
एकल दल – वामपंथी राज्य
– गणराज्य के चीर अध्यक्ष – किम जोंग उन
(दिवंगत)
– राष्ट्रीय रक्षा आयोग के अध्यक्ष किग जोंग-इल
– सुप्रीम पीपुल्स असेंबली के अध्यक्ष किम यांग-नाम
– प्रधानमंत्री किम यांग-इल
विधान मण्डल सुप्रीम पीपुल्स असेंबली
स्थापना
– स्वतंत्रता की घोषणा १ मार्च १९१९
– मुक्ति 15 अगस्त १९४५
– आधिकारिक घोषणा ९ सितंबर १९४८
क्षेत्रफल
– कुल १२०,५४० वर्ग किलोमीटर (९८ वां)
४६,५२८ वर्ग मील
– जल (%) ४.८७
जनसंख्या
– २००९ जनगणना २२,६६६,००० (५१ वां)
सकल घरेलू उत्पाद (पीपीपी) २००७ प्राक्कलन
– कुल $ ४० बिलियन (९५ वां)
– प्रति व्यक्ति $१,७०० (२००८ अनु.) (१९१ वां)
मानव विकास सूचकांक (१९९८) 0.७६६
उच्च · ७५ वां
मुद्रा उत्तर कोरियाई वॉन (₩) (KPW)
समय मण्डल कोरिया मानक समय (यू॰टी॰सी॰+९)
दिनांक प्रारूप yy, yyyy년 mm월 dd일
yy, yyyy/mm/dd (CE–१९११, CE)
दूरभाष कूट ८५०
इंटरनेट टीएलडी .kp

उत्तर कोरिया, आधिकारिक रूप से कोरिया जनवादी लोकतांत्रिक गणराज्य (हंगुल: 조선 민주주의 인민 공화국, हांजा:朝鲜民主主义人民共和国) पूर्वी एशिया में कोरिया प्रायद्वीप के उत्तर में बसा हुआ देश है। देश की राजधानी और सबसे बड़ा शहर प्योंगयांग है। कोरिया प्रायद्वीप के 38वें समानांतर पर बनाया गया कोरियाई सैन्यविहीन क्षेत्र उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच विभाजन रेखा के रूप में कार्य करता है। अमनोक नदी और तुमेन नदी उत्तर कोरिया और चीन के बीच सीमा का निर्धारण करती है, वहीं धुर उत्तर-पूर्वी छोर पर तुमेन नदी की एक शाखा रूस के साथ सीमा बनाती है।

1910 में, कोरिया साम्राज्य पर जापान के द्वारा कब्जा कर लिया गया था। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में जापानी आत्मसमर्पण के बाद, कोरिया को संयुक्त राज्य और सोवियत संघ द्वारा दो क्षेत्रों में विभाजित किया कर दिया गया, जहाँ इसके उत्तरी क्षेत्र पर सोवियत संघ तथा दक्षिण क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा कब्ज़ा कर लिया गया। इसके एकीकरण पर बातचीत विफल रही, और 1948 में, दोनों क्षेत्रो पर अलग-अलग देश और सरकारें: उत्तर में सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पीपुल रिपब्लिक ऑफ कोरिया, और दक्षिण में पूंजीवादी गणराज्य कोरिया बन गईं। दोनों देश के बीच एक यूद्ध (1950-1953) भी लड़ा जा चुका हैं। कोरियाई युद्धविधि समझौते से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन दोनों देश के बीच शांति समझौते हस्ताक्षर नहीं किए गए।

