AIMIM की क़ुरबानी, फ़ायदा और नुक़सान : कर्णाटक चुनाव संक्षेप मे!

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Shafi Khan
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यहाँ 2013 मे 224 सीट पर चुनाव हुआ था, जिसमे कांग्रेस(122 सीट), बीजेपी और जनता दल सेकुलर(JDS) 40-40 सीट के साथ मुख्य पार्टिया थी, 2008 मे कर्मशः 80, 110, 28 सीट और उससे पहले 2003 मे कर्मशः 65, 79, 58 सीट थी | इस बार 12 मई को फिर वोटिंग है, इस बार भी इलेक्शन का रिजल्ट बिलकुल कुछ 2003 की तरह ही आने की संभावना है, किसी को पूर्ण बहुमत ना आने की पुरी संभावना | इस बार जेडीएस बसपा इत्यादि महागठबंधन मे है और aimim का जेडीएस को सपोर्ट भी है, ऐसे हालत मे जेडीएस का पलड़ा भारी है जिसका सबूत है मीडिया जो जेडीएस को कम दिखाने की कोशिस कर रही है |

जेडीएस को लेकर बहुत भारंतिया फैलाई जा रही है aimim के साथ की वजह से खासकर| जेडीएस का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे की तमाम सेकुलर दलों की तरह उसने भी कई गलतिया की है |
आइये बताते है आपको aimim किस वजह से जेडीएस का सपोर्ट कर रही होगी |
1. जैसा की आप लोग जानते होंगे की देश बीजेपी और कांग्रेस की गलत नीतिओ, भारस्ताचार, असमानता / कम्युनल पॉलिटिक्स इत्यादि की वजह से आम जनता बहुत परेशान है(नीचे मै कुछ उदहारण भी दिया हु) | ये दोनों एक ही है कभी मै कभी तू कर करके हमेशा सत्ता मे बने रहती है एक हिंदुत्व का राग के पीछे खुद छुपकर दूसरे को मुस्लिम हितैसी बताने का ढोंग करती है तो दूसरी कुछ अपनी करतूतों से सबूत देती है कि मै मुस्लिम हितैसी कतई नहीं हु आपका आरोप झूठा है लेकिन वही अपने लोगो को मुस्लिमों के बीच भेजकर उसी सबूत को ऐसा परतीत करवाती है कि मै मुस्लिम हितैसी हु (जैसे की सच्चर कमेटी जैसी तमाम रिपोर्ट) इत्यादि | और बस इसी तरह जाल बिछये रहती है और कोशिस ये करती है कि कोई तीसरी पार्टी हम दोनों के बीच मे ना आने पाए |

ओवैसी सहित तमाम नेता अब इनकी इस चाल को फ़ैल करके तीसरा फ्रंट तैयार करना चाहते है जिसे अब जनता इन दोनों का विकल्प मानकर अपना वोट दे और व्यवस्था परिवर्तन हो | इस नज़रिए से देखिये तो पता चलेगा कि कर्नाटक मे तीसरा विकल्प जेडीएस की अहमियत क्या है|

2. जेडीएस ने कर्णाटक मे मुस्लिम राजनीती को अहमियत देते हुए इस समुदाय से ऐसा नेता बनाने की पूर्व मे अच्छी कोशिस कर चुकी है जो समाज हित के साथ साथ अपने समुदाय को सही ढंग से जागरूक कर सके, रिप्रेजेंट कर सके | पार्षद से लेकर सांसद तक पहुँचने का रास्ता पर्सस्त हो सके | इसी सिलसिले को लेकर कांग्रेस से उनकी छोटी मोती अंतर्कलह भी हुए, २००३ मे जब किसी भी पार्टी को जब बहुमत नहीं मिली तो जेडीएस ने सपोर्ट देकर कांग्रेस की सरकार बनाव्यी थी, उस समय मुस्लिम राजनीति को बढावा को लेकर इनमे कई बार अंतर्कलह हुयी, सरकार गिरने मे ये अंतर्कलह काफी बड़ा कारण था लेकिन कांग्रेस की अपनी सूझबूझ की वजह से ज्यादातर जनता तक ये बात नहीं पहुँच सकी और ना ही इसे सरकार गिरने का कोई बड़ा कारण मानता है| जेडीएस ने अपने इसी मुस्लिम राजनीती को अहमियत देते हुए ही “मेराजुद्दीन पटेल” साहब को कर्नाटक का प्रेसिडेंट भी बनाया था (और आगे CM की कुर्सी तक पहुचाना भी था ऐसा कुछ लोग कहते भी है) और वो अपने जीवन के अंतिम समय तक उस पद पर रहे | गौर करियेगा 2001 सेन्सस के अनुसार कर्नाटक मे लगभग 12 % मुस्लिम रहते है और ज्यादातर मुस्लिम कांग्रेस के सुप्पोर्टर थे ऐसे हालत मे एक मुस्लिम को परदेश अध्यक्ष बनाना बड़े मिशन और कलेजे का काम है , इनकी मिर्त्यु के बाद hd देवेगोवड़ा के बेटे hd कुमारस्वामी परदेश अध्यक्ष बने |

