अडवानी जैसे निम्नतम दर्जे के लोगों के लिए इस्लाम का तोहफ़ा

अडवानी जैसे निम्नतम दर्जे के लोगों के लिए इस्लाम का तोहफ़ा

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Mohd Sharif

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अल्लाह ने पूरी सृष्टि में सबसे अच्छा इंसान को बनाया है और इसके साथ ही उसमें निम्नतम दर्जे के गुण भी डाल दिये ताकि यदि वह अपने लिए बुराई के रास्ते का चुनाव करके जहन्नुम की तरफ़ क़दम बढ़ाना चाहे तो बढ़ा सके और यही उसकी परीक्षा है कि वह कौन सा रास्ता अपनाता है? इस बात को अल्लाह ने निम्नलिखित तरह से फ़रमाया है।

क़ुरआन पाक की 95 वीं सूरह की चौथी व पांचवीं व छठी आयतों में फ़रमाया गया है, अनुवाद, “हमने इंसान को बेहतरीन साख़्त पर पैदा किया, फिर उसे उल्टा फेर कर हमने सब नीचों से नीच कर दिया, अलावा उन लोगों के जो ईमान लाए और नेक अमल करते रहे कि उन लोगों के लिये कभी ख़त्म न होने वाला अजर है।”

मुसलमानों को आमतौर से यह शिक्षा दी जाती है कि किसी शख़्स के ग़लती करने पर जब उसको टोका जाए तो सुबहानअल्लाह कह कर बात करें जिसका अर्थ है कि हर ग़लती से पाक तो केवल अल्लाह ही है अर्थात अल्लाह ही से ग़लती नहीं हो सकती बाक़ी हर इंसान ग़लती कर सकता है लिहाज़ा बेहतर यह होता है कि ग़लती हो जाने के बाद मायूस होने के बजाय अल्लाह से तौबाह करते हुए उस ग़लती को दोबारा न करने का निश्चय कर ले।

अक्सर कुछ लोग अल्लाह के कामों में दूसरों को शरीक करके गुनाहगार बनते हैं या कुछ लोग अल्लाह के वजूद से ही इंकार कर देते हैं। इनमें कुछ गुनाहगार एक क़दम और आगे बढ़ कर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देकर दूसरे सम्प्रदाय के लोगों पर अपनी आस्थाओं को थोपते हैं और उनके धर्मस्थलों को हानि पहुंचाते हैं। इसके उदाहरण के रूप में लालकृष्ण अडवानी जैसे अनेक लोग हमारे सामने मौजूद हैं जिनमें अडवानी की बात करें तो इस शख़्स ने रथयात्रा आदि के ज़रीये साम्प्रदायिकता को चरम सीमा तक पहुंचाया था और कायरता का परिचय देते हुए मस्जिद गिरवा कर ख़ुद की एक योद्धा के रूप में पहचान चाही थी लेकिन नैतिक पतन की इस दौड़ में अनेक निम्न दर्जे के लोग आगे निकल गए और इस शख़्स को बुढ़ापे में अपने ही कायरवीरों द्वारा ज़लील होना पड़ा और इस वक़्त खुजली वाले कुत्ते के मानिंद राजनीति से धुत्कार दिया गया है।

यह तो था प्रवित्र क़ुरआन की उपरोक्त आयतों के अनुसार नीचता वाले गुण को अपनाने का नतीजा। क़ुरआन चूंकि जीवन में आने वाली हर अड़चन को दूर करने और हर तरह के हालात का मुक़ाबला करने की राह दिखाने में सक्षम है लिहाज़ा जीवन की नाकामियों से मायूस होने के बजाय क़ुरआन की शिक्षाओं पर अमल से ही इस बुज़ुर्ग नेता को सहारा मिल सकता है और यही तरीक़ा कामयाबी के शिखर तक पहुंचा सकता है।

कुरआन पाक की सूरह अनफ़ाल की 38 वीं आयत में फ़रमाया गया है, अनुवाद, “ऐ नबी (स अ व) इन काफ़िरों से कह दो कि अगर अब भी बाज़ आ जाएं तो इनके सारे गुनाह, जो पहले हो चुके हैं, सब माफ़ कर दिये जाएंगे और अगर अपनी वही आदत रखेंगे तो पिछली क़ौमों के साथ जो कुछ हो चुका है वह सबको मालूम है।”

इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि अडवानी जी इस्लाम धर्म अपना कर अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलते हुए अपना शेष जीवन गुज़ारने का निश्चय कर लें तो अल्लाह तआला उनके पिछले सारे गुनाहों को माफ़ कर देगा। इस आयत में अल्लाह ने ऐसा ही वादा किया है।

यह है वह चाबी जिससे अडवानी की मायूसी का ताला भी खुल जाएगा और पतन के बाद उन्नति की ऊंचाइयों पर पहुंचने की राह मिलेगी।

एक हदीस में नबी स अ व का इरशाद है कि, “जिसने इस्लाम क़ुबूल करके नेकी का रास्ता अपना लिया, उससे उसके उन गुनाहों की पूछताछ न होगी जो उसने जाहलियत में किये होंगे और जिसने इस्लाम लाकर भी बुराई न छोड़ी उससे अगले पिछले सब कर्मों का हिसाब होगा।”
इस प्रकार यदि कुफ़्र में मुबतिला लोगों को इस्लाम अपना कर अपने पिछले गुनाहों की जवाबदेही से निजात मिलती है तो ऐसे लोगों के लिए यह अल्लाह की तरफ़ एक तोहफ़ा है

 

Disclaimer : लेखक के निजी विचार हैं, लेख सोशल मीडिया में वायरल है, तीसरी जंग हिंदी का कोई सरोकार नहीं है|