उत्तर कोरिया आधिकारिक तौर पर खुद को आत्मनिर्भर समाजवादी राज्य के रूप में बताता है। और औपचारिक रूप से चुनाव भी किया जाता है। हालांकि आलोचक इसे अधिनायकवादी तानाशाही का रूप मानते है, क्योंकि यहाँ की सत्ता पर किम इल-सुंग और उसके परिवार के लोगो का अधिपत्य हैं। कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के अनुसार उत्तर कोरिया में मानवाधिकार उल्लंघन का समकालीन दुनिया में कोई समानांतर नहीं है।सत्तारूढ़ परिवार के सदस्य की अगुवाई में कोरिया की श्रमिक पार्टी (डब्ल्यूपीके), देश की सत्ता चलती है और दोनों देशो के पुनर्मिलन के लिए डेमोक्रेटिक फ्रंट का नेतृत्व करता है जिसमें सभी राजनीतिक अधिकारियों के सदस्य होने की आवश्यकता होती है।

राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की विचारधारा “जुचे”, 1972 में “मार्क्सवादी-लेनीनवादी के रचनात्मक प्रयोग” के रूप में संविधान में पेश की गई। राज्य के उद्यमों और सामूहिक कृषि के माध्यम से कृषि उत्पादन पर राज्य का स्वामित्व होता हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आवास और खाद्य उत्पादन जैसी अधिकांश सेवाएं सब्सिडी वाली या राज्य-वित्त पोषित हैं। 1994 से 1998 तक, उत्तर कोरिया में अकाल पड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप 0.24 से 0.42मिलियन लोगों की मौत हुई और देश अब भी खाद्य उत्पादन में संघर्ष कर रहा है। उत्तर कोरिया सोंगुन या “सैन्य-पहले” नीति का पालन करता है।1.21 मिलियन की इसकी सक्रिय सेना, चीन, अमेरिका और भारत के बाद दुनिया में चौथी सबसे बड़ी है। नार्थ कोरिया एक परमाणु हथियार संपन्न देश हैं।.उत्तर कोरिया अपने आप को एक नास्तिक देश मानता है यहाँ पर कोई आधिकारिक धर्म भी नहीं है साथ ही सार्वजनिक रूप से धर्म को एक हासिए पे ही रखा जाता हैं।

जापानी आधिपत्य (1910-1945)
सन् १९०५ में रुसो-जापान युद्ध के बाद जापान द्वारा कब्जा किए जाने के पहले प्रायद्वीप पर कोरियाई साम्राज्य का शासन था। सन् १९४५ में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद यह सोवियत संघ और अमेरिका के कब्जे वाले क्षेत्रों में बांटा दिया गया। उत्तर कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यवेक्षण में सन् १९४८ में दक्षिण में हुए चुनाव में भाग लेने से इंकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप दो कब्जे वाले क्षेत्रों में अलग कोरियाई सरकारों का गठन हुआ। उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों ही पूरे प्रायद्वीप पर संप्रभुता का दावा किया, जिसकी परिणति सन् १९५० में कोरियाई युद्ध के रूप में हुई। सन् 1953 में हुए युद्धविराम के बाद लड़ाई तो खत्म हो गई, लेकिन दोनों देश अभी भी आधिकारिक रूप से युद्धरत हैं, क्योंकि शांतिसंधि पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए गए। दोनों देशों को सन् १९९१ में संयुक्त राष्ट्र में स्वीकार किया गया। २६ मई २००९ में उत्तर कोरिया ने एकतरफा युद्धविराम वापस ले लिया।