3. aimim को मीडिया और विरिधियो द्वारा एक कम्युनल पार्टी की तरह दुस्पर्चार किया जाता है ऐसे मे aimim की सबसे बड़ी जरुरत है इस छवि को तोडना, वैसे तो लोग कहते है aimim का सब कुछ FB पर ही है लेकिन शायद ही कोई इस छवि को तोड़ने के लिए लिखता हो, शायद ही कोई aimim को लेकर पॉजिटिव लिखता हो, शायद ही कोई लोगो के पास तक aimim की सही विचारधारा पहुँचाने की कोशिस करता हो, इसीलिए मै तो कहता हु की aimim मे FB पर लिखने वालो का बहुत बड़ा आकाल है जो पॉजिटिव सोच लोगो तक पहुचाये| आगे आने वाले 2-3 महीनो मे कर्णाटक मे कारपोरेशन चुनाव भी है, इसी को देखते हुए जेडीएस का इस इलेक्शन मे सपोर्ट करके अपनी पॉजिटिव सोच को लोग तक पहुँचाना है ताकि कारपोरेशन चुनाव मे इनको इसका फायदा हो सके| याद दिला दू आपको जेडीएस ये पहली पार्टी है जो aimim तक खुद जाकर चुनाव मे साथ देने के लिए राबता की, वरना बिहार मे लालू ने साथ नहीं दिया कई बार साथ मांगने के बावजूद वही काम मायावती ने UP मे किया हलाकि aimim की तरफ से खुल्लम खुल्ला साथ लेने का आह्वान किया गया था| यहाँ जेडीएस खुद आती है इनके पास और वक़्त की नजाकत को देखते हु साथ देने लेने की बात करती है, यहाँ तक कि राज्यसभा इलेक्शन के बाद साथ कितना और कैसे देना है की बात भी बोलती है, लेकिन फिर जब 15-18 लाख मुस्लिम वोटर का नाम गायब होने की बात सामने आती है तो सारा मामला यही रुक जाता है (हलाकि असहमति शायद उससे पहले हो जाती है)| मेरे ख्याल से ये सबसे बड़ा कारण था की aimim चुनाव ना लड़ने का मूड बना ली रही होगी, ऊपर से कई दीनी / सामाजिक संगठन ओवैस साहब से चुनाव ना लड़ने की अपील कर चुके थे| तो फिर aimim चुनाव ना लड़कर जेडीएस का सपोर्ट करके पॉलिटिक्स मे भी बनी रही और आगे के लिए अपना कद भी बढ़ा ली |

4. मुस्लिम वोट का बटवारा सपा बसपा जेडीएस sdpi iuml mep कांग्रेस मे होना ऊपर से 15-18 लाख मुस्लिम वोटर का नाम गायब होना (कांग्रेस बीजेपी ही असल जिम्मेदार है इस करतूत के) कही ना कही aimim को चुनाव ना लड़ने का मुख्य कारण हो सकता है | आपको बता दू जो सपा कांग्रेस UP मे एक साथ थे यहाँ दोनों अलग अलग लड़ रहे है, bsp भी अलग है लेकिन जेडीएस के गठबंधन के साथ | बाकि up वाले भैया चाहे तो उनसे इस विषय पर परशान पूछ सकते है | और UP चुनाव मे SDPI ने सपा को समर्थन दिया था लेकिन यहाँ कर्णाटक मे सपा ने ना इनसे गठबंधन किया ना सपोर्ट दिया हलाकि औसत वोट प्रति सीट देखे पिछले चुनाव का(२०१३ का) देखे तो sdpi(4272 / सीट) कही सपा (3924 / सीट) बसपा(1627 / सीट) (bsp 175 सीट पर लड़ी थी ) से आगे थी| अब मुस्लिम वोट बटवारे को देखते हुयी पहले aimim चुनाव से बाहर हुयी, फिर sdpi जो पहले 23 सीट पर चुनाव लड़कर अच्छा परफॉर्म कर चुकी थी वो अब सिर्फ 3 सीट पर लड़ रही है| iuml जो पहले 5 सीट पर चुनाव लड़ी थी अब वो इस चुनाव मे नहीं भाग ले रही है | इन पॉइंट्स को गौर करिए तो पता चलेगा की कौन सच मे बीजेपी को हराना चाहता है / खिलाफ है, कौन सिर्फ नाटक कर रहा है | मेरा इशारा समझिएगा |

