#स्वस्थ_इंडिया! झूठी सरकार….जनऔषधि केंद्र बीमार, महंगी दवा ख़रीद रहे मरीज़

#स्वस्थ_इंडिया! झूठी सरकार….जनऔषधि केंद्र बीमार, महंगी दवा ख़रीद रहे मरीज़

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Sagar_parvez
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आम आदमी को सस्ती दवा मुहैया कराने के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र एक-एक कर बंद हो रहे हैं। साल 2015 में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत देश में ब्रांडेड दवा के मुकाबले कम दाम पर दवा उपलब्ध कराने को जेनरिक दवा केंद्र खोलने की शुरुआत की गई। इस समय देश में कुल 4844 जन औषधि केंद्र हैं।

यूपी, बिहार, उत्तराखंड और झारखंड के कुछ शहरों में पड़ताल की तो पता चला कि ज्यादातर जगहों पर डॉक्टर अपने पर्चे में जेनरिक दवाएं लिखते ही नहीं हैं। ऐसे में मरीज बाजार से महंगी दवा लेने को मजबूर हैं।.

जंगलराज उत्तर प्रदेश

लखनऊ : 24 में से 7 बीमार
लखनऊ में सात जनऔषधि केंद्र बंदी के कगार पर हैं। बाकी 17 केंद्र सरकारी अस्पतालों में हैं। यहां आने वाले मरीजों की शिकायत है कि डॉक्टर जेनरिक दवा नहीं लिखते। पहली बार बाहर मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ती है। बाद में सॉल्ट नाम दिखा जेनरिक दवा मिलती है।.

मेरठ : दवाओं का टोटा
जनपद में मेडिकल, जिला अस्पताल को छोड़ बाकी केंद्रों पर दवाओं का टोटा है। दो केंद्र बंद हो गए। डीआई पवन शाक्य कहते हैं कि सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केंद्र ठीक तरह से चल रहे हैं। निजी केंद्रो पर पर्याप्त दवाएं नहीं हैं।

वाराणसी : पर्चे पर ब्रांडेड दवा
चार सरकारी अस्पतालों समेत सभी जनऔषधि केंद्रों की हालत खराब है। कहीं दवा नहीं तो कहीं मरीज नहीं आते। डॉक्टर जेनरिक दवा नहीं लिखते। .

गोरखपुर : जनरल स्टोर खुले
जिले के 22 जनऔषधि केंद्र बंद होने की कगार पर हैं। अधिकांश संचालकों ने दुकानों से दवा हटा ली हैं और जनरल स्टोर शुरू कर दिए हैं। उन्होंने अब तक दवा लाइसेंस सरेंडर नहीं किए हैं। .

मुरादाबाद : खरीदार ही नहीं
मंडल में जनऔषधि केंद्रों की हालत खस्ता है। जिला अस्पताल के केंद्र में ही 40% से ज्यादा जेनरिक दवा नहीं मिलतीं। रामपुर जिले में 12 दुकानें हैं इनकी स्थिति बेहद खराब है। रामपुर में जिला अस्पताल में भी जनऔषधि केंद्र शुरू किया गया है लेकिन डॉक्टर ब्रांडेड दवा ही लिख रहे हैं। अमरोहा जिले में 22 केंद्रों में से दो बंद हो *चुके हैं। शेष पर भी मुश्किल से बिक्री हो पाती है। .

कानपुर : स्टॉक नहीं बिका
शहर के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों हैलट, उर्सला और डफरिन में जनऔषधि केंद्र बंदी के कगार पर हैं। तीन बंद हो चुके हैं। हैलट में 200 से अधिक दवाएं मंगाई गईं, लेकिन 30 फीसदी स्टॉक की बिक्री भी नहीं हुई। डॉक्टर वे दवाएं नहीं लिखते जिनकी उन्हें सूची दी जाती है। .

