बाबरी मस्जिद मामला : रामायण से बाबरनामा तक 15 सीलबंद संदूकों में आये दस्तावेज़

बाबरी मस्जिद मामला : रामायण से बाबरनामा तक 15 सीलबंद संदूकों में आये दस्तावेज़

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Journalist Jafri
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सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद मामले पर गुरुवार को सुनवाई की और मामले की सुनवाई के लिए 29 जनवरी का दिन तय किया. 29 जनवरी को मामले के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच सुनवाई करेगी. इस दौरान बेंच ने कहा कि रामजन्मभूमि मामले से संबंधित सबूत के दस्तावेज 15 सील ट्रंक सुप्रीम कोर्ट में लाए गए हैं. यह दस्तावेज कई भाषाओं में है.

बेंच के मुताबिक 18836 पन्नों के दस्तावेज यहां रखे गए हैं. साथ ही 4304 प्रिंटेड पन्नों का हाईकोर्ट का जेजमेंट भी शामिल किया गया है. बेंच से मिली जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में 15 सीट ट्रंक में मामले से संबंधित दस्तावेज कोर्ट पहुंचाए गए हैं. इन मूल दस्तावेजों को एक कमरे में रखा गया है, जिनमें अरबी, फ़ारसी, संस्कृत, उर्दू और गुरुमुखी में दस्तावेज मौजूद हैं. इसमें बाबर के जमाने से लेकर रामायण के जमाने तक के दस्तावेज इसमें मौजूद हैं.

इसके अलावा 250 दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने सबूत के तौर पर रखे गए हैं. कोर्ट ने कहा है कि सभी मूल दस्तावेजों के अनुवाद की आधिकारिक सत्यता की भी जांच होनी है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने जस्टिस यू यू ललित के बेंच में शामिल होने पर आपत्ति जताई, जिसके बाद ललित ने खुद को बेंच से अलग कर लिया. धवन उल्लेख किया कि न्यायमूर्ति यू यू ललित एक संबंधित मामले में कल्याण सिंह की पैरवी करने के लिए अदालत में उपस्थित हुए थे, जिसके बाद न्यायमूर्ति ललित ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया.

यू यू ललित के 5 न्यायाधीशों की संविधान पीठ से अलग होने से पहले प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस 5 सदस्यीय संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ शामिल थे.

शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने गत वर्ष 27 सितंबर को 2:1 के बहुमत से मामले को शीर्ष अदालत के 1994 के एक फैसले में की गई उस टिप्पणी को पुनर्विचार के लिये 5 सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने से मना कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है. मामला अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुनवाई के दौरान उठा था.

जब मामला चार जनवरी को सुनवाई के लिये आया था तो इस बात का कोई संकेत नहीं था कि भूमि विवाद मामले को संविधान पीठ को भेजा जाएगा क्योंकि शीर्ष अदालत ने बस इतना कहा था कि इस मामले में गठित होने वाली उचित पीठ 10 जनवरी को अगला आदेश देगी.

अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 30 सितंबर, 2010 के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें दायर की गई हैं. उच्च न्यायालय ने इस फैसले में विवादित भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था.

इस फैसले के खिलाफ अपील दायर होने पर सुप्रीम कोर्ट ने मई 2011 में उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने के साथ ही विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया था.