5. ऐसे बहुत सारे जाने अनजाने मे पॉइंट्स है जिसे देखकर कोई भी कहेगा की aimim ने अच्छा फैसला लिया है, यहाँ तक कि कट्टर विरोधी भी |

अब मै बताता हु कि कैसे बीजेपी और कांग्रेस एक ही है या साथ साथ काम करती है या एक दुसरे के पूरक है जैसा कि मैंने ऊपर पहले ही पॉइंट मे कहा है :-

1 चलिए २०१४ और उससे कुछ पहले से सुरु करते है याद करिए वो दिन जब महगाई डायन थी गैस बाटला लेकर जगह जगह नाच गाना होता था तो कही दाल-सब्जी को लेकर तो कही पेट्रोल को लेकर तो कही कला धन को लेकर तो कही वाड्रा इत्यादि को लेकर | लेकिन अब सब गायब है लगभग दो गुना दाम सबके हो चुके है गैस दाल पेट्रोल(कच्चे तेल के दाम इंटर नेशनल मार्किट मे पहले की अपेक्षा काफी गिर चुके है, इस हिसाब से तो अब पेट्रोल के दाम दो गुआन से भी ज्यादा है) लेकिन महगाई अब डायन नहीं विश्व सुंदरी है| और घोटालो की तो बाढ़ आ चुकी है काला धन सफ़ेद किया जा रहा है लेकिन कांग्रेस चुप क्यों है क्या उसको बीजेपी के अंदाज़ मे जवाब नहीं देना मागता है| सीधी सी बात है भाई हमने किया है तुम भी जी भरकर कर लो जब जनता पुरी तरह त्राहि त्राहि आ जाएगी तो खुद बा खुद हमारी झोली मे आ जाएगी फिर हम करेंगे फिर तुम….मतलब कभी बीजेपी तो कभी कांग्रेस बरी बारी हा अगर कोई ज्यादा उछलता है तो किसी और को भी थोडा बहुत फायदा दे देंगे | आखिर हम दोनों भाई भाई ही तो है| मज़ा नहीं आया ना इस पॉइंट मे मैंने जान बूझ कर इस पॉइंट को पकाऊ बना दिया है, इस पॉइंट पर बहुत गौर करने की जरुरत है फिर आप मज़ा लेने की सोच भी नहीं पाएंगे |

