मुसलमानों से कई ग़लतियाँ हुई हैं : : ये इब्लीस/रावण/शैतान का राज है : वीडियो

मुसलमानों से कई ग़लतियाँ हुई हैं : : ये इब्लीस/रावण/शैतान का राज है : वीडियो

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जिसको न दे मौला उसको दे आसिफुद्दौला,,,नवाब आसिफुद्दौला लखनऊ अपनी सख़ावट के लिए मशहूर रहे, जो भी उनके पास किसी दरख़ास्त/ज़रूरत को लेकर आया वो कभी ख़ाली हाथ नहीं गया,,,इतिहास में अलाहउद्दीन ख़िलजी के इन्साफ के उदाहरण दिए जाते हैं, कुतबुद्दीन ऐवक, बलवान की हुकूमतों में इंसानी किरदार की बुलंदियां देखने को मिलती हैं, अल्तमश के कितने ही किस्से तारीख़ की किताबों में मिल जायेंगे और भारत में जिन कुछ मुस्लिम बादशाहों को बहुत बुरा कहने की कोशिशें की जाती रही हैं जैसे महमूद ग़ज़नवी, शहाबुद्दीन मुहम्मद ग़ौरी, जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर, आलमगीर औरंगज़ेब, ये बादशाह अपने किरदारों से ही महान नहीं थे, ये हकीकत में महान थे, इनकी ग्रेटनेस को हज़म न कर पाने की वजह से इनके विरोधियों ने अंदर ही अंदर अहसास कमतरी का शिकार होने की वजह से रुसवाह करने के लिए अनेक किस्से कहानियां बना डालीं, दस रुपय में पांच किताब, चूरन की पुड़िया, चार डाट पैन के साथ झूठी कहानियों को जनता में फैलाया गया, असल में तो मुसलामनों ने कभी किसी भी समय में या किसी भी देश के अंदर अपनी जनता के साथ नाइंसाफी से काम नहीं लिया, इस्लाम मज़हब रूल ऑफ़ लॉ ‘क़ानून” को बहुत अहमियत देता है, इसी वजह से राजा और ग़ुलाम एक ही सफ में खड़े हो जाते हैं, एक बर्तन में खाते हैं, एक प्याले में पीते हैं

इंसान खुद को सबसे आला/उत्तम समझता है, वो खुद को सबसे काबिल समझता है, वो खुद को बड़ा ताक़तवर समझता है,,मगर देखा है कभी समंदर में मछलियों को कौन रास्ता बता है,,,आसमान में उड़ने वाले पंक्षियों को कौन सिम्त/रास्ता बताता है,,,सैंकड़ों परिंदे एक साथ उड़ते हैं, बिजली की सी रफ़्तार से शाम को अपने घोंसलों की तरफ लौटते हैं, फिर भी कोई भटकता नहीं है, कोई किसी से टकराता नहीं है

कुदरत ने जो कुछ भी इस जहान में बनाया है मुकम्मल नाप/अंदाज़े से बनाया है, अगर कोई भी चीज़ जहाँ है वहां से ज़रा सा भी इधर उधर कर दी जाये तो,,,मान लीजिये हमारी दो आँखें हैं, इनमे से एक को अगर ‘सूत’ भर किसी भी तरफ सरका दें तो, या कान को इधर उधर ज़रा सा भी कर दें तो, या पांच की जगह चार या छः उँगलियाँ हों तो,,,तो मीज़ान/नाप बिगड़ जायेगी और सारी खूबसूरती जाती रहेगी

इंसान फ़ितरी तौर पर घमंडी, बदमिजाज़ होता है, जिहालत उसके अंदर भरी होती है, वो अपनी हर चीज़ को बाकी से अच्छा/महान मानता है

मुसलमानों से कई ग़लतियाँ हुई हैं

1 – इस्लाम की तारीख, अल्लाह के रसूल मुहम्मद (सल्ल.अलैह वसल्लम) की 63 साल की जिंदिगी है

2 – मुसलमानों की तारीख़, रसूल अल्लाह के पर्दा कर लेने के बाद से ख़िलाफ़त के अंत तक है समय माना जाना चाहिए

