आई सी 814 के अपहरण का सच

आई सी 814 के अपहरण का सच

Posted by

Er S D Ojha
===================
आई सी 814 के अपहरण का सच ।

शशि भूषण सिंह तोमर नेपाल के भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे । वे राॅ के अधिकारी थे । उनके मातहत काम करने वाले यू बी सिंह ने उन्हें एक गोपनीय सूचना दी – “अगले कुछ दिनों में नेपाल से भारतीय हवाई जहाज का अपहरण हो सकता है “। शशि भूषण सिंह तोमर ने यू बी सिंह को खबर की सत्यता फिर से जांचने को कहा । खबर सही थी । यू बी सिंह ने खबर की सत्यता पर फिर मुहर लगा दी । अब शशि भूषण सिंह के सब्र का पैमाना छलक गया । वे यह मानने को तैयार ही नहीं थे कि नेपाल की धरती से कोई भारत विरोधी गतिविधि भी कर सकता है । उन्होंने यू बी सिंह को डांट दिया । उनसे इस तरह की अफवाह न फैलाने की सलाह दी ।

कुदरत का कहर शशि भूषण सिंह तोमर पर ही बरपा । वे काठमांडू से जिस आई सी 814 में सवार हुए थे , उसका ही अपहरण हो गया । विमान में ईंधन भरने के लिए उसे अमृतसर में लैण्ड करवाया गया । तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी उस समय किसी आधिकारिक दौरे पर भारतीय वायु सेना के विमान में थे । त्वरित तौर पर मीटिंग बुलाई गयी । मीटिंग की अध्यक्षता उस समय बाजपेयी जी के सबसे ताकतवर सेक्रेटरी एन के सिंह कर रहे थे । तय हुआ था कि ईंधन भरते समय हवाई जहाज के टायरों को पंचर कर दिया जाएगा , ताकि हवाई जहाज फिर उड़ान न भर सके । एन एस जी के कमाण्डों बुलाए गये । एन एस जी समय से नहीं पहुँच सकी । नतीजतन हवाई जहाज को जाने दिया गया । बाजपेयी जी को कोई सूचना नहीं दी गयी । उन्हें सूचना जमीन पर लैण्ड करने के बाद दी गयी । उस समय जहाज उड़ चुका था ।

आई सी 814 लाहौर , दुबई होता हुआ कांधार पहुँचा । अफगानिस्तान उस दौर में तालिबानों की गिरफ्त में था ।
उन्होंने भारत सरकार की कोई मदद नहीं की । उल्टे भारत पर दबाव बनाया कि वह इस मसले को जल्द से जल्द निपटा ले , बरना वे इस जहाज को वहां से रवाना कर देंगें । भारत सरकार को आज के जैश ए मुहम्मद सरगना को छोड़ना पड़ा । उसे छोड़ने के लिए खुद जसवंत सिंह को जाना पड़ा । आज वही मौलाना मसूद अजहर आतंक का पर्याय बना हुआ है , जो 14 फरवरी 2019 को श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर पुलवामा में हमारे 42 जवानों को मौत के घाट उतार चुका है ।

इस पूरे फसाने में कहीं भी शशिभूषण सिंह तोमर का नाम नहीं आया । जब पाकिस्तान सरकार ने उनका नाम लिया तो सबको जानकारी मिली कि उस जहाज में तोमर भी यात्रा कर रहे थे । पाकिस्तान सरकार तो एक कदम और आगे बढ़ गयी । उसने आरोप लगाया कि शशि भूषण तोमर ही आतंकवादियों को निर्देश दे रहे थे । ज्ञातव्य हो कि शशि भूषण सिंह एन के सिंह के बहनोई थे । जिस एन एस जी ने कार्रवाई करनी थी उसके तत्कालीन निदेशक भी एन के सिंह के बहनोई थे । इसलिए एन एस जी कार्रवाई नहीं कर सकी । समय रहते पहुँच न सकी और यह मामला रिश्तेदारी निभाने के चक्कर में पेचीदा हो गया था ।

