देश की सेना का सहयोग, अमरीका की दुष्ट कार्यवाही के बाद सुन्दर क़दम था : सैयद अली ख़ामेनेई

देश की सेना का सहयोग, अमरीका की दुष्ट कार्यवाही के बाद सुन्दर क़दम था : सैयद अली ख़ामेनेई

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इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने ईरान की सशस्त्र सेना के बीच दिन प्रतिदिन बढ़ती एकता को दुश्मनों के क्रोध का कारण बताया और कहा कि सेना और आईआरजीसी के बीच मित्रता और आपसी सहयोग, अमरीकियों की दुष्ट कार्यवाहियों के बाद सुन्दर क़दम था।

बुधवार को देश की सशस्त्र सेना के सुप्रिम कमान्डर वरिष्ठ नेता से थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कमान्डरों ने मुलाक़ात की। इस अवसर पर इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने वर्तमान समय में देश की सेना को हमेशा से अधिक उपयोगी और सभ्य बताया और बाढ़ पीड़ितों की सहायता में सशस्त्र सेना के जवानों की प्रभावी और निर्णायक उपस्थिति की सराहना की और कहा कि हर वह काम जिससे दुश्मन क्रोधित हों, वह अच्छा और सही है और इसी के साथ सभी को हर उस काम से बचना चाहिए जिससे दुश्मनों का मनोबल मज़बूत हो या उसे दुस्साहसी बना दे।

वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध अमरीकियों के निराधार बयानों का लक्ष्य, जनता के मनोबल को गिराना बताया और कहा कि अमरीका हज़ार अरब का ऋणि और अनेक समस्याओं से जूझ रहा है और कैरोलीना जैसे क्षेत्रों में बाढ़ और तूफ़ान के कई साल गुज़रने के बावजूद अब तक वहां की समस्याओं को हल नहीं कर सके और उसकी भरपाई नहीं कर पाए किन्तु ईरानी राष्ट्र के मनोबल को गिराने बकवास करते रहते हैं।

वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार सेना और सशस्त्र सेना की क्षेत्रीय उपस्थिति और दुश्मनों के षड्यंत्रों से उनके मुक़ाबले की ओर संकेत करते हुए यह सवाल पूछा कि यदि दाइश से संघर्ष में सेना और आईआरजीसी के जवान शामिल नहीं होते तो आज हमारे पड़ोसी देशों और क्षेत्र का क्या हाल होता, वहां पर शासन किसका होता?

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने कहा कि समस्या से जूझ रहे हर देश ने इससे मुक़ाबले के लिए आवश्यक कार्यवाहियां कीं किन्तु ईरान की सशस्त्र सेना की भूमिका की अनदेखी नहीं की जा सकती और आज सशस्त्र सेना की विभूतियां, ईरानी राष्ट्र के अतिरिक्त अन्य देशों को शामिल किए हुए हैं।