2 FDI नाम तो सुना होगा ही ? नहीं सुने, अच्छा काला धन, पैराडाइज , पनामा ?? ये सब सुने हो का बाबु ? अरे वही पनामा जिसमे नाम की वजह से कई देशो के बड़े बड़े नेता अब ठोकर खा रहे है उनमे पाकिस्तान के परधन मंत्री अरे अपने pm के परम मित्र को वहा की सुप्रीम कोर्ट ने pm पद से हटा दिया फिर बाद मे किसी सार्वजनिक पद पर रहने के अयोग्य घोषित कर दिया गया | हमारे यहाँ तो जिनका नाम उसमे है वो छुपा दिया गया है जिनका नाम किसी वजह से वायरल हो गया था वो ब्रांड अम्बेसडर बनकर दुसरो को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे है| जानते है ऐसा क्यों ? क्योंकि इनमे सब कांग्रेसी भाजपाई आरएसएस वाले ही है या इनके रिश्ते नाते वाले है या इनके करीबी कॉर्पोरेट वाले है, ये ही है पनामा, ये ही है पैराडाइस, ये ही है काला धन | जब सब कुछ ये ही है तो कौन करवाई करेगा या करवाएगा| FDI ? अरे वही है fdi जिसको रोकने के लिए बीजेपी पहाड़ उठाई थी कांग्रेस के साशन मे अब अपने राज मे अपने ही भाई कांग्रेस की इच्छा को पुरी करते हुए और ज्यादा छेत्रो मे FDI ला दी और जहा पहले कम थी वहा भी बड़ा दी, इतना ही नहीं बल्कि रक्षा के छेत्र मे लाकर देश की सुरक्षा से भी पंगा ले ली | जानते है क्यों FDI पर इतना प्यार ? अरे भैया ये और कुछ नहीं काला धन सफ़ेद करने की युक्ति है, काला धन इधर से उधर और उधर से इधर करके शुद्धि कर ली गयी बस इसी बहाने कुछ विदेशी अपने प्रिय कॉर्पोरेट की अपने यहाँ एन्र्टी भी करा दी | और यही कारण है कि जबसे FDI को लाने की बाते कांग्रेस ने छेड़ी है तभी से इंडियन क्रोरेपति लोग काफी थोक भाव मे यहाँ से पलायन करके विदेशी बन गए और बीजेपी के इन चार सालो मे ये संख्या अपने आप मे एक रिकॉर्ड है | कभी FDI पर ध्यान केन्द्रित करियेगा आपके होश उड़ जायेंगे | अच्छा है एक लिंक खोलकर पढ़िए इन शोर्ट “नवाज़ शरीफ पर भारत मे 5 अरब डालर जमा करने का आरोप है |

पता नहीं बिरयानी का ये राज है या बीजेपी के द्वारा अपने दुश्मन देश को “मोस्ट फैवौरेट नेशन”(ये उस देश को दिया जाता है जो आपके बहुत करीबी होते है बिज़नस को लेकर) या अडानी / अम्बानी भैया लोग है ?? पता नहीं से कैसी दुश्मनी रखते है कि ये खुद उनके घर बिना बुलाये पहुँच जाते है, हमारे सैनिक लगातार सबसे जयादा स्पीड से उनकी गोलिओ से वीरगति प्राप्त करते जा रहे है, इनके नेता मंत्री कभी भी पहुँच जाते है, इनके पसंदीदा बिज़नस मैंन वहा से अरबो खरबों मे आदान पर्दान करते है, अम्बानी अडानी का तो पाकिस्तान गढ़ ही बन चूका है, अब तो अपनी सेना उनके साथ युद्ध अभ्यास भी करने वाली है, बस ये 2-4 फिल्म एक्टर और क्रिकेटर के विरोध का नाटक करके भक्तो को गोबरपान कराकर सिर्फ चुनाव के लिए दुश्मनी दिखा रहे लेकिन सच मे तो ये पाकिस्तान परस्त है |

3 कांग्रेस काल मे उनके बिजिनेस कॉर्पोरेट लोग खूब लूटते थे, विदेशो मे छुपाते थे, या यही पर खेला खेलते थे अब उन्ही को फॉलो करते हुए उनके भाई बीजेपी वाले भी वही करते है मार घोटाले पर घोटाला, रोज की खबर है कभी वो भाग रहा तो कभी वो भाग गया माल लेकर, जो नहीं भगा यही खा पी कर डकार रहा है और झोली भर रहा है फिर बाद मे भागेगा | और ये दोनों लोग आराम से कर रहे है कोई रोक टोक नहीं कोई खास एक्शन नहीं| NPA सुने है बाबा ?? अरे वही बैंक वाला NPA, अरे भैया ये वही है की अपने मन पसंद कॉर्पोरेट / कंपनी / बिजनेस मैन को जीतना पैस माँगा बैंक से दिलवा दिए और वो भिखारी बैंक के हमारे पैसो से अपना अरबो खराबो का बिजनेस बना लिया फिर बैंक को पैसा भी वापस नहीं किया फिर इनकी अपनी बीजेपी कांग्रेस की सरकार उसको माफ़ कर देती है थोडा बहुत नौटंकी की करवाई के साथ और अब तो जो बैंक का पैसा लेकर भाग रहे है बहुत का नाम हम लोग जानते ही है इसमें उदहारण नहीं तो देना पड़ेगा …हा कांग्रेस ये सब काम बड़े चुपके से करती थी और बीजेपी सीना थोक कर कर रही है और कोई कुछ कर भी नहीं सकता क्योंकी इनको पता है कि हमारी सरकार गयी तो हमारे भाई की आएगी बाकी न्यायलय सीबीआई आईबी इत्यादि को मैनेज कर ही लेंगे | कभी सीरियस होकर NPA के बारे मे पढियेगा, माथा पकड़कर बैठ जायेंगे ये लूट जमाने से होती चली आई है इतना पैसा इसमें लूटा गया है की उतने पैसे से देश की लगभग सारी बड़ी समस्या को एक हद तक लाइन पर लाया जा सकता है|

