#पाक आर्मी ने मुझे भीड़ से बचाया, मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया, विंग कमांडर अभिनन्दन : ये इस्लाम की तालीम है जो अमान मांगे उसे अमान दो

#पाक आर्मी ने मुझे भीड़ से बचाया, मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया, विंग कमांडर अभिनन्दन : ये इस्लाम की तालीम है जो अमान मांगे उसे अमान दो

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Shamsher Ali Khan
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#दुरुद_शरीफ़_की_फ़ज़ीलत_
एक दीन जिब्रीले अमीन हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम की ख़िदमत में हाज़िर हुवे और फरमाया :-
या रसूल-अल्लाह मैं ने आस्मानों पर एक ऐसा फ़रिश्ता देखा जो तख़्त नशीन था और सत्तर हज़ार फ़िरिश्ते सफ़ बस्ता उस की ख़िदमत में हाज़िर थे, उस के हर सांस से अल्लाह तआला एक फ़िरिश्ता पैदा फ़रमाता हैं , अभी अभी मैं ने उसे शिकस्ता परों के साँथ कोहे काफ़ में रोते हुवे देखा है , जब उस ने मुझे देख़ा तो कहा तुम अल्लाह तआला के हुजूर मेरी सिफ़ारिश करो | मैं ने पूछा तेरा जुर्म क्या है ? उस ने कहा :- मे’राज की रात जब मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम की सुवारी गुज़री तो मैं तख़्त पर बैठा रहा, ता’जीम के लिये ख़डा नहीं हुवा , इस लिये अल्लाह तआला ने मुझे इस जगह इस अ़ज़ाब में मुब्तला कर दिया है | जिब्रीले अमीने ने कहां :- मैं ने अल्लाह तआला की बारगाह में रो रो कर उस की सिफ़ारिश की, अल्लाह तआला ने मुझ से फ़रमाया :- तुम इस से कहो कि यह
#_मुहम्मद_मुस्तफ़ा_सल्लल्लाहु_अलैहि_वस्सलम_पर_
#__दुरूद_सलाम_भेजे, चुनान्चे , उस फ़रिश्ते ने आप पर दुरुद भेजा तो अल्लाह तआला ने उस की इस लग़जिश को मुआफ़ कर दिया और उस के पर भी पैदा फ़रमा दिये |
[मुकाशफ़तुल कुलूब] [अल मुकाशफ़तुल कुब्रा]
#__मोमिनो_पढ़ते_रहो_तुम_अपने_आका_पर_दुरुद..!!
#__है_फरिश्तों_का_वजीफा_अस्सलातो_वास्सलम..!!
[सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ]

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#SayNoToWar_पाकिस्तान आर्मी ने मुझे जानलेवा भीड़ से बचाया, मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया जा रहा है, पाक आर्मी जेंटलमेन है, मैं बहुत ज़यादा इम्प्रेस्ड हूँ और भारत जाकर भी अपने बयान पर कायम रहूँगा…भारतीय विंग कमांडर अभी नंदन सिंह
ये इस्लाम की तालीम है जो अमान मांगे उसे अमान दो

Muhammad Yasir

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Shamsher Ali Khan

युद्ध समस्या का समाधान नहीं है—
चार वर्षों तक देश की आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार – पाकिस्तान और आतंकवाद का नाम रटती रही है।
अलगाववादी नेता महबूबा मुफ्ती के साथ भाजपा कश्मीर में खुद सरकार बनाती रही है।
नोटबंदी में साढ़े नौ लाख करोड़ रुपये कि घपलेबाजी,
नोटबंदी के बाद छोटे व्यापारियों का तबाह होना,
नोटबंदी के बाद दो करोड़ लोगों का बेरोजगार खत्म होना,
राफेल सौदेबाजी में घोटाला,
देश के महानगरों के रेलवे स्टेशनों का बेचे जाना,
देश का संविधान को खत्म करने की कवायद और समानांतर नागपुरी संविधान लागू करने की कोशिश।
पुलवामा में 47 सुरक्षा बलों की हत्या और उसका राजनीतिकरण,
आदिवासियों को सर्वोच्च न्यायालय के जरिये उजाड़ा जाना,
देश के पाँच महत्वपूर्ण हवाई अड्डों का बेचे जाना,
और भी कितने देश की समस्याओं से जुड़े मुद्दे मोदी सरकार ने बालाकोट पर हवाई हमले की खबर में दबा दिया है।
फिलहाल भाजपा नेताओं का उन्मादी बयान और लोकसभा चुनाव का प्रचार साथ – साथ चल रहा है।
दूसरी तरफ इमरान खान ने समस्या समाधान के लिए बातचीत की पेशकश की है –
कोई भी मानवतावादी इंसान लड़ाई नहीं चाहता है।
जिन भाजपा नेताओं के घरों से एक भी आदमी फौज में नहीं है, वे दो दिन से – बंदे मातरम् रटे जा रहे हैं। कायदे से एक भी बम्ब किसी शहर में फट गया तो भाजपा भक्त गुसलखाने में बैठे नजर आएंगे।
लड़ाई का मतलब सीरिया, इराक, लीबिया, में देखना चाहिए।
विश्व की हथियार बेचनेवाली बड़ी ताकतें अपने हथियारों के बाजार के साथ युद्ध का इंतजार करती हैं।
फिलहाल तो यही हो रहा है — मोदी पाकिस्तान पर आक्रमण करे, पाकिस्तान अमेरिका से हथियारों के साथ 100 अरब डालर की सहायता ले और व्यापारिक देशों के हथियारों का बाजार फलता फूलता रहे।
इसके साथ ही आम पब्लिक को राष्ट्रभक्ति के उन्माद में दिशाहीन कर वोटों की राजनीति भी की जाती रहे।
बेहतर होगा कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष साथ साथ बैठकर समस्याओं का समाधान ढूँढें।

