कभी इनको भी शहीद_होने का मौका_दो, इनको सिर्फ़ भारतीयों को मारने के लिए ही बनाया है

कभी इनको भी शहीद_होने का मौका_दो, इनको सिर्फ़ भारतीयों को मारने के लिए ही बनाया है

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जैश के कैंप पर भारत की कार्रवाई के बाद आज पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर नाकाम कोशिश की है. विदेश मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान की कोशिश को नाकाम करते हुए उसके एक लड़ाकू विमान को मार गिराया गया है. हालांकि भारत को भी एक मिग का नुकसान हुआ है. इस कार्रवाई में भारत का एक पायलट पाकिस्तान की हिरासत में है. भारत ने अपने पायलट को सुरक्षित वापस करने की मांग की है.

 

Sikander Kaymkhani

कभी इनको भी #मौका_दो_शहीद_होने का.

#इनको सिर्फ भारतीयों को मारने के लिए ही बनाया है

क्या ये अंग्रेजी दलाल की औलाद कभी भारत के लिये भी कुछ करेंगे या हमेसा से भारत के दुश्मन का ही काम अंजाम देते रहेंगे

यह लोग भारत को अंदर से तोड़ते आये है अंग्रेजो के जमाने से आज भी तोड़ रहे है

भारत का हर दुश्मन मुल्क यह चाहता है भारत मे शांति न हो भारत टुकड़े टुकड़े हो जाये

भारत का हर दुश्मन मुल्क चाहता है कि भारत जाती धर्म सम्प्रदाय ऊंच नीच वर्ण व्यवस्था इनमें उलझ कर भाषा और क्षेत्र की लड़ाई में उलझकर टूट जाये
।ओर यह काम भारत के बाहर से दुश्मन मुल्क करते है
भारत के अंदर से आरएसएस और बीजेपी करती है
….कब तक यूं ही आपस में लट्ठ की ट्रेनिंग लेते रहेंगे

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Saleem Baig
मुसलमानों के वोटों से चुनी हुई अखिलेश सरकार ने अपने कार्यकाल में किस तरहाँ से उर्दू ज़ुबान को ख़त्म किया आप खुद ही पढ़ लीजिये और अपने ज़मीर की आवाज़ पर ही, अब आइन्दा वोट देने का फैसला भी कीजिये, पर इतना ज़रूर याद रखिये यही वक़्त होता है इन वोटों के भिखारियों से अपने क़ीमती वोटों के एवज़ में बानी सरकारों के काम काज के आंकलन का, और ज़रुरत पढ़ने पर हिसाब किताब का ? हाँ इतनी बात यक़ीनी है कि ज़िंदा लोग तो ज़रूर हिसाब किताब करते ही हैं ?

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Shamsher Ali Khan

पाकिस्तान से एक मंत्रि ने कहा था कि भारत के मंदिरों में बज रहे प्रार्थना की घंटियां बंद कर देंगे लेकिन मैं उसे बताना चाहता हूं कि वह भारत को नहीं जानता है । इस देश के मुसलमान जबतक जिंदा है मस्जिदों से अज़ान की आवाज आएगी और मंदिरों में घंटी बजती रहेगी यह हमारे देश की सुंदरता है जो पड़ोसी देश ईर्ष्या से देखता है । इस देश में लोग एक रूप में रहते हैं और बाहरी ताकत के खिलाफ हम सब हिंदुस्तानी एक साथ होंगे ।
Asaduddin Owaisi