4आधार कार्ड का नाम तो सुने ही होंगे जब ये आया था तो कितना हल्ला हो रहा था और अब जानते ही होंगे की हर जगह एक ही आवाज आती है आधार आधार | ये भी बड़ी खतरनाक चीज है खैर अभी नहीं बताऊंगा इसको क्योंकी इसके चलता फिरता उदाहरन अभी आपके जायदा नहीं आये होंगे इसलिए मै बताऊंगा तो आपको मज़ा नहीं आएगा लेकिन बस कुछ सालो मे आप जरूर जान जायेंगे | बस अभी के लिए ये कहिये की ये आपकी नब्ज़ अपने मुठी मे करने की एक युक्ति है|

5अकसर मुसलमान उस पार्टी को वोट और सपोर्ट नहीं देते है जो बीजेपी से मिल जाता हो या मिलने की कोशिस करता हो लेकिन क्या उनको बीजेपी आरएसएस से दुश्मनी लेने का कोई फायदा आज तक मिला ?? क्या जिस पार्टी के लिए वो दुश्मनी लेते है वो लोग इनको बचाने आते है जब जरुरत पड़ती है ?? दंगे मे मार काट हो या फर्जी गिरफ़्तारी क्या वो लोग आपका साथ देने आते है क़ानूनी रूप से ?? क्या वो लोग आपको और आपके लोगो को कोई इस्पेसल नौकरी/पढाई इत्यादि मे साथ देने आगे बढ़ाने आते है ??….नहीं नहीं नहीं तो भाई क्या फायदा दुश्मनी करने का ? क्या आप ऐसा नहीं कर सकते कि आप भी मौकापरस्त यानि अपनी जरुरत के हिसाब से दोस्ती दुश्मनी या न्यूट्रल रहे ?? सोचियेगा गौर करियेगा इन सब बातो को लेकर….वैसे ये लोग जब आपके काम नहीं आते तो आप क्यों नहीं अपनों को मज़बूत कर लेते अपने लोगो मे से लोगो को मजबूती देते फिर अपने बल पर किसी का साथ देते या छोड़ते ??……..अरे हा कांग्रेस भी तो बीजेपी के साथ परत्यक्ष या अपरत्यक्ष रूप से बीजेपी के साथ गठबंधन करती आई है तो भी क्यों इनके साथ चिपके हो, जब बीजेपी ही आपका पैमाना है ?? उदहारण दू ? 1. अभी मिजोरम मे कांग्रेस भाजपा कुर्सी हथियाने के लिए एक साथ आई है लेटेस्ट है ये | 2. महाराष्ट्र मे लोकल चुनाव मे कांग्रेस और शिवसेना का गठबंधन | 3. अभी त्रिपुरा मे इन दोनों का अपरत्यक्ष गठबंधन, यहाँ 59 सीट पर चुनाव थे, कांग्रेस के पास पहले 10 सीट थी, इस चुनाव को लेकर कांग्रेसी बीजेपी मे चले गए, कट्टर कांग्रेसी लोग खुद चुनाव बाद कबूले कि 60-70 % कांग्रेसी बीजेपी मे चले गए थे इस लिए अब वहा कांग्रेस 00 है और बीजेपी की सरकार इनकी मदद से बन गयी लेकिन सच ये है कि ये दोनों अंदरखाने मिल चुके थे दिखावे के लिए ही सिर्फ कुछ नेता कांग्रेस के साथ थे कुछ MP MLA मंत्री कार्यकर्ता ओपेनली बीजेपी ज्वाइन किये | 4 . अभी लगातार बीजेपी जीते जा रही है बड़ा कारण ये है कि ये सिर्फ चेहरा बदल रहे है पॉवर वही है जहा चुनाव होता है वहा कांग्रेस के कई दर्ज़नो MP MLA मत्री नेता पाला बदलकर बीजेपी मे चले जाते है या भेज दिया जाता है माहौल बनाने के लिए बाकि का काम मीडिया और EVM का है ही | 5. २०१४ इलेक्शन मे लगभग 100 MP जो अब बीजेपी मे है वो पहले कभी कांग्रेसी थे , इसी तरह लगभग हर स्टेट इलेक्शन मे दर्ज़नो MLA पाला कूदते दिख जाते है | 6 . ये कोई नया काम नहीं है इनका ये पहले भी डायरेक्ट इन्दिरेक्ट ऐसा करते आये है, २००९ सिक्किम मे विधानसभा चुनाव मे बीजेपी कांग्रेस और कम्युनिस्ट का खुल्लम खुल्ला गठबंधन था | इत्यादि बहुत मिलेंगे यार खोजो तो सही लेकिन हमारे आँखों पर पट्टी बाध दी है इन लोगो ने कि हम ना इनपर शक करते ना चेक करते|

