#एक_अक्लमंद_बादशाह : साहेब ‘तड़ीपार’ के पेट में बिल्ली है…भव्य, दिव्य, विशाल मंदिर धोखा है

#एक_अक्लमंद_बादशाह : साहेब ‘तड़ीपार’ के पेट में बिल्ली है…भव्य, दिव्य, विशाल मंदिर धोखा है

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जब भी गुस्सा आये तो खुद पे काबू रखना चाहिए, इंसान की जिंदिगी में बहुत उतार चढाव आते हैं, पूरी लाइफ में कम वक़्त खुशियों का होता है बाकी का जीव और अनुसाशन नहीं होता है तो पूरा समाज मुसीबतों में घिर जाता है,,,
न कोशिश, मेहनत, बीमारियां, शादियां, वगैरह में गुज़र जाता है, इंसान को हर हाल में ‘खुहाइशों’ पर लगाम लगा कर रखना चाहिए, जब जिंदिगी में एकता

एक फिल्म है ‘ख़ामोशी’ हेमंत कुमार की फिल्म है, इसमें धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, वहीदा रहमान, देवन वर्मा ने अदाकारी की है, संगीत खुद हेमंत कुमार साहब का है, उन्होंने इस फिल्म में ‘तुम पुकार लो तुम्हारा इन्तिज़ार है’,,,गीत गया है,,,जब भी आपको वक़्त मिले तो देखें….

जब कानून का राज नहीं रहता है तब हिंसक लोग सत्ता तक आसानी से पहुँच जाते हैं/अपनी पहुँच बना लेते हैं
मिसाल के तौर पर :– देश में बाबरी मस्जिद को लेकर अदालत में विवाद चल रहा है, अगर देश के कानून ने अपना काम किया होता तो यह मुद्दा नाम को भी न होता और न उनका आता पता होता जो रात दिन सोते जागते ‘मंदिर -मंदिर’ चिल्लाते हैं, जिस वक़्त मस्जिद में रात के वक़्त मूर्तियां रखी गयीं थीं, उसका मामला अदालत में पहुंचा था, जिसका फैसला ”आज तक” नहीं सुनाया गया है

अगर कसूरवारों को जिन्होंने षड्यंता कर मस्जिद में मूर्तियां राखी थीं सज़ा मिल गयी होती तो मामला तभी ख़तम हो जाता
फिर उसके बाद 06 दिसंबर 1992 को मस्जिद को धराशायी कर दिया जाता है, उसका मामला भी अदालत में चल रहा है मगर आज तक उसमे 28 साल बाद भी गवाहों की गवाहियां नहीं हुई हैं, अदालतें जब खुद अपराधी के साथ खड़ी हो कर उनका पक्ष लगें तो फिर ‘नाथूराम गोडसे’ तो पैदा होंगे ही और वह हर समय गाँधी की हत्या करेंगे, मस्जिद गिराने वाले संवैधानिक पदों पर आसीन रह चुके हैं और हैं, अगर यह लोग जेलों में सज़ा काट रहे होते तो अराजक तत्वों की हिम्मतें न बढ़ती

अब बाबरी मस्जिद का मामला सुप्रीम कोर्ट में हैं, सरकारों में बैठे नेता, मंत्री, प्रधानमंत्री, उनके चमचे हर रोज़ अदालत की तौहीन करते हैं मगर किसी की मजाल नहीं जो इनको हिदायत कर बोल दे कि ‘तुम लोग क्या औल फ़ौल’ बकते हो

बटवारे के बाद से लाखों दंगे हो चुके हैं मगर उनमे दंगाइयों को कोई सज़ा नहीं मिली, कोई एक्का दुक्का मामले में दो चार भले ही टंग गए हों, तो यूँ खली जगह भरने से क्या होता है, जितने भी दंगे हुए हैं उनमे पुलिस, अर्धसैनिक बल दंगाइयों के साथ शामिल रहे, इसलिए कि इनको मालूम रहता है कि किसी का कुछ नहीं बिगड़ेगा