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#आइए_जानते_हैं_कि_जंग_क्या_होती
6 अगस्त 1945 का एक खौफनाक दिन था सुबह के वक्त जापान के शहरियों ने तीन अमेरिकी जहाजों को बहुत नीचे से उड़ते हुए देखा
ठीक 8:25 पर एक B29 जहाज जिसको कर्नल पोल चला रहे थे हिरोशिमा शहर के ऊपर पहुंचा एकदम जहाज की ऊंची उड़ान 31600 फीट तक जा पहुंची और जहाज से 4400 किलो वजन का एटम बम हिरोशिमा पर गिरा दिया गया
46 सेकंड के बाद एटम बम 19000 फीट की बुलंदी पर फट गया और बम फटने के कुछ पल में शहर का तापमान 6000 डिग्री सेंटी ग्रेड तक जा पहुंचा जो कि सूरज के तापमान से भी कहीं अधिक से अधिक है
यह तापमान सिर्फ चंद लम्हों के लिए रहा और फिर नीचे गिरने लगा लेकिन 1 मील के इलाके के अंदर हर चीज जलकर राख हो गई
यहां तक की बड़ी-बड़ी इमारतों के ऊपर के हिस्से पिघल गए एटम बम के गिरने के सिर्फ चन्द सेकेंड के अंदर 70000 लोग भाप बनकर उड़ गए
ना हवा में कोई परिंदा जिंदा बचा ना जमीन पर इंसान और हैवान वक्त गुजरने के साथ साथ ये मौतें एक लाख से आगे बढ़ गई धमाका इस कदर खौफनाक था कि 31000 फीट की बुलंदी पर मौजूद कर्नल पॉल का जहाज भी डिसबैलेंस होने लगा जबकि पिछले हिस्से में बैठा हुआ पोकलेन इस तबाही की वीडियो फोटो बना रहा था


पूरे जापान का हिरोशिमा से कांटेक्ट खत्म हो गया नाकामूरा नामी एक पत्रकार जो धमाका होते वक्त शहर से बहुत दूर था और अपनी मोटरसाइकिल पर शहर पहुंचा और हिरोशिमा की तबाही देखने वाला पहला पत्रकार था उस ने शहर से वापस आकर जो अपने अखबार को ब्रेकिंग न्यूज़ दी वह इस तरह थी 8:15 बजे दुश्मन के दो जहाजों ने हिरोशिमा पर कोई खास बम गिरा दिया और शहर पूरा मुकम्मल तौर पर तबाह हो गया जब अखबार के ब्यूरो चीफ को यह खबर मिली तो उसने यकीन करने से इंकार कर दिया
और कहा कि फौजी इस बात को तस्लीम नहीं करेगी कि शहर तबाह हो गया और इतने अधिक लोग मर गए
उस समय चीफ ने नाकामूरा से कहा कि मरने वालों की तादाद कुछ कम कर दो जिस पर नाकामोरा ने ऐतिहासिक जवाब दिया और कहा कि फौज बेवकूफ है
हालात जानने के लिए जापान की फौज ने एक जहाज को हिरोशिमा भेजा जहाज हवा में 3 घंटे तक लगातार उड़ता रहा और वापस आकर अपने ऑफिसर को बताया कि उसे नहीं खबर शहर को क्या हुआ
पूरे शहर के ऊपर काले बादल धुएँ देखें
पिछले कुछ दिनों से जब मैं भारत पाकिस्तान दोनों तरफ बढ़ती हुई दुश्मनी दोनों मुल्कों के नौजवान नस्ल की फेसबुक टि्वटर पर होने वाली पोस्ट और कमेंट पढ़ता हूं
तो मेरे दिल से सिर्फ एक दुआ निकलती है या अल्लाह इन लोगों को हिदायत दे यह नहीं जानते कि वह कौन सी तबाही से गुजरने की बात कर रहे हैं
एटम बम तो सिर्फ इलाके में ताकत का बैलेंस बराबर करने के लिए बनाया गया ना की इंसानियत को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए नहीं ..

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तीनों सेनाओं ने अभीतक अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है लेकिन चौथी “चैनल सेना” के डरपोक बयानवीरों ने टीवी स्टूडियो में बने फ़र्ज़ी वॉररूम, ऐनिमेटेड बमबारी और अपने ज़ुबानी हमलों से अपनी बची-ख़ुची साख भी ध्वस्त कर ली है।

एसी केबिन में बैठ करोड़ों का पैकेज उठाने वालों बिकाऊ दलालों से पूछों कोई इनके ख़ानदान से बोर्डर पर खड़ा है क्या? मोदी जी & गैंग के फेंके हुए चंद सिक्कों से विपक्षियों को गाली दो, किसी का फ़र्ज़ी चरित्र निर्माण तो किसी का फ़र्ज़ी चरित्रहनन करो लेकिन युद्ध करने और उन्माद फैलाने की कोशिश तो मत करो।

SanJay Yadav

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MD Imran
#छत_भी_फूस_की_ही_है_एक_शहीद_के_घर_की…..

