आधुनिक भारत के महत्वपूर्ण इतिहासकार और शिक्षाशास्त्री प्रोफ़ेसर मुशीरुल हसन नहीं रहे

आधुनिक भारत के महत्वपूर्ण इतिहासकार और शिक्षाशास्त्री प्रोफ़ेसर मुशीरुल हसन नहीं रहे

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Mohd Dastagir Khan
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,إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ.
Prof. Mushirul Hasan, former VC, JMI, & former Director General, National Archives of India, passed away early morning today 10.12.2018. His namaz-e-Janaza shall be performed at 1.00 pm at Babul Ilm & 2.00 pm at Jamia Mosque and burial shall take place in Jamia graveyard.

अलविदा प्रोफ़ेसर मुशीरूल हसन
एक ज़माना था मुशीरूल हसन साहब का। उन्हें सुनने के लिए भीड़ लगती थी। उनका लिखा अंडरलाइन कर पढ़ा जाता था। उनकी किताबें लाँच होती थीं। ख़बरें बनती थी। टीवी की बहस बग़ैर मुशीर साहब के कहाँ पूरी होती थी। अख़बार और जर्नल उनके लेख से भरे रहते थे। एक दुर्घटना के बहाने ज़िंदगी उन्हें पर्दे के पीछे ले गई। ज़माने तक उनका लिखा पढ़ने को नहीं मिला। लोग भूलने लगे। आज सुबह वे इस दुनिया को ही छोड़ गए। मगर जो लिख कर गए हैं उससे एक आलमारी भर जाए। आधुनिक भारत के बड़े और क़ाबिल इतिहासकारों में से रहे हैं। एक शानदार इतिहासकार हमारे बीच से गया है। अपने विषय के इस क़द्दावर शख़्स को अलविदा। काफ़ी कुछ सीखा। जाना। उसके लिए आभार। कुछ किताबों की सूची है जिससे पता चलेगा कि कोई हवा में मुशीरूल हसन नहीं बनता है। वह बनता किताबों के बीच।

1. From Ghalib Dilli to Lutyen’s New Delhi

2. Islam and India Nationalism

3. Sarojini Naidu: Her way with words

4. From Pluralism to Separatism : Qasba in Colonial Awadh

5. Exploring the west: Three travel narratives

6. Partners in Freedom Jamia Millia Islamia

7. Image and Representation: stories of muslims lives in India

8. Knowledge Power and Politics

9. Moderate and Militant: images of India’s Muslims

10. Journey to the holy land: A pilgrims Diary

11. Islam pluralism Nationhood: Legacy of Maulana Azad

12. Wit and Wisdom: pickings from Parsee punch

13. Faith and Freedom: Gandhi in History

14. The Nehrus: Personal Histories

15. India’s partition: process, strategy and mobilisation

16. Wit and Humour

17. Roads to Freedom: Prisoners in Colonial India
18. Legacy of a Divided Nation

19. When stone walls cry: The Nehrus in Prison

20. memories of a fragmented Nation

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Arun Maheshwari

मुशीरुल हसन नहीं रहे

आधुनिक भारत के एक महत्वपूर्ण इतिहासकार और शिक्षाशास्त्री मुशीरुल हसन का आज दिल्ली में सिर्फ 69 काल की उम्र में असामयिक निधन हो गया । जामिया मीलिया विश्वविद्यालय के एक प्रमुख रूपाकार के रूप में प्रसिद्ध हसन साहब को उनके प्रगतिशील और सांप्रदायिकता-विरोधी दृढ़ दृष्टिकोण के लिये काफी श्रद्धा और सम्मान के साथ देखा जाता था । भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और भारतीय समाज में बहुलतावाद के बारे में उनकी कई चर्चित किताबें है ।

आज की कठिन घड़ी में इतनी कम उम्र में उनके जैसे एक व्यक्तित्व का चला जाना पूरे प्रगतिशील और धर्म-निरपेक्ष आंदोलन की एक गहरी क्षति है ।

हम उनके प्रति आंतरिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके सभी परिजनों के प्रति संवेदना प्रेषित करते हैं ।