एक पार्टी का ध्यक्ष बोलता है हिन्दू, सिख, जैन, पारसी को किसी से डरने की ज़रूरत नहीं है, मतलब कि ‘मुसलमानों’ को डर के रहना पड़ेगा, यह कौन है जो अनेक हत्यायों, आतंकवादी हमलों, फ़र्ज़ी मुढ़भेड़ों का भागीदार है, ऐसा क्यों क्यों बोलता है, क्यूंकि गवाह, सबूत सब नस्ट कर इसको अदालत की मेहरबानी से बचाया जाता है

सूत्रों के मुताबिक अलीगढ में तत्कालीन एसएसपी अजय साहनी ने नौशाद और मुस्तकीम नाम के दो लोगों के एनकाउंटर के बाद, जब उस पर सवाल उठे तो खुद हिन्दू महा सभा, विहिप व अन्य संगठनों के लोगों से बुला बुला कर अपना सम्मान/स्वागत करवाया था, और जो भी कोई वारदात की जगह या पीड़ित के घरे जाने को होता था तो खुद सुचना दे कर इन संगठन के लोगों को वहां हंगामा करने के लिए भिजवाते थे, जब अपराधियों के साथ अपराधों को रोकने वालों का गठबंधन होगा तो,,,,गाँधी की रोज़ हत्या होगी,,,नौशाद और मुस्तकीम के फ़र्ज़ी एनकाउंटर की तरह,,,परवेज़ खान

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एक वक़्त था जब भारत ग़रीब देश था, बहुत ज़यादा ग़रीब था, कोई कोई ही ऐसा होता था जो खाता पीता होता था, 80 के दशक तक अगर किसी की शादी में घडी/साइकिल/रेडियो में से कुछ भी मिल जाता था तो वो बड़ी शादी मानी जाती थी, लोग उसकी चर्चा करते थे, गेहूं की रोटियां सिर्फ मेहमान के आने पर बनती थीं, एक बार जो कपडे किसी मौके/त्यौहार पर बन गए वो कई साल चलते थे, बाप का पजामा, बड़ा बेटा पहनता था, बड़े भाई की कमीज़ छोटी होने पर छोटा भाई पहना करता था, पूरी सर्दियाँ आलू की भरी हुई बाजरे की रोटियां, आलू का भरता, आलू के वर्क के साथ गुज़रता था, जर्सी/स्वटर/जैकेट/कोट फिल्मों में देख सकते थे,,,मोटर साइकिल/बाईक भूल चूक से किसी किसी के पास होती थी, तब जावा/यज़दी/राजदूत/बुलट हुआ करती थीं,

तरक्की की रफ़्तार एक साथ 1990 के बाद शुरू हुई, लिब्ब्रालाज़ेशन/ग्लोबलाज़ेशन/इंटरनेट/मोबाइल ने दुनियां को छोटा कर दिया, अब क्रांति का समय था, मगर वो जिस लेवल की होना चाहिए थी नहीं हुई, दंगों, झगड़ों, साम्प्रदायिकता ने रूकावट का काम किया, साम्प्रदायिकता वो लोग/संगठन फैला रहे थे जो ‘भीड़’ के साथ सरकारी तंत्र में बैठे लूटमार कर राजनैतिक/सामाजिक रूप से तरक्की कर चुके थे, उनकी नज़र सब कुछ खुद ‘हड़प’ कर जाने पर लगी थी,,,

भारत बाहर से आने वाले लोगों/समूहों/नस्लों के लोगों का देश है, जिस तरह अंग्रेजी साशन में उनकी ग़ुलामी/मुखबिरी करने वाले आज खुद को सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ साबित करते हैं, यही मामला बहार से आने वाले लोगों के सम्बन्ध में भी है, मतलब कि ‘विदेशी’ जो यहाँ आकर बसे थे वो अन्य को ‘बाहरी’ ‘आक्रमणकारी/लुटेरा आदि की संज्ञा देते हैं, भारत की 90 फीसद से ज़यादा आबादी विदेशी मूल की है, इनके पुखे कभी यहाँ आये और इधर बस गए,,,,यह इलाका सुरक्षित, सुविधाजनक था, यहाँ समतल ज़मीन थी, दरिया, नदियां, जंगल, पहाड़, सर्दी, गर्मी, बरसात के मौसम थे, लोग यहाँ ज़रखेज़ खेती की ज़मीन की वजह से ज़यादा आते थे

