पीपल्स टेम्पल का सामूहिक नरसंहार

पीपल्स टेम्पल का सामूहिक नरसंहार

Posted by

Er S D Ojha
=============

जोंस एक कल्ट चलाता था । कल्ट और धर्म में फर्क होता है । कल्ट किसी धर्म विशेष में कुछ जोड़ने और कुछ निकालने से बनता है । कल्ट अल्प कालिक होता है । जब कल्ट के अधिष्ठाता की मौत हो जाती है तो कल्ट भी स्वतः हीं समाप्त हो जाता है । कुछ कल्ट आगे भी चलते है और 200/300 सालों बाद धर्म का रुप धारण कर लेते हैं । जोंस ने गुयाना के जंगलों में 3800 एकड़ में पीपल्स टेम्पल बनाया था, जिसके चारों ओर ऊंची चार दिवारी बनी थी । जगह जगह वाच टाॅवर भी लगे थे । कहीं से किसी के भागने की गुंजाइश नहीं थी । जोंस के अनुयायियों को दिन भर खेतों में हाड़तोड़ परिश्रम करना पड़ता । शाम को उन्हें रोटी नसीब होती । माएं दिन में कुछेक घंटों के लिए हीं अपने बच्चों के साथ रह पातीं थीं । विशेष कर बच्चों पर निगरानी रखी जाती । बच्चे पीपल्स टेम्पल में रहेंगे तो उनके माता पिता को भी वाध्यता मूलक रहना होगा ।

जोंस समाजवाद की बातें सुनाया करता था । वह पूंजी वाद के खिलाफ बोलता । गैर बराबरी के खिलाफ बोलता। अन्याय के खिलाफ बोलता । नस्ल भेद के खिलाफ बोलता । नस्लभेद के खिलाफ बोलने से उसके ज्यादातर अनुयायी अश्वेत अमेरिकी थे । वह संस्कार की बातें भी करता था , लेकिन खुद कभी संस्कारी नहीं रहा । उसका अपनी पत्नी के अतिरिक्त इतर सम्बंध भी था । इसके लिए वह एक खूबसूरत बहाना बनाया करता था । उसका कहना था कि ऐसा वह दूसरों को सुख पहुँचाने के नियत से करता था । यदि कोई भागने की कोशिश करता तो उसका हश्र बहुत बुरा होता । उसे उल्टा कर कुएँ में लटकाया जाता । बुरी तरह से मारा पीटा जाता । लोग डर गये और उन्होंने भागने का ख्याल दिल से निकाल दिया । जोंस का व्यवहार तानाशाही का था । उसने अपने सभी अनुयायियों से सादे कागज पर दस्तखत करा रखे थे । वह सबको इसकी धौंस देता और उन्हें ब्लैक मेल करता ।

सबके जीवन में दुर्दिन आता है । जोंस के जीवन में भी आया । कुछ लोग पीपल्स टेम्पल से भागने में सफल हो गये । वे सीधे अमेरिकी सांसद रियान से मिले । कुछ अनुयायियों के परिजन भी रियान से मिले थे । परिजनों का कहना था कि पीपल्स टेम्पल के लोगों का शोषण हो रहा है । रियान चार पत्रकारों की टीम के साथ गुयाना के उस क्षेत्र में पहुंचे जहां जोंस का एक क्षत्र आधिपत्य था । निरीक्षण के पहले दिन सब कुछ ठीक ठाक रहा । दूसरे दिन जब रियान और उनकी टीम चलने को उद्दत हुई तो कुछ लोग भागते हुए उनके पास आए । उन्होंने कहा कि वे यहां बहुत दुःखी हैं और यहां से जाना चाहते हैं । जोंस अपना आपा खो बैठा । उसने रियान पर हमला करा दिया । रियान हमले में बाल बाल बचे थे । जब वे और उनकी टीम भागकर हेलिकॉप्टर में बैठे तभी जोंस के सुरक्षाकर्मियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया । इस घटना से जोंस घबरा गया । उसने अपने सभी अनुयायियों को उस दिन एक लम्बा चौड़ा भाषण दिया था , जिसका कुछ अंश यहां दिया जा रहा है –

“अपने बच्चों पर दया कीजिए. बुजुर्गों पर रहम कीजिए. ऐसे जहर पीजिए, जैसे प्राचीन ग्रीस में लोग पिया करते थे. हम खुदकुशी नहीं कर रहे हैं. ये क्रांति है. अब हम पीछे नहीं लौट सकते. वो (अमेरिकी सैनिक) हमें जिंदा नहीं छोड़ेंगे. वो और झूठ बोलेंगे. और सांसद आएंगे यहां. अब हमारे बचने की कोई उम्मीद नहीं है. हो सकता है कि आप भाग जाएं, लेकिन बच्चे पीछे रह जाएंगे. वो लोग इन बच्चों को कसाइयों की तरह कत्ल कर देंगे. अगर आपने खुद अपनी जान ली, तो आपका नाम इतिहास में अमर हो जाएगा. लोग कहेंगे कि उन लोगों ने अपने जीने का तरीका खुद तय किया ।”

उस दिन की तारीख 18 नवम्बर 1978 थी । जोंस ने अपने सभी अनुयायियों को मरने के लिए मजबूर किया । उन्हें एक साथ पोटेशियम सायनाॅयड जहर पिलाया गया । जिन्होंने पिया तो ठीक अन्यथा उन्हें जबरन जहर का इंजेक्शन लगाया गया । कुछ लोगों को गोली मारी गयी । उस दिन जोंस के कुल 909 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी । जोंस की एक महिला अनुयायी अपने तीन बच्चों के साथ पीपल्स टेम्पल में न रहकर जार्ज टाऊन में रहती थी । उसे भी फोन कर मरने के लिए मजबूर किया गया । उस महिला ने पहले बच्चों को जहर पिलाया । फिर खुद पिया था । इस प्रकार उस दिन 909 + 4 =913 मरे । यदि रियान और उनके साथियों को भी शामिल कर लें तो मरने वालों की संख्या 913+5= 918 हो जाती है । इन 918 लोगों में जोंस और उसकी पत्नी भी शामिल थे । जोंस के सिर में गोली लगी थी । उसने अपने किसी सुरक्षा कर्मी से वह गोली मरवायी थी । कुछ लोग सुरक्षाकर्मियों के रुप में इस कहानी को कहने के लिए बच गये थे ।

इस सामूहिक नर संहार से अमेरिका का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया । उसने अपने यहां रह रहे आचार्य रजनीश का भी विस्तर गोल करा दिया । वे वापस भारत आ गये थे । ज्ञातव्य हो कि आचार्य रजनीश अमेरिका में रजनीश पुरम् बनाकर रह रहे थे । उनके भी वहां हजारों अनुयायी थे । अगर जोंस नहीं होता तो आचार्य रजनीश की कहानी और लम्बे वक्त तक चलती । वे और ज्यादा दिन तक अमेरिका में ठहरे होते । अमेरिका से निकाले जाने का अपमान वे जज्ब नहीं कर पाए थे । उनकी भारत में असमय हीं मौत हो गयी थी