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Suryansh Mulnivashi

जातिवादी मीडिया भारतीय सेना को हास्यास्पद बना रहा है. जो चीजें बहादुरी और शौर्य कहकर आपको परोसी जा रही हैं, वह चैनलों का क्रिएट किया हुआ हिस्टीरिया है.

14 फरवरी से आज तक सबसे संतुलित और संयमित बयानबाजी सेना के अधिकारियों ने की, जबकि सबसे ज्यादा उच्छृंखलता जातिवादी मीडिया ने प्रदर्शित की. दोनों देशों की सरकार और मीडिया ने मिलकर दो हफ्ते में झूठ का अभूतपूर्व कारोबार किया है. अभी यह कारोबार उछाल पर है. सुबह से अब तक सिर्फ इतना कन्फर्म हुआ ​है कि सेना ने वास्तव में कार्रवाई की है.

रायटर्स ने वहां के ग्रामीणों के हवाले से लिखा है कि मात्र एक आदमी घायल हुआ है. मीडिया ने मारे गए आतंकियों की संख्या 200 से लेकर 400 तक बताई है. हालांकि, भारत सरकार के सचिव विजय गोखले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई संख्या नहीं बताई.

जातिवादी मीडिया ने मारे गए लोगों की गिनती कैसे कर ली? इसी​ तरह पुलवामा हमले में जब अपने ही जवानों की पहचान नहीं हो सकी थी, जातिवादी मीडिया ने आतंकी का फोटो भी प्रसारित कर दिया था. ऐसे आतंकी का जो 2007 में मारा जा चुका था.

आज सारा दिन मीडिया ने 2016 में अपलोड हुआ यूट्यूब का वीडियो प्रसारित करके उसे एयर स्ट्राइक का वीडियो बताया है. ऐसे में इस वक्त कम से कम विश्वसनीय उसी बात को माना जा सकता है, जितना भारत की सरकार और सेना के अधिकारी बोलें. चैनल बेहद खतरनाक हुए जा रहे हैं.

पाकिस्तान के एक ‘लिबटार्ड’ पैनलिस्ट ने समा टीवी पर कहा, ‘जब भी दोनों देशों में युद्ध हुआ, इसका फायदा दोनों मुल्कों के कट्टरपंथियों ने उठाया. अवाम को इसका कोई फायदा नहीं हुआ. हमें वॉर हिस्टीरिया से बचना चाहिए. एंकर वही थीं जो ‘चाय वाला मोदी’ रटते रटते मशहूर हो चुकी हैं, फिर भी गनीमत है कि मोहतरमा ने उन मोहतरम को देशद्रोही नहीं कहा. भारत में अब यह भी माहौल नहीं रह गया है कि आप कह दें कि युद्ध बुरी चीज है, सवाल उठाना तो दूर की कौड़ी है.

अंतिम बात, भारत को अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कार्रवाई करने का हक है, शहादत देने वाले सैनिकों को खूब सम्मान का हक है, लेकिन चैनलों को झूठ प्रसारित करने का हक किसने दे ​डाला, यह तो भारत के ही लिए खतरनाक है. जनता में वॉर हिस्टीरिया क्रिएट करना भी हाफिज सईद और मसूद अजहर का साथ देना है.

