अभी तक दुनिया भर का मीडिया दो ईसाईयों को आतंकवादी घोषित नहीं कर पाई है…❗

अभी तक दुनिया भर का मीडिया दो ईसाईयों को आतंकवादी घोषित नहीं कर पाई है…❗

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मस्जिद में हमला करने आए ईसाई हमलावरों ने फेसबुक पर लाइव आकर आतंकवादी घटना को अंजाम दिया और खुद को ट्रंप से प्रेरित बताया घृणा और नफ़रत की आँग में जल रहे दो ईसाई हमलावरों द्वारा न्यूज़ीलैंड की मस्ज़िद में घुसकर अचानक स्वचालित हथियारों से ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जाती है और लगभग जुमा अदा करने की तैयारी कर रहे 30 से अधिक नमाज़ी शहीद हो जाते हैं अब देखना यह है कि हर बार की तरह अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमलावरों का धर्म देखकर उन्हें अर्धविक्षिप्त अथवा मानसिक रूप से अस्वस्थ बताता है या फ़िर संपूर्ण मानवता को कलंकित करने वाले इसाई दहशतगर्दों को आतंकी बताता है..‼️
अल्लाह आतंकी घटना की भेंट चढ़ चुके नमाज़ियों को जन्नतुल फिरदौस में आअला दर्जा मकाम अता फरमाए और उनके घर वालों को सब्र करने की हिम्मत व ताकत अता फरमाए…❗

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جنيد الله خان
इस व्यक्ति को न्यूजीलैण्ड के गोलीकांड में गोली लगी है, और यह एक उंगली सीधी करके शहादा पढ रहा है
ला इलाहाइलल्लाह
मुहममदुर रसूलुल्लाह
यह है इस्लाम

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Sikander Kaymkhani

जब गुजरात की बागडोर जब इनके हाथों में थी तब सरकारी-तंत्र का दुरुपयोग कर इन्होंने एक-एक कर उन सारे अपराधियों को बचाया था जो लूट-मार से लेकर हत्या तक के मामलों के अपराधी थे। बात इस हद तक गई कि आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय को कहना पड़ा कि इनके कारण यह संभव ही नहीं रहा है कि गुजरात में किसी अपराध की निष्पक्ष जांच हो सके। इसलिए यहां के मामलों की सुनवाई गुजरात से बाहर

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Saleem Baig – RTI Activist & Researcher
अल्पसंखयक हिस्सेदारी आंदोलन

एक ख़त पैग़ाम के रूप में
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१- आज का सियासी हाल और मुस्लिम हिस्सेदारी ?
२- मुस्लिम हिस्सेदारी के कम होने से मुसलमानो के नुकसान ?
३- मुसलमानो के सिक्योरिटी, एजुकेशन एरिया, डेवलोपमेन्ट और
मज़हबी मामलों में हस्तक्षेप ?
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पिछले पाँच सालों में हिंसा का बढ़ना और तमाम राजनितिक दलों का उसपर चुप बैठ जाना , यह साबित करता है कि तमाम दलों को मुसलमानो का सिर्फ़ वोट चाहिये उनकी परेशानियों से उन्हें कोई लेनादेना नहीं है, अबतक मुसलमानो को राइट विंग पार्टीज़ और राइट विंग नॉन स्टेट एक्टर का डर दिखा कर वोट लेलेते है, लेकिन वोट लेने के बाद न तो उस राइट विंग पार्टीज़ या एक्टर के खिलाफ़ कोई कार्यवाही करते हैं और न ही मज़लूम मुसलमानो के साथ खड़े होते हैं हद तो ये हो गई हैं कि कोई भी पार्टी या उनका नेता आज अपने आप को मुस्लिम समर्थक कहलाने से भी घबराते हैं।

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Sikander Kaymkhani

यदि यही सरकार वापस लौटती है तो बड़ी पूंजी, बड़े कॉरपोरेट, बड़े निवेश, बड़े बाजार, बड़े घोटाले सब मिल कर हमें लूट लेंगे और झूठे आंकड़ों का जाल बिछा कर यह सरकार हमें छलती रहेगी। व्यक्ति हो या पार्टी, यदि झूठी व नकली हो तो वह जुमलेबाजी का सहारा लेती है, क्योंकि उसके पास कहने या करने को सच्चा या आस्थावान दूसरा कुछ होता नहीं है। यह सरकार जबसे आई है जुमलेबाजी की फसल ही काटती रही है, जिससे आज सारे देश में झूठ और नक्कालों की बन आई है। कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र ऐसी सरकार कैसे बर्दाश्त कर सकता है?

सायरा खातून न्यूज़ीलैंड मे 2 मस्जिदों पर आतंकी हमला करने वाले आतंकवादी “गोरे” थे इसलिए पूरी दुनिया की मीडिया मे खामोशी है, अगर यही आतंकी हमला होने के बाद किसी मुस्लिम का नाम आता तो उस आतंकी हमले की आड़ मे पूरी “मुस्लिम समुदाय” को कठघड़े मे खड़ा किया जाता।

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अंतर्राष्ट्रीय मीडिया भी कम नही है

Muhammad Shaheen

अगर किसी मुसलमान को सिर्फ उसके ईमान की वजह से यानी मुसलमान होने की वजह से कत्ल कर दिया जाए तो वह मकतूल बिला शुबहा शहीद है इस पर उम्मत का इजमा है। न्यूजीलैंड के तीस शहीद मुसलमानों के खून का बदला लेने के लिए अगर उनके वारिसैन हथियार उठा लें तो सहयूनी मीडिया दहशतगर्दी का ठप्पा लगाने में ज़रा देर नहीं करेगा।
सवाल ये है कि न्यूजीलैंड की मस्जिद पर आतंकवादी हमला करने वाले टैररिस्ट को प्रेरणा कहां से मिली..?
हम मुसलमान हैं दुनिया के हर धर्म की पुस्तकों का सम्मान करते हैं इसलिए बाइबिल को हरगिज़ ज़िम्मेदार नहीं ठहरायेंगे लेकिन हज़रत ईसा अलै0 को सूली देकर ज़िल्लत की मौत देने वाले (ईसाइयों के मुताबिक) यहूदी रब्बियों की औलादों के कदमों में सर रखकर सजदानशीन वेटिकन पोप को इसका जवाब देना होगा। न्यूजीलैंड के आतंकवादी के धर्म के कारण पूरी ईसाइयत आतंकवादी क्यों नहीं है..?