100 रैलियां, हर रैली 100 करोड़, कितना हुआ रे भाई : मेरी मेहंदी चुराने वालों को मैं छोडूंगी😥😥😥😥😥

100 रैलियां, हर रैली 100 करोड़, कितना हुआ रे भाई : मेरी मेहंदी चुराने वालों को मैं छोडूंगी😥😥😥😥😥

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Mamta Joshi
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यहां तक कि मेरे घर से काला धन निकल आया मगर पूज्य पवित्र अम्बानी के घर से धेला काला नहीं निकला ।
12 हज़ार निकले मेरे घर से । ओ माई गॉड !!! कहीं छापा न पड़ जाये ।

100 रैलियां । हर रैली 100 करोड़ । कितना हुआ रे भाई ? मुझे तो इतनी गिनती भी नहीं आती । तो इन रैलियों में क्या अब्बा का पैसा लगेगा ? खून पसीने की कमाई वाला ? मैंने माना कि इस देश को लूटना बनता है । जिसका लोकतंत्र भक्ति पर आधारित हो उसका लुटना पूरी तरह जायज़ है । फिर भी यार कुछ तो शर्म करो आदमी योनि में जन्म लिया है । कपड़े पहनते हो ।

ये पोस्ट राजनीतिक कतई नहीं पूरी तरह सामाजिक है । मेरी मेहंदी चुराने वालों को मैं छोडूंगी नहीं 😥😥😥😥😥

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Omprakash Chouksey

मध्यप्रदेश की गई भाजपाई सरकार ने भोपाल सेन्ट्रल जेल के कैदियों के एनकाउंटर मामले का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त हो जाने के बाद भी विधानसभा पटल पर आज तक नहीं रखा है।

अब काँग्रेसियों की सरकार प्रदेश में सत्तारुढ़ है, तो क्या उम्मीद रखू कि माननीय मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी इस मामले की फिर से CBI जाँच करायेगे।

वो क्या है कि मैं चाहता हूँ कि पुनः जाँच पड़ताल में मेरी भी एक माँग ओर जोड़ लीजिए कि एनकाउंटर मे शामिल सभी लोगों की “मोबाइल काँल डिटेल्स” की भी जाँच कराई जानी उचित होगा।

मेरा आरोप है कि सिमी आरोपियों का एनकाउंटर खुद सरकार के जिम्मेदारो की जानकारी ओर साजिश कर अंजाम दिया गया सर जी।

यहाँ मे स्पष्ट कर दू कि मैं किसी सिमी कार्यकर्ता या देशद्रोहियों की पैरवी नहीं कर रहा हूँ।

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संजीत कुमार

बकलोली कुछ इस तरह से है। कि सभी शासकीय संस्थानों की निजीकरण करना ही इनकी लक्ष्य पहले से तय है।
ताकि सामाजिक न्याय की अवधारणा को चौपट कर आरएसएस के कथित समरसता के नाम पर जाति भेदभाव जारी रख सकें।
आर्थिक आधार पर दामाद स्वीकार नहीं है। लेकिन आरक्षण स्वीकार है।
इतना दोगलेपन कैसे मंचों से साझा भी कर लेते हैं।

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جنيد الله خان

राम मंदिर के अलावा बी जे पी के लिए करने वाले काम , जो भक्तों में नई जान फूंक सकते हैं
1- धारा 370 को निरस्त कर दें
2- मांस व्यापार पूर्णतः बंद कर दें
3- कामन सिविल कोड लागू कर दें
4- काला धन वापस ले आयें
5- उनके द्वारा लिए घोषित करप्ट गांधी परिवार को जेल भेज दें
6- गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दें
7- पाकिस्तान पर खुला हमला कर दें

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Mamta Joshi

जिस दुकान से मैं पेन खरीद रही थी उसकी विक्रेता स्त्री थी । मैं उसकी दूकान के सारे पेन खोल खोल टेस्ट कर रही थी और जो अच्छा लिख रहा था उन्हें एक तरफ रखती जा रही थी । महिला को गुस्सा आ रहा था कि मैं इतने सारे पेन टेस्ट क्यों कर रही हूं ? जब मैंने ग्लिटर पेन के बारे में पूछा तो उसने साफ कह दिया कि उसके पास नहीं है । मैंने अच्छा लिखने वाले जितने पेन एक तरफ किये थे उन सबको उठा लिया और दाम पूछे । उसने मुँह बना कर कहा “10 का है ।” मैंने सारे पेन उसके आगे रखकर कहा , टोटल बताओ । वह अचानक ही बहुत नर्म और बनावटी आवाज़ में बोली , ‘ मैम सब लोगे ? ‘ हां सब लुंगी ‘ मैंने कहा । उसे लग रहा था खाली चेक कर रही हूं । बहुत खुश होकर बोली ग्लिटर पेन दिखाऊँ क्या ? मैंने अब तक मन बदल लिया था , मना कर दिया । जब मैं पेन बैग में रख रही थी झुकने से मेरी जैकेट उलट गई और उसमें से बहुत सारी टॉफियां ज़मीन में बिखर गयीं । दुकान दारिन ने हंस कर कहा , आप बच्चों के जैसे टॉफी खाते हो ? वैसे ये चॉकलेट वाली टॉफी मुझे भी बहुत पसंद है । मैंने सोचा यह उसे दे दूं , मगर फिर उसका व्यवहार याद आ गया और उसकी लालची आंखों के सामने से मैलोडी इतनी चॉकलेटी उठा ली 😛 । सामने दो बच्चे कंचे का कोई खेल खेल रहे थे । बरसों बाद कंचे देखे थे । वे बिखरी टॉफियां देखने लगे । उन्हें बुलाया । उनसे कंचे लिये और थोड़ा सा खेला । एक भी निशाना नहीं लगा । एक वक्त था उल्टे हाथ से मार दूँ तो तीन के बीच वाले को सटका देती थी । खैर टॉफियां अभी भी ज़मीन पर थीं । बच्चों से उठवायीं । आधी उन्हें दीं आधी जेब के हवाले कीं ।
टॉफियां जेबों में भर के चलती हूँ । मांगते बच्चों को देती हूं । मेट्रो से बाहर निकली तो एक औरत ने भीख का कटोरा आगे किया । जेब में बस एक टॉफी बची थी जो उस दुकान वाली को देने से रह गई थी । वही कटोरे में डाल दी ।

(डायरी का ताज़ा पन्ना)