3 – जब मुस्लमान दीन की तब्लीग़ या दावत देते हैं, जैसे कि इस्लाम मज़हब में शराब पीना मना है, ये गुनाह है, इस्लाम मज़हब में झूठ बोलना मना है, ये गुनाह है,,,जैसी बातें दूसरों को बता रहे होते हैं तभी एक ग़लती आमतौर पर कर बैठते हैं, कि उसके मज़हब में शराब पीने पर रोक नहीं है, वो तो झूठ बोलते हैं,,,उनका मज़हब बुराई को करने से नहीं रोकता है,,,बस यहाँ से गड़बड़ होती है,,,हमें सिर्फ और सिर्फ इस्लाम मज़हब पर रहना चाहिए, कौन क्या करता है, कर रहा है की बात नहीं होना चाहिए थी,,,इस तरह से दीन का पैग़ाम/सन्देश दूर तक पहुँचता, टकराव नहीं होते

इस्लाम की तारीख और मुसलमानों की तारीख दोनों अलग अलग हैं, अलग अलग ही रखना चाहिए था, इस्लाम की तारीख में तकलीफें हैं, जिहाद है, फ़तेह मक्का है, सुलह हुदैबिया है, हिजरत है,,,ये ‘पीरियड’ दुनियां के सबसे बड़े आंदोलन का है, जब सदियों से चली आ रही बुरी रस्में टूटी, लोगों में चली आ रही दुश्मनी न रहीं, जब औरत को बराबरी का हक़ मिलता है, जब ज़कात के ज़रिए ‘टैक्सेशन’ का निज़ाम शुरू होता है, जब समाजी बराबरी, कानून का राज, इंसानियत की भलाई का राजनैतिक ढांचा ‘सियासी निज़ाम’ लागू किया जाता है, जब दुश्मनों से उनके ज़ुल्म/जुर्मों के लिए बदला नहीं लिया गया बल्कि सभी को आम माफ़ी दे दी गयी, जब आदेश दिया गया कि ग़ैर मुस्लिमों के हर तरह के अधिकारों को बरक़रार रखा जायेगा, वो आज़ाद हैं, जैसे चाहें रहे, जैसे चाहिएं अपनी इबादत करें, उनकी इबादतगाहों को कोई नुक्सान नहीं पहुँचाया जायेगा,,,ये जो ‘मदनी’ रियासत का मॉडल है वो इस्लाम की ‘तारीख़’ का असल जुज़ है,,,फलाही रियासत का क़ायम अल्लाह के रसूल का मक़सद था, जो उन्होंने क़ायम कर दुनियांभर को रास्ता दिखाया,,,,

हर इंसान सिर्फ और सिर्फ सच बोलने और ईमानदार रहने का पक्का अहद कर ले तो जो भी अपराध, बुराईयां, खराबियाँ, हम अपने समाज, अपने अंदर पाते हैं नज़र नहीं आएँगी, सच बोलना मुश्किल नहीं है, सच बोलने के लिए अलग से दिल नहीं चाहिए, सच बोलने के लिए ज़बान भी और नहीं चाहिए, बस ”दीन” की ज़रूरत होगी, दीन आने पर ही ‘इन्साफ’ ‘क़ानून’ का राज आ पाता है, और जब इन्साफ का राज होता है तो वो होती है ‘इंसानों’ की हुकूमत, आज़ाद लोगों की सेक्युलर, लिबरल, सोशलिस्ट हुकूमत जिसका मॉडल रसूल अल्लाह (सल्ल.अलैह वसल्लम) ने ‘मदनी’ रियासत क़ायम कर दिया था

दीन क्या है ये जानना भी ज़रूरी है

जब कुछ न था, तू था
जब कुछ न होगा, तू होगा

 