आगरा : दिनभर में 10 पर्चे
जनपद में आठ केंद्र खोले गए थे, इनमें से छह माह बाद ही दो केंद्र बंद हो गए। शेष छह खस्ताहाल हैं। दवाओं की आपूर्ति नहीं है।चार सरकारी अस्पतालों में खुले केंद्र भी दवाओं को तरस रहे हैं। डॉक्टर जेनरिक दवाओं की जगह मल्टी सॉल्ट लिखते हैं जो केंद्रों पर उपलब्ध नहीं होते। शहर के लोहा मंडी में एक केंद्र को छोड़कर बाकी केंद्रों पर 150 से 200 तरह की दवाएं मिल रही हैं। जिला महिला अस्पताल केंद्र पर भी पर्याप्त दवाएं नहीं हैं। दिनभर में 10 से 15 पर्चे ही आते हैं।.

गोविंद माथुर, मानस नगर, आगरा ने कहा- जयपुर हाउस में फिजिशियन को दिखाया। उन्होंने एक भी जेनरिक दवा नहीं लिखी। सब महंगी ब्रांडेड दवा हैं। पांच दिन की दवा 450 रुपये की खरीदनी पड़ी।

जंगलराज बिहार

ब्रांडेड दवाओं की बिक्री जारी
बिहार में अधिकांश जनऔषधि केंद्रों की हातल खराब है। जेनरिक दवा की दुकानों में हाल ही में हुई छापेमारी के दौरान ब्रांडेड दवा की बिक्री पाई गई थी। बिहार ड्रग और केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके सिंह के अनुसार चिकित्सा महाविद्यालयों में मौजूद दुकानों में जेनरिक दवाएं मिल रही हैं। वहां चिकित्सक जेनरिक दवाएं लिखते हैं। अन्य स्थानों पर जेनरिक दवा नहीं मिल रही हैं क्योंकि चिकित्सक जेनरिक दवाइयां नही लिखते हैं। ऐसे में कई जेनरिक दवा दुकानें बंदी के कगार पर हैं। ऐसी दवा दुकानों की संख्या 100 से अधिक है।

जंगलराज उत्तराखंड

नोटिस पर भी नहीं सुधरे
राज्य में कुछ डॉक्टर और अस्पतालों को *बार-बार नोटिस के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। एनएचएम प्रबंध निदेशक युगल *किशोर पंत के अनुसार, इस साल 300 नए जनऔषधि केंद्र खोले जाने हैं। केंद्र सरकार ने बजट मंजूर कर दिया है। .

जंगलराज झारखंड

रिम्स के जन औषधि केंद्र में 255 दवाएं उपलब्ध
सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में जन औषधि केंद्र का समुचित लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को यहां 255 दवाएं उपलब्ध थीं लेकिन 200 दवाएं पिछले 3 दिनों से स्टोर के कार्टून में ही बंद हैं। फार्मासिस्ट समेत केवल दो ही कर्मचारी होने के कारण हालत बदतर हैं। .

– सदर अस्पताल के जन औषधि केंद्र में केवल 12 दवा उपलब्ध हैं। मुश्किल से दो-चार मरीज आते भी हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।.

– सरकारी जन औषधि केंद्रों में साहिबगंज, चतरा और जामताड़ा की स्थिति अच्छी है। कारण यह है कि साहिबगंज जामताड़ा एवं चतरा में हर माह दवा की खरीदारी होती है और एजेंसी को उसका भुगतान भी किया जाता है।.

जेनरिक दवा से मरीजों को लूट रहे दुकानदार

रिम्स के बाहर कई दुकानदार जेनरिक दवा पूरे मूल्य पर बेचते हैं। यही नहीं, कई बार तो डॉक्टरों के कहने के बाद भी दुकानदार राशि नहीं लौटाते हैं। कारण यह है कि जन औषधि केंद्र में बिकने वाली दवाओं पर जहां कम कीमत अंकित होता है। दुकानों में बिकने वाली जेनेरिक दवाओं पर कई गुना अधिक मूल्य अंकित होते हैं। कुछ दुकानदार 10 परसेंट से 50 फीसदी कीमतों में कमी का प्रलोभन देकर खरीद मूल्य से कई गुना अधिक कीमत वसूल लेते हैं।