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1 – #अल_फातिहा

1 – प्रारम्भ करता हूँ अल्लाह ( परमात्मा ) के नाम से , जो परम कृपालु , अतीव करुणावान है ।
2 – प्रत्येक स्तुति अल्लाह के ही लिए हैं , जो सारे संसार का पालनहार है ।
3 – परम कृपालु , अतीव करुणावान ,
4 – अन्तिम दिन के स्वामी ,
5 – हे अल्लाह , तेरी ही हम भक्ति करते हैं और तुझ से ही याचना करते हैं ।
6 – हमे सीधा रास्ता दिखा ।
7 – रास्ता उन लोगो का , जिनके ऊपर तूने दया की है ; न की उनका , जिन पर तेरा प्रकोप हुआ ; और न उनका , जो पथभ्रष्ट या ( भ्रमित ) हुए ।

( पवित्र कुरआन अध्याय 1 )

मुहम्मद इब्राहिम
तालिब-ए-दुआ

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★गलत_धारणा_मुहम्मद सल्लाहो अलैहि व सल्लम★

मिथ: मुहम्मद सल्ल. ने शांतिपूर्ण लोगों के साथ अनेक युद्ध किए

तथ्य : मुहम्मद सल्ल. ने अपने जीवन में अल्‍लाह के लिये ये 9 जंगे की,

1.बद्र
कबः हिजरत के दूसरे वर्ष मक्के वालों का मदीने पर पहला आक्रमण
कहाँ: मदीने से बाहर बद्र नामक स्थान
परिणामः मक्के वालों के सत्तर लोग युद्ध मेंमारे गए। एवं चौदह मुसलमान शहीद हुए ।

2. ओहदकबः हिजरत के तीसरे वर्ष मक्के वालों का मदीने पर दूसरा आक्रमण
कहाँ: मदीने के पास ओहद नामक पहाड़ी के नीचे
परिणामः कई मुसलमान शहीद हुए

3. खन्दक
कबः हिजरत के चौथे साल मक्के वालों का मदीने पर तीसरा आक्रमण
कहाँ: मदीने के द्वार पर खाई खोदी गई
परिणामः शत्रु की फौज खाई पार न कर सकी अतः खोदी गई कोई युद्ध नहींहुआ।

4. सुलह हुदैबिया
कबः हिजरत के छठे साल मु. सल्‍ल. उमरा करने हेतु मक्के में प्रवेश करना मक्के वालो ने मक्के से बाहर रोक दिया
कहाँ: मक्के से बहार “हुदैबिया” नामक स्थान पर
परिणामः कोई युद्ध नही हुआ एवं दोनों पक्षों में संधि हो गई ।

5. फ़तह मक्‍काः
कबः हिजरत के आठवे साल जब मक्के वालों ने संधिको तोड़ दिया।
कहाँ: मक्का
परिणामः कोई युद्ध नहीं हुआ न ही जान व माल की कोई हानि हुई ।

6. ख़ैबर
कबः हिजरत सातवां साल ।
कहाँ: मदीने के पास की खैबर नामक बस्ती में
परिणामः बहुत मामूली झड़प हुई जिसमें एक यहूदी मारा गया

7. मौता
कबः हिजरत सातवां साल ।
कहाँ: जार्डन का पश्चिमी तट
परिणामः घमासान युद्ध हुआ घमासान युद्ध हुआ कई मुस्लिम सिपाही शहीद हुए

8. हुनैन
कबः हिजरत का नौवाँ साल
कहाँ: मक्के के पूर्वी ओर से मुसलमानों पर तीरंदाजी
परिणामः मुस्लमानों को सामने डटा देख शत्रुमैदान छोड़ कर भाग गया

9. तबूक
कबः हिजरत का आठवाँ साल
कहाँ: अरब का उत्तरी तट कोई युद्ध नहीं हुआ ।

आपके पूरे जीवन काल में उक्तवर्णित घटनाओं के अतिरिक्त कोई एक भी ऐसीघटना नही हुई जिसमें किसी प्रकार की कहा सुनी भी हुई हो

जैसा कि ज्ञात है कि “गज़वा-ए-खंदक”, “सुलह, हुदैबिया” “तबूक एवं फ़तह मक्का” में तनिक भी युद्ध नहीं हुआ। और ख़ैबर व हुनैन में मामूली व इस प्रकार की झड़प हुई कि उसे युद्ध नहीं कहा जा सकता। अतः निश्चित रूप से यह स्पष्ट हो जाता है कि मुहम्मद सल्ल. के पूरे जीवन काल में युद्ध की केवल तीन घटनाएँ हुई, इनमें आपकी ओर से युद्ध शुरू नही किया गया, बल्कि आत्मरक्षा मे मजबूरन आपको युद्ध करने पड़े