सेक्युलर मुसलामन, बेगूसराय सीट पर फंस गए है

सेक्युलर मुसलामन, बेगूसराय सीट पर फंस गए है

Posted by

Joher Siddiqui

सेक्युलर मुसलामन, बेगूसराय सीट पर फंस गए है, दोनों तरफ की पोस्ट को लाइक करना पड़ रहा है।

जबकि ज़मीन पर समीकरण बदल रहा है, तनवीर साहब 10 दिन पहले जहां नजर भी नहीं आ रहे थे, आज जगह जगह दिखाई दे रहे हैं, वहां के मुसलमान तो कन्हैया के साथ है, लेकिन साथ में तनवीर साहब का विरोध नहीं कर रहे है, उन्हें अब लालू यादव की याद भी आने लगी है

अजीब कस्मोकश का हाल है, हिन्दू ओबीसी, एसटी, एससी जहां बड़ी तादात में तनवीर साहब के साथ है, वहीं भूमिहार, पूरे मुसलमान पसमांदा सहित कन्हैया के साथ खड़े हैं।

समझिए तो सर घूमने लगता है, मुसलमान और स्वर्ण, धर्म से हिन्दू कन्हैया को जीतना चाहते हैं, वहीं बहुसंख्य हिन्दू, मजहब से मुसलमान तनवीर साहब को जीतने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं, और हां, बेगूसराय में संघी अलग ही जात बन गए हैं जो सिर्फ गिरिराज सिंह को जीतने के ख्वाब देख रहे हैं।

लेकिन मुझे अब बेगूसराय की सीट संघियों के ख्वाब को सच करती दिखाई दे रही है। आधे भूमिहार और पूरे मुसलमान, साथ में कुछ ओबीसी, एसटी, एससी मिल कर कन्हैया की नैया पार नहीं लगा सकते हैं, ठीक यही समीकरण तनवीर साहब के साथ भी है, थोड़े से मुसलमान, ज़्यादा ओबीसी, एसटी, एससी मिल कर तनवीर साहब की भी नैया पार नहीं लगा सकते हैं। लेकिन गिरिराज का वोट बैंक पक्का है, तनवीर साहब और कन्हैया एक दूसरे का पुरजोर वोट काट रहे हैं, जबकि गिरिराज सिंह का वोट एकदम अडिग है।

वहीं सोशल मीडिया पर आम फेसबुकिए का बेगूसराय सीट पर, तनवीर साहब और कन्हैया पर विरोध भी नहीं है और समर्थन भी नहीं है, या यूं कहिए कि विरोध भी है, और समर्थन भी है, सच में गज़ब की सीट बन गई है बेगूसराय, एकदम क्रांतिकारी और धर्मनरपेक्ष।।