सोवियत आधिपत्य और कोरिया का विभाजन (1945–1950)
1945 में जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो, कोरियाई प्रायद्वीप को 38वीं समानांतर रेखा से दो क्षेत्रों में विभाजित कर दिया गया, जिसके उत्तरी क्षेत्र में सोवियत संघ का और दक्षिणी हिस्से पर संयुक्त राज्य अमेरिका का कब्जा रहा। विभाजन रेखा हेतु दो अमेरिकी अधिकारियों, डीन रस्क और चार्ल्स बोनेस्टेल को काम सौंपा गया, उन्होंने देश को लगभग आधे-आधे भाग में विभाजित किया था लेकिन राजधानी सियोल को अमेरिकी नियंत्रण के तहत रखा था।[ फिर भी, विभाजन तुरंत सोवियत संघ द्वारा स्वीकार किया गया। सोवियत जनरल तेरेन्ति शैतकोव ने 1945 में सोवियत नागरिक प्राधिकरण की स्थापना की सिफारिश की, और उत्तर कोरिया के लिए फरवरी 1946 में स्थापित अस्थायी पीपल्स कमेटी के अध्यक्ष के रूप में किम इल-सुंग का समर्थन किया। अस्थायी सरकार के दौरान, शैतकोव की मुख्य उपलब्धि, व्यापक भूमि सुधार कार्यक्रम रही जिसने उत्तरी कोरिया की जमींदारी प्रणाली को समाप्त कर दिया। वहाँ के जमींदार और जापानी सहयोगी दक्षिण की और भाग खड़े हुए। शैतकोव ने वहाँ के कई प्रमुख उद्योगों को राष्ट्रीयकृत कर दिया और कोरिया के भविष्य पर बातचीत करने के लिए मास्को और सियोल में सोवियत प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया। 9 सितंबर 1948 में डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया को स्थापित किया गया। शैतकोव पहले सोवियत राजदूत के रूप में रहे, जबकि किम इल-शुंग को इसका प्रमुख बनया गया।

1948 में सोवियत सेना उत्तरी कोरिया से वापस लौट गई और 1949 में अमेरिकी सेना दक्षिण कोरिया से हट गई। राजदूत शैतकोव को संदेह था की दक्षिण की कम्युनिस्ट विरोधी सरकार, उत्तर पर आक्रमण करने की योजना बना रही हैं, वही वे समाजवाद के तहत कोरियाई प्रायद्वीप के एकीकरण की किम के लक्ष्य के प्रति सहानुभूति रखते थे। दोनों ने दक्षिण पर पहले हमले करने के लिए जोसेफ स्टालिन को मनाने में सफल रहे, जो आगे चल कर कोरियाई युद्ध के रूप में हुआ।

मानचित्र नाम कोरियाई नाम प्रशासनिक सीट
North Korea location map 1.png राजधानी (चिखालसि)
1 प्योंगयांग 평양직할시 (चुंग-गूयोक)
विशेष शहर
2 रसोन * 라선특별시 (रेजिन-गूयोक) *
प्रांत
3 दक्षिण प्योंगन 평안남도 प्योंगसांग
4 उत्तर प्योंगन 평안북도 सिनुइजू
5 चैगांग 자강도 कांग्गये
6 दक्षिण ह्वांग्ही 황해남도 हैजु
7 उत्तर ह्वांग्ही 황해북도 सारिवोन
8 कंग्वोन 강원도 वोनसान
9 दक्षिण हमग्यांग 함경남도 हमहुंग
10 उत्तर हमग्यांग 함경북도 चोंगजिन
11 रयंगगांग 량강도 ह्यसन

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2016 के उत्तर कोरियाई परमाणु परीक्षण

परीक्षण स्थल 41.309°N 129.034°Eनिर्देशांक: 41.309°N 129.034°E, पुंग्ये-री परमाणु परीक्षण स्थल, किल्जु काउंटी
अवधि 10:00:01, 6 जनवरी 2016 यूटीसी+08:30 (01:30:01 यूटीसी)
कुल परीक्षण 1
परीक्षण प्रकार भूमिगत
उपकरण का प्रकार उत्तर कोरियाई सरकार के अनुसार हाइड्रोजन, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रीय गुप्तचर सेवा के अनुसार परमाणु
भ्रमण

6 जनवरी 2016 को 10:00:01 यूटीसी+०८:३० पर, उत्तर कोरिया ने किल्जु शहर, किल्जु काउंटी से लगभग 50 किलोमीटर (30 मील) दूर उत्तर-पश्चिम में अपने पुंग्ये-री परमाणु परीक्षण स्थल पर एक भूमिगत परमाणु परीक्षण किया। उत्तर कोरियाई मीडिया ने इन परीक्षणों के बाद इसके सफल होने का दावा किया; उत्तर कोरिया के पास इस क्षमता का होना लगभग एक महीने पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ था। संयुक्त राज्य भूगर्भ सर्वेक्षण ने इस जगह के पास 5.1 परिमाण के भूकंप आने का दावा किया; चीनी भूकम्प नेटवर्क केंद्र ने इसके 4.9 परिमाण के होने का दावा किया; वहीं दक्षिण कोरियाई मौसम विभाग के अनुसार इसकी तीव्रता 4.2 पैमान की थी।