दुनियां इसी तरह से बढ़ी और फैली है, भारत में रंग/रूप/ज़ात/वर्ग/धर्म/भाषायें अनेक हैं वजह जो बहार से आता था वो अपनी विरासत साथ लाता था और इस तरह से यहाँ भिन्न भिन्न चीज़ें मिलती हैं जो देश की खूबसूरती दिखाती हैं

बटवारे के बाद एक विचार यहाँ जो पहले से पनप रहा था लगातार सक्रिय रहा और ताक़तवर होता चला गया, किसी भी देश/समाज का विकास वहां की सरकारों की पॉलिसी पर निर्भर करता है, भारत में हर सरकार में वो ‘सपोले’ पालते गए, उनका ज़हर समाज में फैलता रहा, इनकी नफरत की आंधी में कभी कभी लगता कि जैसे यहाँ कुछ नहीं बचेगा, फिर भी कुछ लोग अपना सीना ताने इनके सामने खड़े होते रहे और ये अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सके हैं,

70 वर्षों में कुछ नहीं हुआ वो लोग कहते हैं जिन्होंने यहाँ अशांति, दंगे, नरशंहार किये हैं, देश की सम्पतियों को दोनों हाथों से लुटा है, ये देश कैसे कैसे आगे बढ़ा है का अंदाजा इस से लगा सकते हैं कि ‘यहाँ के लोग’ जानवरों के गोबर को पानी में धो कर उसमे से अनाज के दाने निकालते थे और उस को ‘चक्की’ में पीस कर खाते थे, जो मवेशी मर जाते उनका ‘मॉस’ निकाल कर लाते थे और खाते थे,,,गॉंव में धोबी/नाई/भंगी/भिस्ती सिर्फ ‘रोटी’ अनाज के बदले मजदूरी/चाकरी करते थे,,,बस्तियों में ‘मल’ उठाने आने वाली ‘हरिजन’ महिलएं काम निपटाने के बाद हर घर जा कर रोटी मांग कर लाती थीं, नाई आ कर किसी कुआं की सफील पर अपना उस्तरा लेकर बैठ जाता था, जिस किसी को हजामत बनवानी होती वह यहाँ आ कर बनवा लेता था, बदले में नाई को फसल पर अनाज मिलता था,,,,ये समाज था तब, आज ऐसा नहीं है, अब भी मगर बहुत सारा काम है जो होना चाहिए/करना ही होगा, मगर अंग्रेज़ों के वफादार/मुखबिर रहे लोग देश को अंग्रेज़ों की तरह चलना चाहते हैं जहाँ उनका अपना कानून चले, उनको माई बाप समझा जाये, उनके गुणगान हों और उनके पूवजों की बहादुरी/शौर्य के फ़र्ज़ी किस्सों को सत्यापित कर उनका पाठ हुआ करे, भव्य/दिव्य/विशाल मंदिर का सपना दिखा कर ये देश को धोखा देते रहे हैं,,,भगवान् उनके न दिलों में है इन इनके शिवालयों में, वह ग़रीब की ‘भूख’ रोटी में है,,,वो गंदगी साफ़ करने वाले, मैला ढोने वाले, मरे जानवरों को खाने के लिए मजबूर किसे गए लोगों के ‘ख्यालों’ में है,,,परवेज़ ख़ान