नोट :- कुछ प्रूफ भी दिए गए है पिक के रूप मे देख सकते है |

6 अक्सर आप सुनते होंगे कि कांगेस ही आरएसएस बीजेपी की माँ है या कांग्रस बीजेपी से ज्यादा कम्युनल है लेकिन आप अक्सर हुह करके टाल देते होंगे, लेकिन इसमें एक बड़ी सच्चाई भी है | आरएसएस आज कहा नहीं है सब जगह है कांग्रेस के आँखों के सामने ही तो शाखाये चलती है हथियारों से लैश सेना दिख जाती है ट्रेनिंग दी जाती है , भाई क्यों ? किसके लिए ? सेना मे जायेंगे या पुलिस मे ?…..जब जब दंगे होते है तो बड़े बड़े दंगाई बच जाते है कैसे ?? सोचिये अमित शाह मोदी योगी अडवादी बल ठाकरे इत्यादि हजारो ऐसे लोग है जिनपर करवाई या तो हुयी नहीं या तो सिर्फ खाना पूर्ति हुयी है ऐसा क्यों ? दंगो मे तो सिर्फ मुस्लिम तो मरते नहीं कुछ non मुस्लिम की भी जान माल की हानि होति है कम ज्यादा हो वो अलग बात है | सरकार तो दंगे को तुरंत रोककर दंगइयो को दबोचने के लिए होती है ना कि दुसरे को बदला या किर्या पर्तिकिर्या करने देने की छूट के लिए होती है | पुलिस का रवैया क्यों बदल जाता है कौन उनकी ऐसी मानसिकता बना दिया ? कही मस्जिद शहीद कैसे हो जाती है ? कही मस्जिदों मे मुर्तिया कैसे रखा जाती है ? कही मस्जिदे कैसे बंद कर दी जाती है ? कही नमाज़ियो को नमाज़ पढने से कैसे रोक दिया जाता है ? कही कैसे बहुत कुछ कर दिया जाता है ? कभी राह चलते मारना पीटना कभी प्लानिंग करके यही काम करना इत्यादि , क्या इतना सब कुछ करना सिर्फ अकेले बीजेपी के बस की बात है अगर बीजेपी विरोधी हमारे साथ सच मे है तो ??

कितना लिखे यार गुस्सा और प्यार खत्म ही नहीं हो रहा है, जागरूक होइए किसी की तारीफ मतलब किसी की बुराई ही नहीं होती….किसी की बुराई मतलब किसी की अच्छाई नहीं होती | सच सच होता है, सच से झूठ का फायदा या झूठ से सच का फायदा नहीं होता , हा लेकिन कभी कभी संयोग हो जाता है|

नोट करके रखलो भाई जब हमारे साथ कोई नहीं आ रहा है तो क्यों ना हम खुद को मज़बूत करे/अपने लोगो को मज़बूत करे / अपने यार दोस्तो को मज़बूत करे , क्यों किसी ऐसे का झंडा धोये और उसके फायदे के लिए किसी से दुश्मनी ले जब वो हमारा साथ देने नहीं आता |