द न्यूयॉर्क टाईम्स के अनुसार, उत्तर कोरिया ने परीक्षण को सफल बताया,जबकि द गार्जियन के अनुसार कोरियाई सरकार ने इसे अमेरिका के बेहद ज्यादा परमाणु हथियारों के जवाब में अपनी सुरक्षा के लिये किया गया परीक्षण बताया है।[3]एन॰के॰ न्यूज ने अपनी रपट में कोरियाई केंद्रीय दूरदर्शन को उद्धृत करते हुए कहा कि,

“The U.S. has gathered forces hostile to [the] DPRK and raised a slanderous human rights issue to hinder [the] DPRK’s improvement. It is [therefore] just to have [a] H-bomb as self-defense against the U.S. having numerous and humongous nuclear weapons. The DPRK’s fate must not be protected by any forces but [the] DPRK itself”.

एन॰के॰ न्यूज
हालांकि दक्षिण कोरिया की गुप्तचर संस्था और बाहरी परमाणु विशेषज्ञ प्योंगयांग के दावों पर शक़ करते हुए कह रहे हैं कि उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन नहीं बल्कि किसी आम परमाणु बम का परीक्षण किया है।

उत्तर कोरिया (आधिकारिक: कोरियाई लोकतांत्रिक गणराज्य अंग्रेज़ी: Democratic People’s Republic of Korea, या DPRK) ने इसके पहले तीन भूमिगत परमाणु परीक्षण किये हुए थे। ये परीक्षण वर्ष २००६, २००९, और २०१३ में हुए थे जिनके फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर विभिन्न किस्म के प्रतिबंध लगा दिये थे

दिसम्बर २०१५ में, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने कहा था की उनके देश के पास हाइड्रोजन बम के प्रक्षेपण करने की क्षमता है। ज्ञात हो कि, हाइड्रोजन बम उत्तर कोरिया द्वारा बम पहले परीक्षण किये गये आम परमाणु बमों की तुलना में कहीं ज़्यादा ताक़तवर और विनाशकारी होता है। उन के इस दावे को व्हाइट हाउस और दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के द्वारा संदेह से देखा गया।

नव वर्ष दिवस पर दिये गये अपने भाषण में, किम जोंग-उन ने चेताया था कि बाहरी शक्तियों द्वारा की गई उकसावे की कार्वाइयों को “न्याय की पवित्र लड़ाई” (“holy war of justice”) से निपटा जायेगा।

परीक्षण
२०१६ के परमाणु परीक्षण 10:00:01, 6 जनवरी 2016 स्थानीय समय (01:30:01 यूटीसी) पर पुंग्ये-री परमाणु परीक्षण स्थल में किये गये बताए गये जिनकी वजह से ४.९ अथवा ५.१ परिमाण का भूकम्प दर्ज किया गया। यह २०१३ में हुए पिछले परीक्षण के दौरान आये ५.१ परिमाण के भूकम्प जैसा ही था।२०१३ के परीक्षणों पर उत्तर कोरिया ने ६-९ किलोटन टीएनटी के समतुल्य के विस्फ़ोट होने का दावा किया था हालांकि, २०१६ के परीक्षणों को उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का एक सफल परीक्षण बताया है, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और दक्षिण कोरियाई सरकार ने इस पर संदेह जताया है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
उत्तर कोरिया की इस घोषणा के बाद दुनिया भर में इन परीक्षणों की आलोचना का दौर शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि “…(उत्तर कोरिया) अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट ख़तरा बना हुआ है।”सुरक्षा परिषद का कहना है कि उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण करके संयुक्त राष्ट्र के पहले के प्रस्तावों का उल्लंघन किया है और इसके मद्देनज़र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर और प्रतिबंध लगाने की बात भी कही है।

दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया ने इसे विश्व शांति के लिये गंभीर खतरा बताते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्पों की घोर अवहेलना बताते हुए इसकी कड़ी भर्त्सना की है।

जापान
Flag of Japan.svg जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे ने इन परीक्षणों को परमाणु हथियार निषेधन की अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को चुनौती और उसकी अवमानना बताया है। उन्होंने इसे जापान की सुरक्षा के लिये खतरा बताते हुए कहा है कि उनका देश इन परीक्षणों के जवाब में कड़ी कार्यवाई करेगा।

ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशप ने एक विज्ञप्ति में इसे उत्तर कोरियाई सरकार की भड़काऊ और खतरनाक कार्यवाई बताते हुए इसकी भर्त्सना की।

चीन
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन इस परमाणु परीक्षण का विरोध करता है।

फिलिपींस
फिलिपींस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि फिलिपींस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उत्तर कोरिया को परमाणु परीक्षणों के संदर्भ में दिये गये दिशा निर्देशों की अवहेलना करने वाली किसी भी कार्यवाई की घोर भर्त्सना करता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका
संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा कि वो उकसावे की कार्यवाईयों का जवाब देगा और उत्तर कोरिया को अपने अंतरराष्ट्रीय वादों का मान रखना चाहिये।

संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के दावों की हकीकत जाँचने व बाद के हलातों पर चर्चा करने के लिये व उ.को. पर और अधिक प्रतिबंध लगाने या किसी कार्यवाई पर चर्चा करने के लिये बैठक बुलाई है।

रूसी संघ
रूस की सरकार ने हाइड्रोजन बम परीक्षण की घोर भर्त्सना करते हुए इसे देश के लिये खतरा बताया है।

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किल्जु काउंटी

किल्जु काउंटी जिसे कभी-कभी किल्चू काउंटी भी कहा जाता है उत्तर कोरिया के उत्तरी हैमग्यॉंग प्रांत का एक काउंटी है। यह क्षेत्र प्राचीन गोगोरियू साम्राज्य का हिस्सा और जुर्कन लोगों का निवास स्थान था। इस काउंटी में 1 नगर, पांच जिले और 22 गांव हैं। उत्तर कोरिया के सैन्य प्रयोगों का भी यह एक महत्वपूर्ण प्रदेश है। उत्तर कोरिया ने अपने चारों परमाणु परीक्षण यहीं किये हैं।

उत्तर कोरिया और अमरीका की रंजिश की पूरी कहानी

हम ने हर हिलती हुई चीज़ पर बमबारी की.’ ये लफ्ज़ अमरीकी विदेश मंत्री डेयान रस्क के थे.

वो कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौरान उत्तर कोरिया पर अमरीकी बमबारी के मकसद पर बात कर रहे थे.

अमरीकी रक्षा विभाग के दफ्तर पेंटागन के विशेषज्ञों ने इस अभियान का नाम ‘ऑपरेशन स्ट्रैंगल’ रखा था.

कई इतिहासकार बताते हैं कि तीन सालों तक उत्तर कोरिया पर नॉनस्टॉप हवाई हमले किए जाते रहे.

वामपंथी रुझान रखने वाले इस मुल्क के कई गांव, कई शहर बर्बाद हो गए, लाखों आम लोग मारे गए.

कोरियाई राजनीति
जेम्स पर्सन कोरियाई राजनीति और इतिहास के जानकार हैं और फिलहाल वे वॉशिंगटन स्थित विल्सन सेंटर से जुड़े हुए हैं.

जेम्स पर्सन कहते हैं कि ये अमरीकी इतिहास को वो पन्ना है जिसके बारे में अमरीकियों को ज्यादा कुछ बताया नहीं गया है.