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अक्सर नेताओं को बड़े जोश के साथ कहते हुए सूना जाता है ‘कश्मीर भारत का अभिन्न” अंग है,,,2014 में केंद्रीय मंत्री जीतेन्द्र सिंह ने दावा किया था कि अगले साल यानि 2015 के 15 अगस्त का झंडा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की राजधानी में फहरायेंगे, कश्मीर, राम मंदिर, भावना, आस्था, भव्य, दिव्य,,,चुनावी जुमले/शब्द हैं जिनको लोगों को भावनात्मक रूप से भड़काने के लिए किया जाता है

कश्मीर को दिल्ली का मीडिया भगवा एजेंडे के तहत भुनाता है, वहां की सही खबरें, जानकारी इधर का हिंदी मीडिया दिखाने से बचता है, और इसकी वजह से कश्मीर के मामले में हिंदी भाषी इलाकों में नफरत मिलती है, उनको पाकिस्तान का समर्थक और देश द्रोही/आतंकवादी समझा जाता है,,,कश्मीर में क्या हो रहा है ये लिखने वाले को ‘देश द्रोही’ साबित कर दिया जायेगा, वहां जो होता है उसको इधर बैठ कर नहीं समझा जा सकता है, वहां के असल हालात टीवी पर जो दिखाए जाते हैं वैसे नहीं उससे बहुत भिन्न हैं, वहां ‘बन्दूकों’ का राज है, बन्दुक की गोली,,,,बच्चा/बड़ा/नौजवान/जवान/महिला किसी के साथ भेदभाव नहीं करती हैं,,,बड़ी संख्या में आम लोगों को मुखबिर बना कर हथियार दे दिए गए हैं,,,सूत्रों के मुताबिक ये मुखबिर बहुत काम आते हैं, इन से आतंकवादियों की जानकारी मिलती हैं, इनको एनकाउंटर के समय इस्तेमाल किया जाता है, इनको ‘खुद’ मार कर माहौल भी बनाया जाता है,,,जानकार सूत्रों के मुताबिक पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या का मामला हो या अन्य कई और ‘मुखबिरों’ के हाथों अंजाम दिलवाये गए थे ताकि दूसरे ‘बन्दुक’ वालों पर आरोप लगा कर ‘और’ रास्ते खोले जाएँ,,,,,,,,,परवेज़ खान

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Babar Khan

1920 में कश्मीर के जेल में 117 कैदी थे जिसमें 97 मुसलमान, वो भी सब के सब गोहत्या के इल्जाम में । उस वक़्त कोई मुसलमान का कत्ल करदे तो उसे 16 से 20 रूपये सजा के तौर पर हुकूमत को जुरमाना देने होते थे जिसमें हुकूमत मकतूल के घर वालो को 4-5 रूपये देकर बाकि पैसा अपने पास रख लेती थी।

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Arshad Raza

*#आठ रूहानी बातों का मुशाहदत#*

*एक*:
वह घर जिस के सहन से दरख़्त काट दिया जाए ,वो घर कभी आबाद नही रहता – आप जब भी किसी घर को उजड़ा देखे,
आप तहक़ीक़ कर के देख लें इस घर की बर्बादी दरख़्त काटने से शुरू हुई होगी चुनाँचे आप के घर मे अगर कोई पुराना दरख़्त है तो आप इसे हरगिज़ न काटे, आप का घर हमेशा आबाद रहेगा।। ये वो हकीकत हैं जिसकी वजह से औलिया इक़राम पूरी जिंदगी दरख़्त लगाते और दरख़्त की हिफाज़त करते रहे।।

*दो*:
जिस घर से परिंदों ,जानवरों औऱ चींटियों को रिज़्क़ मिलता रहे इस घर से कभी रिज़्क़ खत्म नही होता- आप तजुर्बा कर लें, आप परिंदों ,बिल्लियों,कुत्तों और चींटियों को खाना ,दाना और पानी डालना शुरू कर दें आपके घर का किचन बन्द नही होगा,,आप पर रिज़्क़ के दरवाज़े खुले रहेंगे। आपको अम्बिया और औलिया के मज़ारात पर कबूतर ,चिड़िया, मोर,बिल्ली, चींटियां क्यों मिलती हैं? यह दरसल मज़ारात पर लंगर की जमानत होती हैं।।