इससे बड़ी त्रासदी इस देश के लिए और क्या हो सकती है। अरे हम कौन सी दुनिया में जी रहे हैं, जिनकी वजह से हम चैन की नींद सोते हैं उनका पूरा परिवार इस फुस की छत के नीचे सोने के लिए मजबूर है। मानवता तो बिल्कुल मर ही चुकी है हम सब में। मैं… आप…हम सब भूल जाएँगे 10-15 दिन बाद ही, सबकी डीपी भी बदल जाएगी, फिर वही सब होगा।
मौका अच्छा है इन राजनेताओं के लिए भी, जो अब इन शहीदों की लाशों पर भी राजनीति करेंगे। अरे कुछ तो शर्म करो बेशर्मों ये गन्दी राजनीति छोड़ कर इन शहीदों के परिजनों के लिए कुछ ऐसा करो कि जिससे हम इनका कुछ दर्द कम कर सकें। अपनी जेबें तो बाद में भी भरते रहना। कुछ इन शहीद बेटों के परिवारों के लिए भी कर दो, हम सबका कुछ न कुछ दायित्व है इन बेटों के लिए, जिनकी वजह से हम और हमारा परिवार चैन की नींद सोता है: सामाजिक कार्यकर्ता आदरणीय मो जहाँगीर

सोचिये….जो सैनिक अपने घर की छत नहीं बना पाया तो सोचो किन किन हालतों से इनका परिवार लड़ता होगा।
आदरणीय मो जहाँगीर (सामाजिक कार्यकर्ता) ने एक पहल की है। इन बच्चों के भविष्य को संवारने की, इस राजनीति से ऊपर उठकर आप भी इन शहीदों के परिजनों को सहयोग तो दे ही सकते हैं। मैं आप सबसे निवेदन करता हूँ, की जिसकी जितनी सामर्थ्य है वो उतनी मदद करें ।
#उन्नाव, #कन्नौज, #कानपुर, #भागलपुर के बाद #मसौढ़ी के शहीद के घर आर्थिक मदद के लिए पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता मो जहाँगीर।
एक छोटी सी मुहिम से जुड़िये

#मेरादायित्व #मेरेभारत के लिए…

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Poonam Lal

#मेरे10_सवाल_सरकार_से

1🤔 क्या LOC कबड्डी की लाइन है जिसे आप गए और छू कर लौटे आए… और पाकिस्तान ने चूं तक नहीं करी!!

2🤔 सेना की तरफ से कोई बयान या जानकारी नहीं आई तो ऐसी कौन सी उन्नत टेक्नोलॉजी हमारे नेताओं के पास है जिससे उन्होंने वहां पर मारे गए आतंकियों की गिनती भी कर ली!!!

3🤔 क्या पाकिस्तान में घुसकर बमबारी करके सकुशल वापस आ जाना और पाकिस्तान का इस पर भी चुप रह जाना इस सर्जिकल स्ट्राइक पर संदेह नहीं पैदा करता!!!

4🤔 इतने बड़े जवानों के जत्थे को कौन सी मजबूरी के चलते हवाई यात्रा की परमिशन नहीं दी गई???

5🤔 250 किलोग्राम विस्फोटक किसकी शह पर सड़कों पर जवानों की ताक में टहलता रहा!!!

6🤔 आज अभी एक वीडियो देखा जिसमें वायु सेना के एक ऑफिसर को पकड़ा गया है… यह कब और कैसे पकड़ा गया इसका जवाब कौन देगा???

7🤔 सरकार की तरफ से बयान आया कि हमारे सभी पायलट सुरक्षित बमबारी करके वापस आ गए… फिर यह पकड़ा गया व्यक्ति कौन है???

8🤔 पाकिस्तान लगातार कह रहा है कि हमारे यहां कोई हताहत नहीं हुआ …जबकि मीडिया और सरकार चीख चीख कर कह रहे हैं 300 आतंकवादी मारे गए… दोनों में से कोई एक तो झूठ बोल ही रहा है वह भी 100% झूठ … लेकिन प्रश्न यह उठता है कि इस झूठ के पीछे कारण क्या है???

