पुलवामा आतंकी हमले पर कुछ यक्ष प्रश्न…कहीं ये हमला पूर्व प्रायोजित तो नहीं ?

पुलवामा आतंकी हमले पर कुछ यक्ष प्रश्न…कहीं ये हमला पूर्व प्रायोजित तो नहीं ?

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Sikander Kaymkhani
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पूरे भारत मेफिर कश्मीरी लोगों से ये बदसलूकी हो रही है. और इससे किसी और को नहीं बल्कि आतंकियों को फायदा हो रहा है. जरा सोचिए एक बेगुनाह कश्मीरी नागरिक या छात्रों को पीटकर हम उनमें कैसी भावना भर रहे हैं. ये वक्त बेगुनाहों को बचाने और गुनहगारों को सजा दिलाने का है. कश्मीरी स्टूडेंट्स अगर पढ़ नहीं पाएंगे तो फिर घाटी में वापिस जाकर क्या होगा. निराश युवा फिर पत्थर उठा लें तो इसमें आतंकियों का ही तो भला है. भारत के बाहर बैठे भारत के दुश्मन आतंकियों के काम को आसान कर रहे है भारत मे बैठे बीजेपी की सहायक दल abvp बजरंग दल वगैरा जगह जगह कश्मीरियों से मारपीट कर रहे है

खोखला राष्ट्रवाद एक तरफ अपने आप को राष्ट्रवादी कहते हैं देशभक्त कहते हैं देश प्रेमी कहते हैं और देश की संपत्ति को जलाते हैं देशवासियों की संपत्ति को जलाते हैं एक मकसूद तबके के लोग सिर्फ और सिर्फ उनका निशाना मुसलमान होते हैं और यह पिछले 70 सालों से होता आ रहा है ना इंसाफी का दौर 70 सालों से चल रहा है और सिर्फ कमजोर लोगों को भर यहां तक की ताकतवर लोगों को भी नहीं छोड़ा इन लोगों ने लेकिन इनका टारगेट सिर्फ और सिर्फ मुसलमान होता है इनकी झूठी और खोखले देशभक्ति है यह सरकारी बसों को आग लगा देते हैं अपने देश के ही मुसलमान भाइयों की संपत्ति को आग लगा देते हैं और पुलिस मूकदर्शक बनकर खड़ी रहती है अक्सर यह झूठी खोखली देश भक्ति की आड़ में यह देश के गद्दार देश के अंदर आगजनी करते हैं देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं मगर क्योंकि यह हिंदू है इसलिए राष्ट्र भक्त है जब एक हिंदू अधिकारी आई एस आई से जुड़ा हुआ मिला तो न्यूज़ चैनलों में भी उसे आतंकवादी गद्दार हिंदू आतंकवादी बिल्कुल नहीं का बल्कि उसे डिफेंड कर रहे थे न्यूज़ चैनल बीजेपी के कई कार्यकर्ता पिछले दिनों आई एस आई के संबंध रखते हुए पकड़े गए जो आईएसआई को हिंदुस्तान की खुफिया जानकारियां दे रहे थे उनके खिलाफ भी कोई कार्यवाही नहीं हुई और भारत में हुए बहुत से बम धमाकों के आरोपी जिन धमाकों में मुसलमान लोगों की जानें गई अजमेर बम धमाका मक्का मस्जिद बम धमाका हैदराबाद समझौता एक्सप्रेस बम धमाका इन सब में मरने वाले 9:00 पर्सेंट मुसलमान थे इसलिए इनके आरोपियों को छोड़ दिया गया संघ का प्रमुख मोहन भागवत जब कहता है पाकिस्तान हमारा भाई है तब किसी को कोई तकलीफ नहीं होती किसी की आवाज नहीं निकलती लेकिन अगर यही बात कोई मुसलमान कह देता तो बवाला खड़ा हो जाता दूसरी बात जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यह कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता आतंकवादी की कोई जाति संप्रदाय नहीं होता आतंकवाद का कोई पंथ नहीं होता तो इन राष्ट्र वादियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगी मगर जब यही बात एक भूतपूर्व खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू ने कही तो उसका बवेल्ला खड़ा कर दिया गया इनकी राष्ट्रभक्ति देशभक्ति खोखली है एक तरफ यह देश से गद्दारी करते हैं अभी पिछले दिनों एक सुप्रीम कोर्ट की जज ने कहा कि आर एस एस ने आईएसआई से पैसे लिए मेरे पास पुख्ता सबूत है तो ना भारत की किसी कोर्ट ने उसे संज्ञान लिया ना भारत की किसी इंटेलिजेंस ने संज्ञान लिया क्योंकि अब इल्जाम इनके आंतकवादी आकाओं पर लगा था मोहन भागवत पर लगा था तो कोई क्यों बोलता खामोश सारे के सारे खामोश क्योंकि यह लोग भी भारत को तोड़ने पर तुले हुए हैं जिस तरह पड़ोसी मुल्क भारत को तोड़ने पर तुला हुआ है


Simmi Ahuja

@SimmiAhuja_
मोदी जी मेरी दिली ख्वाहिश है कि आप दुनिया में नामी अभिनेता बने

आप की सही जरूरत सही स्थान वही है

यह नेतागिरी बस की बात नहीं

#PulwamaAttack हुआ आप shooting में busy थे??
@narendramodi ओर आप shooting पूरी करके निकले

