#हज़रत_शाह रुक्न आलम_का_हुस्नो_जमाल

#हज़रत_शाह रुक्न आलम_का_हुस्नो_जमाल

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Shamsher Ali Khan
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हज़रत मखदूम जहांनियां जहां गश्त फरमाते हैं कि एक दुर्वेश क़ुतबुल अक़्ताब हज़रत शैख़ रुकनुद्दीन आलम की ज़ियारत के लिए आया- जब उसकी निगाह हुज़ूर के चेहरा ए अनवर पर पड़ी तो जमाले ज़ाहिरी और कमाले बातिनी को देख कर वो दंग रह गया और उसने अंदाज़ा लगाया कि हज़रत शैख़ रुकनुद्दीन आलम के चेहरे की रानाई उनकी उस ग़िज़ा की बदौलत है जो वो तनावुल फरमाते हैं-

चुनांचा उस दुर्वेश ने दिल में ये अहद कर लिया कि मैं लोगों की दी हुई ग़िज़ा ना लूंगा बल्कि वो ग़िज़ा इस्तेमाल करूंगा जो कि क़ुतबुल अक़्ताब इस्तेमाल करते हैं- अलगरज़ शाम को जब मेहमानों के लिए खाना पेश किया गया तो उस दुर्वेश ने खाना खाने से इनकार कर दिया और कहा: मैं तो वही खाना खाऊंगा जो क़ुतबुल अक़्ताब के लिए खास तौर पर तैयार होता है- खुद्दाम ने उसे समझाया लेकिन वो ना माना- खुद्दाम ने कहा भी कि उनके खाने में कुछ तकल्लुफ नहीं होता मगर वो राज़ी ना होता था-

चुनांचा क़ुतबुल अक़्ताब को इत्तिला दी गई- क़ुतबुल अक़्ताब ने अपने दस्तरख्वान से उसके लिए खाना भेज दिया- उस दुर्वेश ने जब क़ुतबुल अक़्ताब का खाना देखा तो वो एक नान था जो नमक के बगैर था और तल्ख़ सब्ज़ी थी- वो दुर्वेश देखकर शर्मिंदा हो गया और उसने अपना सर झुका लिया- जब सब लोग खाने से फारिग होकर अपनी अपनी ख्वाबगाहों की तरफ चले गए तो क़ुतबुल अक़्ताब ने उस दुर्वेश को बुलाया और फरमाया:
“ऐ दुर्वेश ! ग़ौर से सुनो, हमारी शक्लो शबाहत लतीफ और मज़ेदार खुराक़ की मरहूने मिन्नत (मुहताज) नहीं बल्कि ये उस रूहानी गिज़ा के सबब है जो अल्लाह तबारक व तआला ने अपने फज़्लो करम से अता फरमाई है-” उसके बाद क़ुतबुल अक़्ताब ने उस दुर्वेश को हाथ से पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया- आपके सीने से मस होते ही उस दुर्वेश का सीना रौशन हो गया और वो बेइख्तियार आपके क़दमों में गिर पड़ा और अपनी जसारत की मुआफी मांगी- क़ुतबुल अक़्ताब ने उसे क़ल्ब की सफाई और रियाज़त की तालीम दी और वो दुर्वेश कुछ अरसे ही में वासिलाने हक़ के मर्तबे पर फाइज़ हुआ..!!