9🤔 जब सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए जवानों की शहादत को देखते हुए तो स्वयं प्रधानमंत्री ने और उनकी पार्टी के लोगों ने अपने अपने कार्यक्रम रद्द क्यों नहीं किये???

10🤔 जवानों की शहादत के बदला के लिए भारतीय जनता पार्टी को वोट देने के लिए खुल्लम-खुल्ला क्यों कहा जा रहा है !!!! क्या यह हमला करवाया गया था ताकि लोगों की देशभक्ति को जगा कर उन्हें भावात्मक रूप से blackmail कर पार्टी के लिए वोट देने के लिए बाध्य किया जा सके!!!!

((प्रश्न करिए इस नाकारा सरकार से वरना अगले 5 साल यदि इसने और हड़प लिए आपके जीवन के तो आने वाले जीवन में कुछ भी शेष नहीं बचेगा आपके))

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#पूनम_मिर्ची’

Poonam Lal

#शेर को इतना मजबूर नहीं देखा कभी..
जिनका शिकार करता था आज उन्हीं के कदमों में पड़ा है….

ना मैं धन चाहूं
ना रतन चाहूं
तेरे चरणों की धूल मिल जाए
तो मैं तर जाऊं
तो मैं तर जाऊं

(बस #चरणामृत पी और लो तो कुछ यकीन आए)

#पूनम_मिर्ची

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अगर आप किसी पतीली में उबलते हुए पानी में मेढक को डाल दें तो वह मेढक झट से कूद कर बाहर आ जाएगा,

लेकिन अगर आप एक पतीली में ठंडा पानी भरें और उसमें एक मेंढक को डाल दें,

और उस पतीली को आग पर रख दें तो मेंढक बाहर नहीं कूदेगा,

और पानी उबलने पर मेंढक भी उसी पानी में मर जाएगा,

ऐसा क्यों होता है ?

असल में जब आप मेंढक को उबलते हुए पानी में डालते हैं तो वह जान बचाने के लिए बाहर कूद जाता है,

लेकिन जब आप उसे ठन्डे पानी में डाल कर पानी को धीरे धीरे उबालते हैं,

तब मेंढक अपने शरीर की ऊर्जा खर्च कर के अपने शरीर का तापमान पानी के तापमान के अनुसार गरम करने लगता है ,

धीरे धीरे जब पानी इतना गर्म हो चुका होता है कि अब मेढक को जान बचाना मुश्किल लगने लगता है तब वह पानी से बाहर कूदने का इरादा करता है,

लेकिन तब तक उसमें कूदने की ऊर्जा नहीं बची होती,

मेढक अपनी सारी ऊर्जा पानी के तापमान के अनुरूप खुद को बदलने में खर्च कर चुका होता है,

और मेढक को गर्म पानी में उबल कर मर जाना पड़ता है,

यह कहानी आपको सुनानी ज़रूरी है,

अभी भारत के नागरिकों को भी गरम पानी की पतीली में डाल दिया गया है,

और आंच को धीरे धीरे बढ़ा कर पानी को खौलाया जा रहा है,

भारत के नागरिक अपने आप को इसमें चुपचाप जीने के लिए बदल रहे हैं,

लेकिन यह आंच एक दिन आपके अपने अस्तित्व के लिए खतरा बन जायेगी,

तब आपके पास इसमें से निकलने की ताकत ही नहीं बची होगा,

मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूँ,

सरकार नें अमीर कंपनियों के लिए छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों के साढ़े छह सौ गाँव जला दिए,

सारे देश नें चुपचाप सहन कर लिया,

सरकार नें आदिवासियों को गाँव से भगाने के लिए महिलाओं से बलात्कार करना शुरू किया,

सारे देश नें चुपचाप सहन कर लिया,

सरकार नें आदिवासियों के लिए आवाज़ उठाने के लिए सोनी सोरी को थाने में ले जाकर बिजली के झटके दिए,

और उसके गुप्तांगों में पत्थर भर दिए,

सारे देश नें सहन कर लिया,

अब सरकार नें सोनी सोरी के चेहरे पर एसिड डाल कर जला दिया,

हम सब चुप हैं,

सरकार अमीर सेठों के लिए ज़मीन छीनती है,

हम चुप रहते हैं,

सत्ता दल जे जुड़े गुण्डे लोग दिल्ली विश्वविद्यालय में लोगों को पीट रहे हैं और हम चुप हैं ?