*तीन*:
अल्लाह तआलाह गरीबों में कपड़े तक़सीम करने वालों को कभी बे इज्ज़त नही होने देता – आप अगर चाहते है आपके के मुखाल्फीन आपको बे इज्जत न कर सकें तो आप ग़रीबो में कपड़े तक़सीम करना शुरू कर दें ,, बिलखुसूस आप ग़रीब बच्चों को लिबास और चादरें ले कर देना शुरू कर दे आप मरने के बाद तक बा इज्ज़त रहेंगे,,आप का बड़े से बड़ा मुख़ालिफ़ भी आपकी बे इज्जती नही कर सकेगा ।।
चुनाँचे आप लोगों की सतर पोशी का बंदोबस्त करें- अल्लाह आपको बे इज्जती से बचा लेगा।

*चार*:
आप अगर अपनी राह से भटकी हुई औलाद को सीधे रास्ते पर लाना चाहते है तो आप ग़रीब बच्चियों की शादी करा दे,, आपकी औलाद नेक हो जायेगी, आप तजुर्बा करके देख लें, आप ग़रीब बच्चों की शादी कराएं आप उन्हें घरों में आबाद कराएं आप अपनी औलाद पर इस के असारात देखेंगे ओर ये आसारात आपको हैरान कर देंगे।।

*पाँच*:
आप अगर अपनी ज़िंदगी मे शुक्र और इत्मिनान लाना चाहते है तो आप लोगों को खाना खिलाना शुरू कर दे- आप का दिल इत्मीनान की नियामत से माला-माल हो जायेगा आपको औलिया- किराम की ज़ात में इत्मीनान नज़र आता हैं, यह इत्मीनान तवाज़आ की दीन हैं,, आप भी मुतवाज़आ हो जाये आपकी ज़िंदगी से लालच कम हो जायेगा, आप मुतमईन हो जायँगे।।

*छ:*:
आप अगर सेहतमंद रहना चाहते हैं तो आप गरीबों का इलाज कराना शुरू कर दे,,आपकी सेहत में इज़ाफ़ा हो जायेगा, आप इसके बाद जो भी दवा खायंगे वो दूसरे मरीज़ों के मुकाबले में आप पर ज़्यादा असर करेंगी, आप जो भी खुराक खायंगे वो अब पहले से ज़्यादा फ़ायदा करेंगी।

*सात*:
आप अगर दुनियावी मुश्किलातों का शिकार हैं तो आप कोई गली,कोई सड़क बनवा दे अल्लाह पाक आपकी हर मुश्किल का रास्ता निकाल देगा आप का हर बन्द दरवाजा खोल दिया जायेगा ये न हो सके तो कम से कम रास्ते मे पड़ी कोई भी तकलीफ देने वाली चीज़ों को रास्ते से हटा दें आपकी रुकावट दूर हो जायेगी।।

*आठ*:
आप अगर डिप्रेशन का शिकार हैं तो दूसरों के लिए ठंडे पानी का बंदोबस्त कर दे, बोरिग वगेरह लगवा दें जिससे लोगों को पानी की सहूलियत हो जायेगी आपके डिप्रेशन की शिकायत दूर हो जायेगी क्यों🤔?क्योंकि डिप्रेशन आग होता हैं और पानी हर आग को बुझा देता हैं।।

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Rajesh Kumar Suri

भगत सिंह के बाद केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंका गया और अंग्रेजों से दमन के डर से उनके परिवार के सदस्यों को शरण देने के लिए कोई आगे नहीं आया । मौलाना हबीब-उर-रहमान ludhianvi ने एक महीने के लिए शहीद भगत सिंह के परिवार के सदस्यों को शरण प्रदान करने के लिए आगे आया ।

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#एक_अक्लमंद_बादशाह

किसी मुल्क में एक कानून था कि वो एक साल बाद अपना बादशाह बदल देते थे, उस दिन शहर में जो भी दाखिल होता उसे बादशाह बना देते थे और पहले वाले बादशाह को एक बहुत ख़तरनाक और मिलो फैले जंगल में छोड़ा आते थे । जंगल में अगर वो बादशाह दरिंदा से अपने आप को बचा लेता तो भूख और प्यास से मर जाता, न जाने कितने बादशाह एक साल की बादशाही के बाद जंगल में जाकर मर गए..!!