Shatrughan Sinha

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@ShatruganSinha
Mumbaikars are known to unite in crisis whenever. Once again on Saturday, they donated abundantly for the families of our braveheart martyrs who were killed in the #PulwanaAttack. The donors were from all walks of life irrespective of caste, creed religion. These were traders,

Jan sandesh online

हैदराबाद । सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रत्यंगिरा नाथ नाम की महिला जो अघोरी बन कर अपना जीवन व्यतीत करने वाली प्रत्यंगिरा पढ़ी-लिखी और शादीशुदा हैं। वो कंप्यूटर एप्लीकेशन में ग्रेजुएट है। साथ ही उन्होंने एचआर में एमबीए तक किया है। बता दें कि अघोरी बनने से पूर्व वो एक नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्य करती थी। वर्ष 2007 में उनका विवाह हुआ था। खास बात तो ये है कि उनकी एक पुत्री भी थी किन्तु बीते 8 साल से वो तपस्या में लीन हो गई है। जानकारी के मुताबिक, ये अघोरी औरत नरमुंडों एवं रुद्राक्ष की माला गले में धारण करती है एवं काले रंग के वस्त्र धारण करती है। वो केवल रात में ही भगवान शिव और मां काली की साधना करती हैं। बो बताती है कि वो लोगों के कल्याण हेतु अघोरी बनी हैं।

 

 

Suryansh Mulnivashi
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पुलवामा आतंकी हमले पर कुछ यक्ष प्रश्न…

(1) आतंकी को कार कहाँ से मिली ? कार किसकी थी ?

(2) इतनी भारी मात्रा (350 Kg RDX या अन्य विस्फोटक) में विस्फोटक आतंकी तक कैसे पहुँचे ?

(3) आतंकी को सैनिको के काफिले के आने की खबर किससे मिली ?

(4) जिस कश्मीर में चप्पे चप्पे पर सेना के जवान तैनात हैं, ऐसी स्थिति में कई चौराहे/कई नाके पार कर आतंकी कैसे कार चलाता गया ?

(5) उसकी कार में इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक था, फिर उसकी किसी नाके पर तलाशी क्यूँ नहीं ली गयी ?

(6) जिस सड़क पर ये हमला किया गया वहां दोहरी सड़क है और बीच में डिवाइडर है, फिर विपरीत दिशा से डिवाइडर के गलत साइड आतंकी की कार कैसे चलती रही ?

(7) सामने से आती डिवाइडर के गलत साइड में कार को देख कर भी CRPF के जिस ट्रक में जवान थे उसको किनारे करने की कोशिश की गई या नहीं ?

(8) अगर ये फिदायीन हमला था तो हमलावर के शरीर के शरीर के अंग क्यूँ नहीं मिले ?

(9) कश्मीर से जबकि खबरें आना इतना आसान नहीं फिर भी हमला होने के 5 मिनट के अंदर ही सभी मीडिया चैनल पर ये खबर कैसे आ गयी ?

(10) अगले 5 मिनट में ही हमलावर का विडियो भी वायरल कैसे हो गया ?

(11) हमलावर के विडियो में जो बात कही गयी है वो आवाज़ स्पष्ट नहीं है तथा मुंह के हावभाव एवं आवाज़ में सामंजस्य नहीं है। ऐसा लगता है विडियो किसी और का और आवाज़ किसी और की है।

(12) सबसे बड़ा प्रश्न कि जब सुरक्षा एजेंसीयों के पास हमले का अलर्ट था फिर भी सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद क्यूँ नहीं की गयी ?

(13) आज एक नई बात सामने आई है जो इस हमले को और भी संदिग्ध करती है। पता चला है कि सिपाहियों के हवाई परिवहन के लिए अनुमति मांगी गयी थी परंतु गृह विभाग नें उसकी अनुमति नहीं दी। आखिर क्यूं अनुमति नहीं दी गयी ?

कहीं ये हमला पूर्व प्रायोजित तो नहीं ?

सरकार इस समय बुरी तरह से घिरी हुई थी। उसने सभी प्रयास करके देख लिए थे लोगों को मुद्दों से भटकाने के लिए जिसमे 10% सवर्ण आरक्षण बिल, राम मंदिर का मुद्दा आदि प्रमुख थे परंतु विपक्ष बेरोज़गारी, मँहगाई, राफेल, अर्थव्यवस्था की दुर्दशा, नोटबंदी आदि मुद्दों पर आवाज़ उठाना छोड़ने के मूड में नहीं था। ऐसे में सरकार के सामने एक ही विकल्प था कि किसी ऐसे मुद्दे को उठाया जाए जिससे पूरे देश के जज़्बात भी जुड़ जाएँ और विपक्ष भी मुद्दों को छोड़ने पर मज़बूर हो जाए। ऐसी स्थिति में जवानों के ऊपर आतंकी हमला सबसे अधिक कारगर उपाय था जिससे एक तीर से कई निशाने लगाए जा सकते थे। अभी खेल और भी बाकी है। सर्जिकल स्ट्राइक फिर से की जा सकती है क्यूँकि विपक्ष इस स्थिति में साथ है और बाद में उस सर्जिकल स्ट्राइक का बढ़ा चढ़ा कर महिमामंडन चुनाव तक देश के मीडिया चैनलों द्वारा किया जाएगा। मोदी को निर्णायक और 56इंची सीने वाला प्रदर्शित करने की पुरजोर कोशिश की जाएगी। इस बात की पूरी कोशिश की जाएगी कि लोग #चौकीदार_ही_चोर_है वाले नारे को पूरी तरह से भूल जाएँ।

सोर्स : Suryansh Mulnivashi

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