किसान परेशान, नौजवान परेशान, कारोबारी परेशान : भगवा मीडिया लोगों को मंदिर मंदिर कर के सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ भड़का रहा है : वीडियो

किसान परेशान, नौजवान परेशान, कारोबारी परेशान : भगवा मीडिया लोगों को मंदिर मंदिर कर के सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ भड़का रहा है : वीडियो

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दस जनवरी को बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई, सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अपनी जो भी बात थी अदालत के सामने रखी जिसे अदालत ने मानते हुए कुछ अहम् आदेश दिए हैं, मामला बहुत अहम् है, इस मामले में हज़ारों पन्नों के दस्तावेज़ हैं, इन दस्तावेज़ों का कई भाषाओँ में अनुवाद मामले के लिए ज़रूरी है इसलिए अदालत ने उनका अनुवाद हिंदी/उर्दू/फ़ारसी आदि में करवाने का आदेश दिया है

एक बात और मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से अदालत की जानकारी में लायी गयी वह जस्टिस ललित को लेकर थी, यह आपत्ति सम्बंधित पक्ष की तरफ से लगभग 18 महिने पहले भी रखी गयी थी, जस्टिस ललित के मामले पर जानकारी अदालत के संज्ञान में आने के बाद खुद जुटिस ललित ने अपना नाम सम्बंधित मामले से वापस कर लिया

जैसे ही यह समाचार बहार आता है, संघी मीडिया मैदान में उतर आता है, यह मीडिया मुस्तकिल समाज को बाँटने/नफरत फैलाने/ज़हर घोलने के काम में लगा रहता है, भारत का हिंदी मीडिया जो राजधानी दिल्ली से काम करता है वह ‘भगवा’ एजेंडे के मुताबिक काम कर रहा है,  भगवा मीडिया एक समाज के लोगों अदालत के भी खिलाफ खड़ा करने में लगा हुआ है, दस जनवरी 2019 के दिन दोपहर के बाद से लगभग हर हिंदी समाचार चैनल अपने अपने न्यूज़ रूम से ‘वॉर’ लेवल पर ‘भगवा’ का झंडा बुलंद करने के लिए मैदान में उतर आता है

दो हाथ – पॉंव के इंसान की शक्ल के प्राणी ने इस दुनियां को नष्ट करने के सारे हथियार, सारा बंदोबस्त खुद किया है, भारत में यह समय भगवा के चरम आतंक का है, इसमें अनेक संगठन/संस्थायें शामिल हैं, अचानक रात के समय ‘भगवान्’ एक मस्जिद के अंदर प्रकट होते हैं, कैसे प्रकट होते हैं आज 130 – 150 करोड़ की भारत की आबादी है, कोई कर के दिखा दे कि ‘भगवान्’ किस तरह से ऐसे प्रकट होते हैं,,,मगर एक ‘अ-सत्य‘ को सत्य साबित करने के लिए मुस्लिम समाज की बलि चढ़ाई जा रही है

झूठ भी ऐसा बोला जाये जो झूठ न लगे मगर, संघ का काम, झूठ और झूठ बोलना है और उसे सही कह कह कर सही साबित करवाना है, अदालत को सबसे पहले तो मस्जिद में जिन लोगों ने ‘मूर्तियां’ रखीं थीं, उस मामले की सुनवाई करना चाहिए थी, अगर यह काम हुआ होता तो आज यह ‘मामला’ ही न होता

अब जबकि बाबरी मस्जिद को गिराया जा चुका है और मस्जिद को गिराने वाले आरोपियों में से किसी को भी सज़ा नहीं मिली है का मामला सुप्रीम कोर्ट में है पर हर तारीख पर भगवा समर्थक मीडिया मंदिर के निर्माण को लेकर इस तरह से सक्रियता दिखाता है जैसे कि मामला अदालत में हल न होकर ‘भगवा समाचार चैनलों’ के स्टूडियो में तै होगा और संघी चैनल जैसे रात को ही मंदिर बनवा कर सुबह से ही पूजा शुरू करवा देंगे

अति हर चीज़ की बुरी होती है, भगवा संगठन और उसके समर्थकों की अति घातक होती जा रही है, देश के हिंदी भाषी राज्यों में राजनैतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ज़हर फहलाने का काम अपने चरम पर किया रहा है, आज जबकि लोगों के पास न रोज़गार है, न कारोबार, न खेती, किसान परेशान, नौजवान परेशान, कारोबारी परेशान ऐसे में भगवाधारी लोगों को मंदिर मंदिर कर के भटकाने का काम कर रहा है, उन्हें मंदिर के नाम पर ग़लत रास्ते पर ले जाना चाटता है