ये है दीन,,,,एक अल्लाह है और कोई नहीं, वोही अल्लाह इबादत के लायक़ है, और कोई नहीं, वो अल्लाह है जो बनता है, मिटाता है, अल्लाह, वो अल्लाह है जो हर इंसान से हिसाब लेगा, जन्नत और जहन्नुम उसने बनाये हैं, दरिया, समंदर, पहाड़, परिंदे, फूल, खुश्बू, हुस्न, बीनाई, सुर और सूर, चाँद, तारे, सूरज, सितारे, कहकशायें, महल, बाग़, दिलकश नज़ारे,,,,अल्लाह के बनाये हुए हैं,,,वोही सबका मालिक है, वोही तो है जिसकी बादशाही हमेशा की है,,,, जब कहीं पे कुछ भी नहीं था,,,वोही था,,,वोही था,,,,वोही है,,,वोही है,,,वोही और कोई नहीं,,,रसूल अल्लाह मुहम्मद मुस्तफ़ा अल्लाह के रसूल हैं,,,ला इला हा इल्लल्लाह मुहम्मद रसूल अल्लाह,,,,याद रखें ‘कुफ़्र का निज़ाम चल सकता है मगर ज़ुल्म का नहीं,,,इन्साफ/अदल ‘रूल ऑफ़ लॉ’ कायम करने के लिए लोगों को हमेशा कोशिश करते रहना चाहिए, झूठ, फरेब, मक्कारी, बदकारी, धोखे से अगर कभी कोई हुकूमत पा लेता है तो उस देश की जनता के लिए बुरा, बहुत बुरा साबित होता है,,,,जब किसी मुल्क का बादशाह बुरा होता है तो वहां तरह तरह की समस्यें पैदा हो जाती हैं, सबसे बुरा ये होता है कि ‘आदमी आदमी’ के खून का प्यासा हो जाते हैं,,,ये इब्लीस/रावण/शैतान का राज होता है,,,,परवेज़ ख़ान

 

Aashish Yadav

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@aashishsy
ईवीएम पर फिर उठे गम्भीर सवाल! लोकसभा चुनाव के बीच फिर उजागर गड़बड़ी की जा सकती हैं मशीन में। इन सुलगते सवालों के बीच हो रहे मतदान में विश्वास, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर संशय लोकतंत्र में सबसे बड़ा आतंक हैं।

michaeltferns

Goa Protectors :- Forwarded as Received, in Public Interest !!! *We the people of India request the Honourable SUPREME COURT OF INDIA to watch the video whereby it clearly demonstrate that the EVM machine used in India now(2019)can be manupulated and hacked. We request you to take a relook into the hotly debated dispute and pronounce your order to abolish the EVM* Jai Hind.
Michael Ferns Goa.

GoNews

@GoNews24x7

Congress Delegation Complains To EC | Congress delegation meets the Election Commission and complains against the use of government machinery by the BJP and inappropriate speeches by its leaders, among other issues. @Ajay_reporter reports

Ghanshyam Tiwari

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@ghanshyamtiwari

सोचा न था ..
टीवी डिबेट और राजनीतिक भाषणों का
एक ऐसा भी दौर आएगा
जो मान मर्यादा को सरेआम खा जाएगा
भाषा के हर लिहाज़ को मिटा जाएगा..
अपशब्दों को कचरे के ढेर की तरह ..
हर तरफ़ बेवजह बिखरा जाएगा ..
सोचा न था..
ऐसा भी कोई दौर आएगा !

Haji Suhail Ahmed

लाज़िम है कि हम भी देख़ेंगे..
वो दिन के जिस का वादा है जो लोह-ऐ-अज़ल में लिखा है…
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां रूई की तरह उड जायेंगे..
हम महकूमों के पांव तले ये धरती धड-धड़ धङकेगी…
और अहल-ऐ-हकम के सर ऊपर जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी ….!!!
इल्म हासिल करो..संघर्ष करो.. मुत्तहिद रहो…
इल्म नूर है। इल्म से ही दुनिया है और इल्म ही से दीन। इल्म के बगैर ना दीन मुकम्मल है और ही दुनिया। नबी-ऐ-पाक (सल्ल.अलैह वसल्लम) की सुन्नतों पर अमल करो ..!!

Abhishek Bhalla

@AbhishekBhalla7

This clearly shows two parachutes. One in Sans Kot area and other in Tandar across LoC. One pilot was Wing Commander Abhinandan, who is the other. Pak silent on identity after claiming they have 2 Indian pilots in their custody and the other one was in military hospital