उन्होंने बताया, “कोरिया युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध और वियतनाम की लड़ाई के बीच हुआ था. ज्यादातर अमरीकियों को कोरियाई युद्ध के बारे में बहुत कम जानकारी है.”

लेकिन उत्तर कोरिया इस युद्ध को कभी भुला नहीं सका. उसके घाव कभी भर नहीं पाए.

अमरीका और बाक़ी पूंजीवादी दुनिया से उसकी रंजिश की वजहों में से उत्तरी कोरिया की ये यादें एक वजह हैं.

दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़
तभी से उत्तर कोरिया अमरीका को एक ख़तरे के तौर पर देखता है. और दोनों मुल्कों की यही दुश्मनी अब कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बनकर उभर गई है.

लेकिन वो कोरियाई युद्ध किस बात को लेकर हुआ था, उसकी वजह क्या थी और ये मुद्दा अभी भी अनसुलझा क्यों है?

ये 1950 की बात है. अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के समर्थन वाली अमरीकी सेना दक्षिण कोरिया में नॉर्दर्न आर्मी के घुसपैठ के ख़िलाफ़ लड़ रही थी.

सोल में कम्युनिस्ट समर्थकों के दमन के बाद उत्तर कोरिया के तत्कालीन नेता किम उल-संग ने दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया था.

किम उल-सुंग उत्तर कोरिया के वर्तमान शासक किम उल-जोंग के दादा थे.

अपने दक्षिणी पड़ोसी और अमरीका के ख़िलाफ़ उत्तर कोरिया की इस कार्रवाई में किम उल-सोंग को स्तालिन का समर्थन हासिल था.

कोरिया युद्ध शीत युद्ध का सबसे पहला और सबसे बड़ा संघर्ष था.

लड़ाई के पहले चरण में अमरीकी हवाई हमले ज्यादातर दक्षिण कोरिया के सैनिक ठिकानों और औद्योगिक केंद्रों पर सीमित रहे.

लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिससे युद्ध की पूरी तस्वीर बदल गई.

युद्ध शुरू होने के कुछ महीनों के बाद चीन को ये आशंका सताने लगी कि अमरीकी फौज उसकी सरहदों की तरफ रुख कर सकती है.


सोवियत संघ
इस वजह से चीन ने तय किया कि इस लड़ाई में वो अपने साथी उत्तर कोरिया का बचाव करेगा.

चीनी सैनिकों के मोर्चा खोलने के बाद अमरीकी सैनिकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा. उसके हताहत होने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ गई.

हालांकि चीनी सैनिकों के पास उम्दा हथियार नहीं थे लेकिन उनकी तादाद बहुत बड़ी थी.

प्रोफेसर जेम्स पर्सन बताते हैं, “उत्तर कोरिया को चीन और सोवियत संघ से मिलने वाली सप्लाई लाइन को काटना बहुत जरूरी हो गया था.”

इसके बाद जनरल डगलस मैकअर्थर ने ‘धरती को जला देने वाली अपनी युद्ध नीति’ पर अमल करने का फैसला किया.

जानलेवा हमला
वे प्रशांत क्षेत्र में द्वितीय विश्व युद्ध के हीरो के तौर पर जाने जाते थे. ये उत्तर कोरिया पर पूरी तरह से हवाई हमले की शुरुआत थी.

इसी लम्हे से उत्तर कोरिया के शहरों और गांवों के ऊपर से रोज़ाना अमरीकी बम वर्षक विमान बी-29 और बी-52 मंडराने लगे.

इन लड़ाकू विमानों पर जानलेवा नापलम लोड था. नापलम एक तरह का ज्वलनशील तरल पदार्थ होता है जिसका इस्तेमाल युद्ध में किया जाता है.

हालांकि इससे जनरल डगलस मैकअर्थर की बहुत बदनामी भी हुई लेकिन ये हमले रुके नहीं.

