नगीं तलवार, देशी कट्टा, धार्मिक उन्माद के नारे : प्रशासन, पुलिस, पर्यवेक्षक ख़ामोश!

नगीं तलवार, देशी कट्टा, धार्मिक उन्माद के नारे : प्रशासन, पुलिस, पर्यवेक्षक ख़ामोश!

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देर हो गयी,,,हम उसके फंदे को पहंचान नहीं पाये, देखो दरख़्त नीचे से ख़राब हो जाये न तो ऊपर से ख़राब हो जाता है,,,मुआशरा ‘समाज’ उल्टा दरख़्त है ऊपर से ख़राब होता है,,,पांच सालों में जो देखने को मिला है वो दरख़्त की जड़ों में लगे ‘दीमक/घुन’ की मुसलसल मेहनत का फल/नतीजा था, ये दीमक जब लगी थी तब भी उनको पता था, जब इसने दरख़्त की जड़ों को काटना शुरू किया तब भी उन्हें पता था, जब दीमक ने दरख़्त को खोखला कर दिया तब भी उनको पता था,,,अब दीमक ने ‘जईयाद सेक्युलरिज़्म’ के दरख़्त को पूरा चाट डाला है और ये खोखला दरख़्त ‘गिरने’ के इन्तिज़ार में कुछ उम्मीदों के साथ खड़ा है,,,सियासत में कोई किसी का सगा नहीं होता है, बाप बेटे का और बेटा बाप का नहीं होता,,,हर पार्टी अपने नफा नुक्सान को देख कर काम करती है, इस 70 साल के आरसे में यहाँ जो कुछ भी होता रहा है वो सीधे सीधे मुस्लिम समाज के नाम पर हुआ है, बटवारे के पहले अंग्रेज़ों ने आरएसएस को नेता जी सुभाष च्नद्र बोस की ‘आज़ाद हिन्द’ फौज की जासूसी करने के लिए बनाया था, इसीलिए आरएसएस का ड्रेस ख़ाकी कमीज़ और ख़ाकी हॉफ पैंट रखा गया था, सर की टोपी सफ़ेद थी, ये गिरोह था जो समाज सेवा करता था, लोगों में अपनी पहुँच बनता था, जो डर अंग्रेज़ पुलिस का भारतीय लोगों के दिलों में था उसकी वजह से वो खाकी देखते ही जंगलों में भाग जाते थे,,,आरएसएस इन गॉंव के लोगों में भारतीय बन कर पहुँचता, उनके साथ घुलमिल जाता और ‘अन्दर’ की बात ‘साहब’ लोगों तक पहुँचता था,,,भारत के बटवारे के समय से ही आरएसएस ने मुस्लिम समाज को अपने ‘टारगेट’ पर रखा, आरएसएस को सरकारों ने कभी समझाने/रोकने का काम नहीं किया था, गाँधी जी की हत्या के पीछे का सत्य बहुत भयानक है, गाँधी जी की हत्या हो या देश में दंगे, दंगों में एकतरफा नरशंहार, होते रहे मगर सरकारों ने आरएसएस पर हाथ नहीं डाला, आरएसएस को बटवारे के समय ही देश की सत्ता अपने ‘यहूदी नस्ल’ के ब्राह्मणों के हाथ में चाहिए थी, जब ये न हो सका तो उसने सरकारों में अपनी गहरी जड़ें जमा लीं, सरकारी नौकरियां हों या कारोबार, हर जगह इन्होने खुद के लोगों को ‘बैठा’ दिया, भारत के अंदर रिश्वत का जो चलन है वो इनकी ही दैन है,,,,

अब वक़्त खराब आने वाला है, ऐसा मुझे लगता है, भारत में किसी का किसी से कोई झगड़ा, टकराव, मतभेद नहीं है, जो टकराव है वो मुसलमानों के साथ है, उन का जो सरकार में हैं, जो सरकारें हैं, जैन, पारसी, बुद्ध, सिख मज़हब के लोगों को हिन्दुत्वादी अपने मत का मानते हैं, क्यूंकि इनसे कट्टरपंथियों को शिकायत नहीं है, दलित, वनवासी, आदिवासी लोगों को संघ अपने मत का मान कर/बता कर चलता है,,,