और हा सुनिए चलिए एक कोशिस करते है बीजेपी-कांग्रेस मुक्त तीसरा मोर्चा तैयार करने की, हर स्टेट मे, हर विधानसभा मे हर लोकसभा मे हर वार्ड मे | एक कोशिस करते है शायद भारस्ताचार लूट पाट कुछ कम हो जाए और जनता थोडा चैन की साँस ले , मने कब तक 2 लोगो के बीच मे पड़े रहेंगे | चलो और लोगो को आने दे , सबसे पहले इन दोनों को पुर्णतः त्याग करे फिर अपनी सुविधा के अनुसार कोई तीसरा चुन ले | और हा सुने भाई अब हर जगह इन दोनों का आप्शन है बस आपको अपनी आँखे खोलना है और गौर करना है कि आपके क्षेत्र मे कौन है इनका सही विकल्प | और हा इन दोनों से मुक्त होने मे टाइम लगेगा इसलिए जल्दी नक्को, पहले खुद बदलिए और बदलने की लहर पैदा करिए दूसरो मे भी | मोदी लहर से कही बड़ी लहर पैदा करना होगा और इस काम को हमे ही करना है |

AIMIM की क़ुरबानी, फायदा और नुकसान

वैसे तो कांग्रेस, सपा इत्यादि छोटी बड़ी सारी पार्टिया बीजेपी के खिलाफ लडती है(बिना मजबूती के भी कई सीटो पर अकेले लडती है) लेकिन कुर्बानी aimim IUML sdpi इत्यादि को देना पड़ता है क्योंकी ये सच मे बीजेपी के खिलाफ होती है| aimim चुनाव नहीं लड़ी तो sdpi ने 23 से 3(पिछली बार 23 सीट पर लड़ी थी अब 3 पर ही लड़ रही है) पर आ गई तो IUML भी 5 से 0 पर मतलब इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है बाकि सपा एनसीपी जैसी पार्टिया अकेले मैदान मे काफी सीट पर लड़ रही है जबकी इनकी UP की साथी पार्टी bsp और कांग्रेस दोनों मौजूद है| क्या है सेकुलरिज्म का जिम्मा सिर्फ मुसलमानों पर है ?? बाकी तो उन्ही के आगुया पिछुआ है|

AIMIM यहाँ काफी तयारी के साथ मैदान मे थी, यहाँ की टीम मुझे तेंलागना के बाद सबसे ज्यादा मेहनती लगी, 5-6 सीटो पर इनकी बहुत जबरजस्त पकड़ थी लेकिन अब जब aimim चुनाव नहीं लड़ रही है तो कार्यकर्ताओ का मनोबल काफी गिरा है, लकिन धीरे धीरे जब कारणों पर गौर किया गया तो अब ये फिर से जोश मे है लेकिन अब तक aimim को बड़ा नुकसान हो चूका है| aimim के अच्छे मज़बूत और दूस्रदर्शी सिपाही अब भी मैदान मे है, कुछ लीडर/कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर चुप चाप बैठ गए है (पार्टी ने दिल तोडा तो चुप बैठ गए, एक हद तक सही भी है), तो कुछ लीडर/कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर कही और चले गए है(इनके जाने से पार्टी को मेरी नज़र मे दूरगामी, अच्छा हुआ| लेकिन वहा जाकर ही क्या पाओगे भाई ? थोडा सब्र नहीं कर सकते , अगर वहा आपको उम्मीदवार बनाया जाता तो आपका जाना भी हमें अच्छा लगता, अब धोवो झंडा), तो कुछ लीडर/कार्यकर्ता इंडिपेंडेंट कैंडिडेट बनकर सामने आ गए आन डिमांड(ऐसे लीडर का हम सम्मान करते है, मेरी जानकारी मे ऐसा सिर्फ एक लीडर है वहाज़ बाबा, इनकी जीत की हम भी दिल से दुआ करते है)| कुल मिला जुलकर देखे तो कोई खास नुक्सान नहीं है अब जब जेडीएस को सपोर्ट है जायदातर लीडर/कार्यकर्ता aimim के साथ बने हुए है|

अब बात आती है कि aimim जेडीएस को सपोर्ट करती है और जेडीएस ऐसी है वैसी है इत्यादि प्रोपगंडा aimim को लेकर करने वालो की| तो मै अस्पष्ट बता दू जेडीएस वहा बीजेपी और कांग्रेस दोनों की बाप है बाप समझाते हो ना ? हा वही बाप जो आप समझ रहे हो| जेडीएस दोनों के साथ पूर्व मे वहा सरकार बनाने या भागीदार होने मे योगदान कर चुकी है और आगे भी जब वही इस्तिथि आएगी कि कोई को बहुमत ना मिले तो ये करने के सिवा कोई करे क्या ? हा अगर किसी के पास बहुमत होती और ये ऊपर से सपोर्ट करते तो वहा दिमाग लगाना समझ मे आता है, इसलिए इसके बारे मे सोचना सिर्फ बचकाना हरकत है, इस इस्तिथि से कोई बच नहीं सकता| यहाँ इस मज़बूरी को दिल से नहीं दिमाग से सोचते, वैसे भी ये राजनीत दिमाग से ही करते |

