उन उपाधियों का प्रयोग न करें, जो आपकी आजीविका का आधार नहीं है

उन उपाधियों का प्रयोग न करें, जो आपकी आजीविका का आधार नहीं है

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जातिवाद हो या पार्टीवाद, दोनों ही सबसे गंभीर समस्या हैं इस देश के लिए | इस समस्या का मुख्य कारण है उपाधियों का दुरुपयोग |

उदारहण के लिए ‘चौकीदार’ शब्द को ही लेते हैं | चौकीदार उन्हें कहा जाता है, जो किसी चौकी की रखवाली करते हैं | लेकिन आज वे लोग भी चौकीदार की उपाधि लगाए घूम रहे हैं, जो जनता को लूटने वाले नेताओं की चापलूसी को गौरवपूर्ण कार्य समझते हैं | वे लोग भी चौकीदार सरनेम लगाए घूम रहे हैं, जो अपने मोहल्ले की चौकीदारी करने की भी योग्यता नहीं रखते |

इसी प्रकार काँग्रेसी, भाजपाई आदि उपाधियाँ |

ये उपाधियाँ उनके लिए हैं, जो कोई और काम नहीं करते, केवल अपनी पार्टी के लिए काम करते हैं और पार्टी की आय पर ही निर्भर हैं | पार्टी जो भी पारिश्रमिक देती है, उन्हीं से उनका घर परिवार चलता है |

लेकिन वे लोग भी कांग्रेसी, भाजपाई का लेबल लगाये घूमते हैं, जिनको पार्टी से कोई लाभ नहीं | जिनकी भूमि पर यदि भूमाफिया कब्ज़ा कर ले, तो इनकी पार्टी कोई सहायता नहीं करेगी, उन्हें पुलिस और कोर्ट कचहरी के ही चक्कर लगाने पड़ेंगे | यदि किसी की फसल खराब हो जाए, घर में कोई बीमार पड़ जाये…तो पार्टी अपने जेब से फूटी कौड़ी खर्च नहीं करेगी इनपर, सरकार और भगवान् भरोसे ही बैठे रहना पड़ेगा इन्हें |

तो जातिवाद और पार्टीवाद से मुक्ति का सबसे सरल उपाय यह है कि उन उपाधियों का प्रयोग न करें, जिसका आपके वर्तमान जीवन पर कोई प्रभाव नहीं | उदाहरण के लिए यदि आप सोना चाँदी का कारोबार नहीं करते, किसी बैंक में कलर्क या कशियर हैं….तो ‘सोनी” ‘वर्मा’ जैसे सरनेम का प्रयोग न करें | इन सरनेम का प्रयोग उन्हें ही करने दें, जो इस क्षेत्र से वर्तमान में भी जुड़े हुए हैं |

यदि आपके पूर्वज पंडित-पुरोहित थे, लेकिन आज आप उस प्रोफेशन में नहीं हैं, तो अपने नाम के साथ, पंडित, पुरोहित आदि न लगाएं |

यदि आपके पूर्वज पायलट थे, लेकिन आप नहीं, तो अपने नाम के साथ पायलट सरनेम न लगाएं |

यदि आपके पूर्वज सामन्त, ठाकुर थे लेकिन आप नहीं, तो अपने नाम के साथ सामंत, सावंत, ठाकुर आदि का प्रयोग न करें |

यदि आपके पूर्वज ने केवल एक ही वेद का अध्ययन किया और वेदी कहलाये, लेकिन आपने एक भी वेद का अध्ययन नहीं किया, तो वेदी सरनेम का प्रयोग न करें | या फिर एक से अधिक वेदों का अध्ययन करके द्विवेदी, त्रिवेदी या चतुर्वेदी की उपाधि प्राप्त करें |

सरांश यह कि अपने नाम के साथ उन उपाधियों का प्रयोग न करें, जो आपकी आजीविका का आधार नहीं है |

यदि मेरे इस सुझाव को समाज गंभीरता से ले, तो जातिवाद और पार्टीवाद से अवश्य मुक्ति मिलेगी |
~विशुद्ध चैतन्य