अभी एक मुद्दा नागरिकता का चल रहा है, कट्टरपंथियों का साफ़ कहना है कि भारत में ‘सिख, हिन्दू, पारसी, जैन, बुद्ध धर्म के लोगों को जो कहीं से यहाँ आएंगे भारत की नागरिकता दी जाएगी, और यहाँ से निकाला जायेगा ‘मुसलमानों’ को जो किसी और देश से यहाँ आये हैं

मुश्किल कहाँ से शुरू होती है वो है दलित समाज का अपने स्टेटस को तै न कर पाना, दलित खुद को हिन्दू नहीं मानते हैं, बड़ी संख्या में हिन्दू खुद को हिन्दुत्वादी नहीं मानते हैं, इन लोगों का जो खुद को ‘हिंदूवादियों’ से अलग कहते हैं, मुसलमानों के मसले पर खामोश हो जाना या मुसलामनों के खिलाफ हो जानने से हिन्दुत्वादियों के एजेंडे को ताक़त मिलती है, अभी तक कट्टरपंथी तत्व अपनी लड़ाई/योजना दूसरों को मोहरा बना कर, उन्हें आगे खड़ा कर के लड़ते आ रहे हैं, कट्टरपंथियों की तादाद देश में बहुत अधिक नहीं है, अंग्रेज़ों की संख्या भी कभी भी भारत में 50 हज़ार से अधिक नहीं रही थी, मगर उनका राज पूरे देश पर चलता था, उस अंग्रेजी राज को भारत के ही लोग चलाते/चलवाते थे, आरएसएस के कट्टरपंथियों का तरीका भी अंग्रेज़ों वाला है, इनकी संख्या देश में बहुत ज़यादा नहीं है मगर व्यवस्था पर इस का कब्ज़ा है, व्यवस्था को चलाने के लिए ये दलित, आदिवासी, वनवासी, सिख, जैन, पारसी सभी को अपने साथ मिला लेता है,,,

यहाँ ज़िम्मेदारी अब देश के बाकी धर्मों, वर्गों, समाजों के ऊपर है कि वो देश को चाट चुकी दीमक से बचाते हैं या इस ‘जईयाद सेक्युलरिज़्म’ के दरख़्त को गिराने में आरएसएस के साथ रहेंगे,,,,परवेज़ ख़ान

ब्राह्मण – DM बनेगा
ठाकुर – DGP बनेगा
गौतम – IAS बनेगा
पाशी – IPS बनेगा
लोहार – SDM बनेगा
यादव – दारोगा बनेगा
मौर्या – तहसीलदार बनेगा

अब आ जाओ उर्दू नाम वालों पर

दिलशान – दरी बिछायेगा
इल्यास – कुर्सी लगायेगा
इकराम – माइक सेट करेगा
बिलाल – नारे लागयेगा
आगाज़ – पोलिंग बूथ देखेगा
शम्स -….

बेबाक पत्रकार

@VoiceofmyBharat

बीजेपी के #LokSabhaElections2019 के संकल्प पत्र में शिक्षा का कोई उल्लेख नहीं,

#साहेब के हिसाब से अनपढ़ रहेगा इण्डिया तभी तो अंधभक्त बनेगा इण्डिया 👍

Gabbar 🐯

@Gabbar0099

2 फीट की नगीं तलवार, देशी कट्टा,धार्मिक उन्माद के वीभत्स नारे, 3 घण्टे मेन रोड पर नंगा नाच,
प्रशासन, पुलिस, पर्यवेक्षक खामोश!
शहर मे चर्चा है कि क्या मधेपुरा मे भयमुक्त और शांतिपूर्ण मतदान हो पायेगा?

एक विशेष बात- इन तस्वीरों में अधिकतर दलित, पिछड़े समाज के भटके हुए युवा हैं !