तो अब तुर्की और सीरिया के बीच समझौते के लिए हालात काफ़ी बेहतर हो गए हैं

तो अब तुर्की और सीरिया के बीच समझौते के लिए हालात काफ़ी बेहतर हो गए हैं

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ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने तुर्की का तीन दिवसीय दौरा किया। इसका महत्व दो महत्वपूर्ण कारणों से है।

पहला कारण यह है कि तुर्की की यात्रा उन्होंने सीरिया की यात्रा के बाद की जिसमें उन्होंने राजधानी दमिश्क़ में राष्ट्रपति बश्शार असद से लंबी मुलाक़ात की। दूसरा कारण यह है कि यह यात्रा तेहरान के ख़िलाफ़ अमरीका के प्रतिबंधों का दूसरा चरण शुरू होने से दो सप्ताह पहले हुई है। अमरीका इस चरण में कोशिश कर रहा है कि तुर्की सहित कुछ देशों को ईरान से होने वाला तेल का निर्यात पूरी तरह बंद हो जाए।

जवाद ज़रीफ़ ने अपने तुर्क समकक्ष मौलूद चाशुव ओग़लू के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जो बात कही है उसने सबका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि हम तुर्की और सीरिया के बीच संबंधों की बहाली के लिए काम करेंगे, हमें आतंकी ख़तरों के संबंध में तुर्की की चिंताओं की जानकारी है और हमने तुर्क सरकार से कहा है कि इन ख़तरों को दूर करने का एक ही रास्ता है कि सीमाओं पर सीरियाई सेना तैनात हो।

इस वाक्य से जो बात समझी जा सकती है वह यह है कि ईरान ने कोई पहल शुरू की है और शायद इसे रूस का समर्थन भी हासिल है और इसका उद्देश्य दो पड़ोसी देशों सीरिया और तुर्की के बीच समझौता करवाना है ताकि आठ साल से दोनों देशों के बीच जारी कड़वाहट दूर करके सामान्य संबंध बहाल हों।

जवाद ज़रीफ़ अंकारा से पहले दमिश्क गए। उन्होंने राष्ट्रपति असद से लंबी मुलाक़ात के बाद वार्ता का सारांश अर्दोगान को पहुंचाया है। उन्होंने अंकारा में राष्ट्रपति भवन में रजब तैयब अर्दोग़ान से मुलाक़ात की जो सवा 1 घंटा चली।

तुर्क विदेश मंत्री मौलूद चावुश ओग़लू ने जवाद ज़रीफ़ के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सीरिया के संदर्भ में ईरान से हमारे मतभेद हैं लेकिन हमने ईरान से सहयोग का निर्णय किया है ताकि सीरिया संकट का राजनैतिक समाधान निकले।

इस बयान से भी संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने ईरान की पहल का स्वागत किया है क्योंकि इसमें रूस का समर्थन भी शामिल है।

सीरिया संकट के आठ साल पूरे हो चुके हैं, इस बीच सीरियाई सेना अधिकतर क्षेत्रों को आज़ाद करा चुकी है, उधर अमरीका ने उत्तरी सीरिया में मौजूद कुर्दों को बड़े पैमाने पर हथियार दे दिए हैं तो अब तुर्की और सीरिया के बीच समझौते के लिए हालात काफ़ी बेहतर हो गए हैं।

कुर्दों की मदद से अमरीका ने तुर्की की अखंडता को निशाना बनाया है साथ ही तुर्की की अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त करने की कार्यवाही शुरू की है। इसके लिए अमरीका ने रूस से तुर्की के एस-400 मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम को बहाना बनाया। इस समय तुर्की के पास एक ही रास्ता है कि अमरीका की साज़िश को नाकाम बनाने के लिए ईरान और सीरिया का रुख़ करे। तुर्क विदेश मंत्री ने जब यह कहा कि उनका देश ईरान से व्यापारिक लेनदेन को 10 अरब डालर से 30 अरब डालर सालाना तक पहुंचाना चाहता है तो इसका अर्थ यही है कि तुर्की ईरान और सीरिया की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका देश ईरान से व्यापार के लिए नया वित्तीय मेकैनिज़्म बना रहा है।

तो क्या हम ईरान की इस मध्यस्थता का नतीजा जल्द ही देखेंगे? हमें इसकी प्रबल संभावना लगती है। यह ज़मीनी तथ्यों के अध्ययन पर आधारित विचार है।

साभार रायुल यौम