दिल्ली और उत्तर प्रदेश में NIA की कार्यवाही संघ और PMO के इशारे पर : एनआईए की थ्योरी पर उठ रहे हैं सवाल?

दिल्ली और उत्तर प्रदेश में NIA की कार्यवाही संघ और PMO के इशारे पर : एनआईए की थ्योरी पर उठ रहे हैं सवाल?

Posted by

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और यूपी पुलिस के एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर एक साथ छापेमारी कर के दस के करीब मुस्लिम लोगों को आतंकवादी गतविधों में शामिल होने के आधार पर गिरफ्तार/हिरासत में लिया है, NIA की विश्वसनीयता, साख देशभर में किसी है यह किसी को बताने की ज़रूरत नहीं है, NIA के अतरिक्त अन्य जाँच व ख़ुफ़िया एजेंसियां पहले से ही विशेष मानसिकता के मुताबिक काम कर मुसलमानों को ग़लत/झूठे मामलों में फंसती रही हैं, दसियों साल जेलों में बिताने के बाद वह लोग अदालत से बरी होते रहे हैं, गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुकझीामंत्री रहते अनेक फ़र्ज़ी एनकाउंटर और आतंकवादी घटनाएं हुईं, यह ‘गेम’ कैसे और कहाँ से खेला जाता है बताने की ज़रूरत नहीं है

 

भारत में संघ परिवार का एजेंडा दलित – मुस्लिम विरोध/दुश्मनी के आधार पर चलाया जा रहा है, संघ परिवार की पकड़ सरकार से लेकर ख़ुफ़िया एजेंसियों, जाँच एजेंसियों और पुलिस व अन्य विभागों में बहुत मज़बूत है, संघ के स्वमसेवक समय समय पर ‘ऊपर से मिले’ दिशा निर्देशों पर कार्यवाहियां करते हैं, इस गठबंधन में मीडिया इनके सहभागी की भूमिका में रहता है

मुंबई आतंकवादी हमला हो या संसद हमला इन पर सवाल उठाने वाले खुद बड़े सरकारी अधिकारी रहे हैं फिर क्या कारण हैं कि उन की जाँच नहीं की गयी, संघ परिवार इस्राईल मॉडल पर काम करता है, सूत्रों के मुताबिक आगामी लोकसभा चुनावों से पहले संघ बीजेपी की विफ़लतों से जनता का ध्यान हटाने के लिए आतंकवाद का मुद्दा उठाना चाहता है, सूत्रों के मुताबिक दिल्ली और उत्तर प्रदेश में NIA की कार्यवाही संघ और PMO के इशारे पर हुई है|

यह भी पढ़ें
============
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और यूपी पुलिस के एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) द्वारा की गई कार्रवाई पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां ही नहीं, बल्कि देश का एलीट वर्ग और सोशल मीडिया भी इस मामले में दोहरे पथ पर है। एनआईए-आईएसआईएस-फ़िदायीन अटैक, ये तीन बातें ऐसी हैं जो आपस में मेल नहीं खा रही हैं।

बड़े नेता थे निशाने पर
जाच एजेंसी का कहना है, आरोपी कथित तौर पर आईएसआईएस से प्रेरणा लेकर देश में तोड़फोड़ करने और बड़े नेताओं को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। दूसरा, उनके पास जो
हथियार व गोला-बारुद मिला है, उनकी मदद से फिदायीन हमला होना था। तीसरा, एनआईए ने इस ऑपरेशन में जो सामग्री जब्त करने का दावा किया है, उस पर जनता, नेता और कानून के जानकार खुद प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं। इनके सबके बावजूद जांच एजेंसी का यह कहना कि फिदायीन हमले की तैयारी थी, संदेहास्पद लगता है।

एनएसजी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में काम कर चुके दो पूर्व अफसरों का सीधा कहना है कि एनआईए ने जिस तरीके से इस केस को मीडिया के सामने पेश किया है, उस पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। एनआईए ने इस केस को मीडिया के सामने लाने में बहुत जल्दबाजी कर दी। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा जैसी बड़ी पार्टियां भी इस मुद्दे पर एक राय नहीं बना पा रही हैं।

सोशल मीडिया में जब एनआईए की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे तो केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली और प्रकाश जावड़ेकर सहित कई नेताओं को जांच एजेंसी के समर्थन में उतरना पड़ा। दूसरी ओर, वकील प्रशांत भूषण ने कहा, एनआईए अपने पुराने खेल, खेल रही है। बेकसूर मुसलमानों को पकड़कर उन्हें आईएसआईएस का एजेंट बताकर बड़ी आतंकी साजिश कह रही है। गांव के लोगों का आरोप है कि इनके सबके पहचान पत्र जला दिए गए। ट्रैक्टर के पाइप को रॉकेट लॉन्चर और लोहे के चूरे को बारूद बताया जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने अपने ट्वीट में कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय सर्वोपरि है, लेकिन संदिग्धों को सुतली बम के आधार पर आतंकी और आईएसआईएस से जुड़ा बताने का दावा अतार्किक है। इस आरोप ने पहले ही इन लोगों और इनके परिवारों के जीवन को बर्बाद कर दिया है।