एक दफा शहर में दाखिल होने वाला नौजवान किसी दूर दराज इलाका का लग रहा था सब लोगों ने आगे बढ़कर उसे मुबारकबाद दि और बताया की आपको इस मुल्क का बादशाह चुन लिया गया है और उसे महल में ले गये ।

वो हैरान भी हुआ और बहुत खुश भी! तख़्त पर बैठेते ही उसने पूछा कि मुझसे पहले के बादशाह कहां गये ? तो दरबारियों ने उसे मुल्क का कानून बताया की हर बादशाह को साल बाद जंगल में छोड़ दिया जाता है !! और नया बादशाह चुन लिया जाता है, ये सूनते ही वो थोडा परेशान हुआ लेकिन फिर अपनी अक्ल का इस्तेमाल करते हुए कहा!! मुझे उस जगह लेकर जाओ जहां तुम बादशाहों को छोड कर आते हो !! दरबारियों ने सिपाहियों को साथ लिया और बादशाह को वो जंगल दिखाने ले गए, बादशाह ने अच्छी तरह वो जंगल का जायजा लिया और वापस आ गया ।

अगले दिन सब से पहले उसने ये हुक्म दिया की मेरे महल से जंगल तक एक सड़क तामीर की जाए और जंगल के बीचोंबीच एक खूबसूरत महल तामीर किया जाए जहां पर हर किस्म की सहूलियत मौजूद हो और महल के आजु बाजू खूबसूरत बाग लगाए जाए।

बादशाह के हुक्म पर अमल हुआ और तामीर शुरु हुई । कुछ ही अरसा में महल ओर सड़क बनकर तैयार हो गया, एक साल के पूरे होते ही बादशाह ने अपने दरबारियों से कहा अपनी रस्म पूरी करो और मुझे वहां छोड़कर आओ जहां मुझसे पहले बादशाह को छोड़कर आते थे…!!

दरबारियों ने कहां ! बादशाह सलामत आज से ये रस्म ख़त्म हो गई, क्युकी हमें एक अक्लमंद बादशाह मिल गया है । वहां तो हम उन बेवकूफ़ों को छोड़कर आते थे जो एक साल की बादशाही के मजे में बाकी की जिंदगी को भूल जाते और अपने लिये कोई इंतजाम न करते !!

लेकिन आप ने अक्लमंदी का मुजाहिरा किया और आगे का खूब बंदोबस्त फरमा लिया……….¤¤¤¤¤

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सबक :- दोस्तों इस अनोेखे मुल्क का नाम दुनिया है और वो नया बादशाह मैं और आप है और वो जंगल हमारी कब्र है तो आप खुद फैसला कर लीजिए कुछ दिन बाद हमें भी ये दुनिया वाले एक एेसी ही जगह छोड़ आएगे

तो क्या !! हमनें अक्लमंदी का मुजाहिरा करते हुए वहां अपना महल और बाग तैयार कर लिये है..? या बेवकूफ बनकर इसी चंद दिनों की जिंदगी के मजे में लगे है ?

जरा सोचिए..!! आज हमारे पास जिंदगी में करने के लिए बहोत कुछ है लेकिन एक वक्त ऐसा आयेगा की फिर पछताने की मोहलत भी नहीं मिलेगी… !!

अल्लाह तआला हम सब को अपनी आख़िरत की तैयारी खूब सच्ची फिक्र करने की हिम्मत और तौफीक अता फरमाये ।।