इस असफल कार्रवाई में शामिल लोगों को बाद में प्रोन्नतियां भी मिलीं थीं ।

जैश ए मुहम्मद का मौलाना मसूद अजहर

बात 11 फरवरी 1994 की है । मौलाना मसूद अजहर काजीकुण्ड से एक सभा करके आ रहा था । सुरक्षा एजेंसियों की उस पर नजर पड़ी । उन्हें वह कुछ डरा डरा सहमा सहमा सहमा सा नजर आया । उसे गिरफ्तार कर लिया गया । उसे कश्मीर के एक जेल में 39 कैदियों के साथ रखा गया । मौलाना मसूद अजहर उस समय हरकत उल अंसार संगठन में था । मौलाना को छुड़ाने के लिए हरकत उल अंसार के आतंकवादियों ने जमीन आसमान एक कर दिया । इन आतंकवादियों ने भारत घूमने आए छः विदेशियों को बंधक बना लिया । इनमें से एक नार्वे का, दो अमेरिकी, एक जर्मनी और दो ब्रिटेन के थे । इनमें से नार्वे के पर्यटक का गला काट कर हत्या कर दी गयी, एक अमेरिकी पर्यटक भाग निकला और चार का आज तक कुछ भी पता नहीं चला ।

इतना होने पर सुरक्षा एजेंसियाँ हरकत में आ गयीं । उनको पता नहीं था कि उन्होंने किसे पकड़ रखा है । मौलाना मसूद अजहर की जनम पत्री खोली गयी । सुरक्षा एजेंसियाँ भौचक्की रह गयीं । जिसे वे एक मामूली आतंकवादी समझ रही थीं , वही मौलाना मौसूद अजहर एक खूंखार आतंकी निकला । आनन फानन में उसे जम्मू के जेल में शिफ्ट किया गया । यहां भी मौलाना मसूद अजहर के साथियों ने प्रयास जारी रखा । आतंकवादियों में एक दिन भयंकर लड़ाई हुई । इस का फायदा उठाकर दुर्दांत आतंकवादी भागने लगे । सुरक्षाकर्मियों ने भी मोर्चा सम्भाल लिया । सुरक्षाकर्मियों के फायर में दुर्दांत आतंकवादी सज्जाद अफगानी मारा गया । वह हरकत उल अंसार का चीफ था । इस पूरे प्रकरण का मास्टर माइंड मौलाना मसूद अजहर था ।

अब हरकत उल अंसार को लगने लगा कि मौलाना मसूद अजहर का इनकाउंटर कर दिया जाएगा । इसलिए वे जल्द से जल्द उसे छुड़ाना चाह रहे थे । अपने कैद के 20 माह पूरे होने पर मौलाना मसूद अजहर ने एक चिठ्ठी मीडिया को भेजी थी – जब अल्लाह चाहेगा तब भारत के जेल से मेरी रिहाई हो जाएगी । अल्लाह ने अब तक नहीं चाहा था । 24 दिसम्बर 1999 को आई सी 814 हवाई जहाज का अपहरण कर लिया गया । ईंधन भरवाने के लिए उसे अमृतसर उतारना पड़ा । एस पी जी अमृतसर पहुंच चुकी थी । तय हुआ था कि ईंधन भरने के बहाने हवाई जहाज के टायरों की हवा निकाल दी जाएगी ।परिणामतः यह आगे की उड़ान नहीं भर पाएगा । पर हमारे नीति नियंताओं ने उस हवाई जहाज को जाने दिया । उस जहाज को लाहौर से दुबई और फिर कांधार ले जाया गया । मजबूर हो मौलाना मसूद अजहर को हमें छोड़ना पड़ा ।

कैद से छूटने के बाद साल 2000 में मौलाना मसूद अजहर ने एक अलग आतंकवादी संगठन खड़ा किया – जैश ए मुहम्मद । इस आतंकवादी संगठन ने अक्तूबर 2001 में जे एण्ड के विधान सभा पर आक्रमण किया ।38 लोग मारे गये । दिसम्बर 2001 में उसने पार्लियामेंट पर भी हमला करवाया । 8 लोग मारे गये । उसने पाकिस्तान में भी कई जगह धमाके करवाए । बाद में उसकी पाकिस्तान सरकार से एक अलिखित समझौता हुआ था । जिसमें दोनों को एक दूसरे के काम में अड़॔गा न डालने की बात कही गयी थी ।

25 दिसम्बर 2015 को हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी पाकिस्तान के नवाज शरीफ के पास बगैर किसी सूचना के पहुँच गये थे । यह बात मौलाना मसूद अजहर को बहुत बुरी लगी । उसके 7 दिन बाद ही उसने पठान कोट एयर बेस पर हमला कर दिया । उसने 2016 में उड़ी हमला किया । अब उसने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा कांड कर दिया है । अभी और कितने कांड मौलाना मसूद अजहर के हाथ से होने हैं ? पता नहीं । हम कितने दिनों तक इस मौलाना मसूद को छोड़ने का दंश अभी और झेलते रहेंगे ।