सोल नेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ताइवू किम बताते हैं कि अमरीकी कार्रवाई के बाद जल्द ही उत्तर कोरिया के शहर और गांव मलबे में बदलने लगे.

तीन साल की लड़ाई
संघर्ष के दौरान स्ट्रैटेजिक एयर कमांड के हेड रहे जनरल कर्टिस लीमे ने बाद में बताया था कि हमने 20 फीसदी आबादी को नेस्तनाबूद कर दिया था.

उत्तर कोरिया पर कई किताबें लिख चुकें पत्रकार ब्लेन हार्डेन ने अमरीकी सैनिक कार्रवाई को ‘युद्ध अपराध’ करार दिया था.

हालांकि ब्लेन हार्डेन की दलील से जेम्स पर्सन इत्तेफाक नहीं रखते हैं, “ये एक युद्ध था जिसमें पार्टियों ने अपनी हद पार की थी.”

किम जैसे शोधकर्ता बताते हैं कि तीन सालों की लड़ाई के दौरान उत्तर कोरिया पर 635,000 टन बम गिराये गए.

उत्तर कोरिया के अपने सरकारी आंकड़ें कहते हैं कि इस युद्ध में 5000 स्कूल, 1000 हॉस्पिटल और छह लाख घर तहस-नहस हो गए थे.

युद्ध के बाद जारी किए गए एक सोवियत दस्तावेज़ के मुताबिक़ बम हमले में 282,000 लोग मारे गए थे.

युद्ध में हुई बर्बादी के आंकड़ों की पुष्टि करना तकरीबन नामुमकिन है लेकिन बर्बादी के पैमाने से शायद ही कोई इनकार कर पाए.

युद्ध के बाद एक अंतरराष्ट्रीय आयोग ने भी उत्तर कोरिया की राजधानी का दौरा किया था.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बम हमले से शायद ही कोई इमारत अछूता रह पाया हो.

और जैसा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के ड्रेसडेन जैसे शहरों के साथ हुआ था, उत्तर कोरियाई लोगों ने अपनी सड़कों पर धुएं का गुबार देखा.

उन्हें भूमिगत ठिकानों में शरण लेनी पड़ी जो जान बचाने के लिए बनाए गए थे.

एक वक्त ऐसा भी आया जब दुनिया कोरियाई प्रायद्वीप की ओर देख रही थी. ये डर सता रहा था कि अमरीका और सोवियत संघ कहीं खुलेआम परमाणु युद्ध न छेड़ दें.

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री पाक हेन एन ने संयुक्त राष्ट्र में इसे अमरीकी साम्राज्यवादियों का शांतिपूर्ण नागरिकों पर बर्बर हमला करार दिया था.

मंत्री ने कहा कि प्योंगयांग चारों तरफ से आग से घिर गया था, उस पर बर्बर तरीके से बमबारी की गई और ये सुनिश्चित किया गया कि लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल सकें.

बांधी, बिजली प्लांट्स और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया.

ताइवू किम बताते हैं कि उत्तर कोरिया में एक सामान्य ज़िंदगी जीना लगभग नामुमकिन हो गया था.

इसलिए उत्तर कोरियाई अधिकारियों ने बाजार, सैनिक गतिविधियां भूमिगत तौर पर चलाने का फैसला किया.

जल्द ही उत्तर कोरिया एक अंडरग्राउंड मुल्क में तब्दील हो गया और वहां स्थाई रूप में एयरक्राफ्ट अलर्ट लागू कर दिया गया.

आखिरकार 1953 में लंबी बातचीत के बाद समझौते पर दस्तखत हुए.

अमरीकी राष्ट्रपति ट्रूमैन नहीं चाहते थे कि संकट उस हद तक पहुंच जाए जहां सोवियत संघ के साथ कोई सीधा टकराव नहीं हो.

युद्ध और आसमान से बरसती आग ने उत्तर कोरिया को एक बंकर में छुपा हुआ देश बना दिया था, सत्तर साल बाद हालात अब भी ज्यादा नहीं बदले हैं.