ऐसे में एनआईए को उन मौकों से सबक लेना चाहिए, जिनमें आरोपी दशकों के बाद आरोपों से बरी हो गए थे। कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने कहा, जब इतने लंबे समय से इनका नेटवर्क चल रहा था तो आईबी कहां थी। अगर एनआईए को कई माह पहले इनकी खबर थी तो उसी वक्त कार्रवाई क्यों नहीं की। हो सकता है कि यह एक चुनावी स्टंट हो।

एक्सपर्ट के मुताबिक… इन सब बातों के चलते उठ रहे हैं सवाल
-आरोपियों के पास जो हथियार-गोला बारुद मिला है, क्या उससे किसी बड़ी जगह पर फिदायीन हमला किया जा सकता है। ध्यान रहे कि 26/11 में आतंकी अजमल कसाब और उसके साथियों ने फिदायीन हमला किया था। उनके पास जो हथियार थे, क्या उनके जैसा कोई एक भी इनके पास मिला है।

-हैंड ग्रेनेड जो फिदायीन हमले में बहुत अहम माना जाता है, क्या ऐसा कुछ बरामद नहीं हुआ है।

-कश्मीर में आए दिन फिदायीन हमले हो रहे हैं, कई बार सुरक्षा बलों को उन्हें मौत के घाट उतारने में लंबा वक्त लग जाता है, एनआईए ने जो हथियार बरामद किए हैं, उनसे कितनी देर तक सुरक्षा बलों का मुकाबला किया जा सकता है।

-हालांकि एनआईए ने कहा है कि ये आरोपी आईएसआईएस से प्रेरणा लेकर आगे जाना चाहते थे, लेकिन अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे ये सीधे एवं सक्रिय तौर पर आईएसआईएस के साथ जुड़ते दिख रहे हों।

-आईएसआईएस का केवल एक पन्ना मिलना, क्या वह आईएसआईएस के प्रति इनका प्रेम या प्रेरणा को गहरा बनाता है।

-इनके पास जो बम और देशी पिस्तौल मिली हैं, उनसे आरएसएस मुख्यालय या भाजपा के किसी बड़े नेता पर हमले की बात हो रही है, इन्हीं के बल पर 26 जनवरी की परेड पर भी हमला किया जा सकता था, इनके मौजूदा नेटवर्क में क्या ये सब इतना आसान है।

-एनआईए के आईजी कह रहे हैं कि ये एडवांस स्टेज में थे और बड़े पैमाने पर बम बना रहे थे… यह बात पूरी थ्योरी से मेल नहीं खाती है।

-फिदायीन हमले के लिए उच्च मारक क्षमता वाले रॉकेट लॉंचर, मोर्टार, हैंड-ग्रेनेड, एके-47/56 और कारबाइन आदि की जरूरत होती है, क्या ये सब मिल गए हैं।

-फंडिंग का अभी तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह लगे कि इन्हें सब कुछ आईएसआईएस दे रहा है।

जब खतरा था और पता भी था तो सुरक्षा घेरा मजबूत क्यों नहीं हुआ…
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब एनआईए या यूपी एटीएस लंबे समय से इनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा था और उन्हें यह मालूम था कि ये लोग अहम भवनों को अपना निशाना बनाएंगे तो फिर उनकी सुरक्षाा क्यों नहीं बढ़ाई गई। आरएसएस मुख्यालय पर हमला करने की बात कही जा रही है, जबकि वह अभी निर्माणाधीन है। अगर यह सूचना पुख्ता थी तो मुख्यालय की सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई। कई सालों से जो सुरक्षा घेरा चल रहा है, वही आज भी है। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर की सुरक्षा भी पहले जैसी है। इसी तरह नेताओं की सुरक्षा को लेकर अगर ऐसा अलर्ट था तो सुरक्षा श्रेणी में कोई बदलाव क्यों नहीं किया गया। एनआईए का कहना है कि जिन जगहों से इन लोगों को पकड़ा गया है वह आतंकी संगठन आईएसआईएस के नए मॉडयूल ‘हरकत उल हर्ब ए इस्लाम’ से जुड़ी थीं।

आइजी आलोक मित्तल का कहना है कि ये लोग राष्ट्रीय राजधानी में बम धमाकों को अंजाम देने की कथित योजना बना रहे थे। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि ये लोग आईएसआईएस के एक नए मॉड्यूल को कैसे आगे बढ़ा रहे हैं।

—–