और हा सुनिए कांग्रेस कर्णाटक के बाप सिधारामैया जेडीएस मे अच्छे वक़्त तक रहे है डिपुटी चीफ मिनिस्टर भी बन चुके है वही रहकर, जेडीएस कर्णाटक के प्रेसिडेंट भी रह चुके है| बाद मे इनकी कुछ करतूतों की वजह से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया था | अब आप सोचते रहिये यहाँ बीजेपी कांग्रेस और जेडीएस कौन कहा है ??

कर्णाटक चुनाव संक्षेप मे :-

यहाँ CM और PM मे कड़ी टक्कर देखने देखने को मिल रही है दरअसल दोनों एक नंबर मे जुमलेबाज़ जोड़ी है, दोनों ही फेकने मे खूब माहिर है | एक नज़र ”कांग्रेस और करपसन के ‘C’ मे कोई अंतर नहीं, बीजेपी और बलात्कार के ‘B’ मे कोई अंतर नहीं | बीजेपी के PPP का जवाब कांग्रेस का PPP” बस ऐसे ही चुनावी मुद्दों पर बात और जुमले चल रहे| ये जुमलेबाज़ी बाकायदा प्लान करके की जा रही है जिसकी सुरुआत गुजरात के राज्यसभा चुनाव(वही अहमद पटेल वाला याद आया) से हुयी जब CM ने हीरो की तरह एंट्री मारी ऐसे कि जैसे कोई विलेन MLA को उठवा रहा हो और ये हीरो की तरह पहले ही MLA को उठवाकर कर्नाटका ले आये, तब से ये जंग जारी है| दरअसल CM साहब का काम उम्मीद के मुताबिक अच्छा नहीं कर सके बिलकुल PM साहब की तरह(लेकिन CM साहब जरुर थोडा बेहतर है इस मामले मे)| अल्प्संखयक का बजट एक तो काफी कम होता है दूसरी तरफ वो भी आधा अधुरा ही खर्चा हो पाता है मानो की अल्पसंख्यक के लिए कोई काम ही बचा ना हो उधर दूसरी तरफ देखे तो बीजेपी की जब सरकार थी तो CM सहित कई नेता भारस्ताचार मे लिप्त पाए गए और काम भी उम्मीद से बहुत गन्दा किये|
तो ऐसे केस मे जनता का रूझान तीसरा विकल्प जेडीएस की तरफ आटोमेटिक बढ़ गया ऊपर से बसपा साथ आ गयी और अब aimim का समर्थन भी तो अब बीजेपी कांग्रेस परेशान होकर हमेशा टीवी न्यूज़ मीडिया हर तरफ से हु हु हु करके जनता का ध्यान जेडीएस से भटका रहे है और जान बूझकर जेडीएस को कम बताने की नौटंकी कर रहे है और पब्लिक के सामने जूमला पर जूमला फेककर लाइम लाइट मे बने रहना चाह रहे है और आपसी लड़ाई की खूब नौटंकी कर रहे है |

नोट :-
1. ये दिसम्बर-जनवरी के दौरान स्टार्ट की गयी सिरीज़ “ अपनी कयादत – अपना संगठन – तीसरा विकल्प (2019-2024 लोकसभा) “ का एक नया हिस्सा है |
2. आपको इस पोस्ट को कॉपी पेस्ट इत्यादि करने के लिए पूछने की कोई जरुरत नहीं |
3. पोस्ट लम्बी है तो आप पार्ट पार्ट करके पढ़िए मैंने ऐसा लिखा भी है कि इसमें कई पोस्ट बन जाए |
4. आप भी कुछ लिखिए जब भी वक़्त मिले, क्या वक़्त नहीं मिलता ? भाई कभी ट्रेवल करो या कही वेटिंग मे हो तब तो लिख ही सकते हो जैसे मै अभी कर रहा हु 🙂 , याद रखिये कोई बड़ी पार्टी खुद से इन दोनों के खिलाफ तन मन धन से नहीं उठेगी सीबीआई इब इत्यादि के डर से जब तक हम आप खूब अच्छा माहौल ना बना दे , इसलिए बस एक कदम स्वच्छता की ओर |