हम चाहते हैं हमारा बेटा बेटी पढ़ लिख लें,

हमारे बच्चों को एक नौकरी मिल जाए,

हमारे बच्चे सेटल हो जाएँ बस,

हम क्यों पचडों में पड़ें ?

हम महज़ पेट के लिए चुप हैं ?

कहाँ गया हमारा धरम , नैतिकता , बड़ी बड़ी बातें ?

मेंढक की तरह धीरे धीरे उबल कर मर जायेंगे,

लाश बचेगी बस,

पता भी नहीं चलेगा अपने मर जाने का,

लाश बन कर जीना भी कोई जीना है ?

जिंदा हो तो जिंदा लोगों की तरह व्यवहार तो करो…

Himanshu Kumar

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Sikander Kaymkhani

भारतीय आतँकवादी बच्चों को स्कूल जाने की उम्र में आतंकवादी गतिविधिया सिखाते हुए घृणा और नफरत भरते हुए जिन बच्चों को धर्म के ध का नही पता उन्हें हिन्दू मुसलमान का फर्क सिखाते हुए यह सिखाते है कि मुसलमान हमारे दुश्मन है
This is the Real Face of Terrorism .But Nobody is calling them Terrorists..

Have you ever seen any Madrasa student carrying sword or dagger in their Madrasa ?

#just__asking 🤔

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Sikander Kaymkhani

क्या भारत और भारत की सरकार यह इंसाफ करेगी जब मध्यप्रदेश में आम छोटे-मोटे जुर्म में बंद कुछ मुसलमान और कुछ बेगुना मुसलमानों को जेल के अंदर से भगा कर उनका एनकाउंटर कर दिया गया और दिखाया गया कि यह लकड़ी की चाबी से ताला खोल कर भाग गए क्या इस तरह यह जो आईएसआई के लिए जासूसी करते हुए पकड़े गए हिंदू आंतकवादी क्या इनको भारत सरकार फांसी पर लटका आएगी भारत के कुछ फौजी सिपाही और कुछ अफसर जो कि आई एस आई के लिए जासूसी करते हुए पकड़े गए वह सारे के सारे हिंदू थे जिनका सब का संबंध बीजेपी और आरएसएस था तो क्या भारतीय सरकार और भारतीय कानून बीजेपी और आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए गी अगर नहीं तो फिर भारत के अंदर कोई कानून नाम की चीज नहीं है भारत में कानून सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों दलितों और पिछड़ों के लिए है उनको सजा देने के लिए है भारत में जितने भी लोग कर्मचारी जो काम करते हैं वह सब के सब गुलाम हैं उन ब्राह्मणवाद के जिस ब्राह्मणवाद ने बेगुनाह मुसलमानों को कत्ल किया जिस ब्राह्मणवाद ने 1984 के दंगों में बेगुनाहों को मारा उस जिस ब्राह्मणवाद ने हिंदुस्तान के संविधान को जलाया हर 26 जनवरी को जलाते हैं जिस ब्राह्मणवाद ने हमारे झंडे को जलाया जिस ब्राह्मणवाद ने अपने अपने नागपुरी मुख्यालय पर 60 साल तक भारत के झंडे को नहीं फहराया वह ब्राह्मणवादी आज अपने आप को देश भक्ति कहते हैं और गुजरातियों की बात करते हैं भारत से पैसे लेकर भागने वाले सारे के सारे लोग गुजराती थे मगर फौज में मरने वाले सीआरपीएफ के जवानों में बीएसएफ के जवानों में कोई भी गुजराती नहीं था आखिर क्यों क्या गुजराती सिर्फ पैसे लूटने के लिए हैं क्या गुजराती सिर्फ वोटों को लूटने के लिए हैं

Disclaimer : यह लेख सोशल मीडिया में वायरल है, लेखकों के अपने निजी विचार/जानकारी पर आधारित हैं, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है, तीसरी जंग किसी रूप में भी उत्तरदायी नहीं है|