अखिलेश यादव को रोके जाने पर साधु-संतों में गहरी नाराज़गी, संतों ने की योगी की तीखी आलोचना

अखिलेश यादव को रोके जाने पर साधु-संतों में गहरी नाराज़गी, संतों ने की योगी की तीखी आलोचना

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अचला सप्तमी पर मंगलवार को पूजन और दोपहर भोज कार्यक्रम में शामिल होने से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को रोके जाने पर साधु-संतों में गहरी नाराजगी है। संतों ने योगी आदित्यनाथ सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने इसे संतों का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी को भी संतों के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने से नहीं रोका जाना चाहिए।

Gaurav singh sengar

@sengarlive
जहरीली शराब कांड पर अखिलेश यादव धरने पर बैठते तो आमजनता का भी समर्थन मिलता,मुख्यमंत्री बैकफुट पर होते लेकिन………….

अपने लिए जिये तो क्या जिये ??

Dr.Alok Yadav

@iamdralok
अखिलेश को रोक कर योगी सरकार ने किया साधु-संतों का अपमान: नरेंद्र गिरि

अचला सप्तमी पर मंगलवार को पूजन और दोपहर भोज कार्यक्रम में शामिल होने से अखिलेश यादव को रोके जाने पर साधु-संतों में गहरी नाराजगी है।संतों ने योगी सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है।


Sunil Singh Yadav

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@sunilyadv_unnao
योगी जी समाजवादी पार्टी का जन्म जे.पी, लोहिया और गांधी के विचारों से हुआ है, गोडसे और अंग्रेजों की दलाली करने वालों की विचारधारा से नहीं! यहाँ का हर युवा क्रांतिकारी है! विचार से भी और व्यवहार से भी! और सक्षम है आप जैसे तानाशाहियों को कुर्सी सहित उखाड़ फेंकने में! @yadavakhilesh

सपा अध्यक्ष को दोपहर एक बजे बाघंबरी गद्दी मठ में पूजन और संतों के साथ दोपहर भोज कार्यक्रम में शामिल होना था। इसके लिए मठ में पूरी तैयारियां की गई थीं। दिन के 10 बजे तक सैकड़ों की संख्या में साधु-संत बाघंबरी गद्दी पहुंच चुके थे। वहां अखिलेश यादव के आने का इंतजार किया जाता रहा। इस बीच जानकारी मिली कि सपा अध्यक्ष को लखनऊ में ही रोक लिया गया है। इस पर संत भड़क उठे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि अखिलेश यादव प्रति वर्ष अचला सप्तमी पर परिवार के साथ बाघंबरी गद्दी आते रहे हैं।

इसी क्रम में उनका यह दौरा निर्धारित था। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के दर्शन का सभी को अधिकार है। महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि अखिलेश को रोकना ही था, तो इविवि के कार्यक्रम में न जाने दिया जाता। लेकिन, मठ में कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था। संतों के बीच आने से अखिलेश को रोकने का सरकार का निर्णय गलत है। इससे संत समाज मर्माहत है और योगी सरकार की निंदा की जा रही है। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के कई पदाधिकारी और संत उपस्थित थे। अचला सप्तमी के अवसर पर सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूजा हुई। यहां कुछ विशिष्ट जनों को सम्मानित भी किया गया।