दाढ़ी को लेकर मुसलमानों हो रही परेशानी के मामले पर एक नज़र!

आसिम बेग “मिर्ज़ा”

—————————
जैसा कि आज मुस्लिमों की दाढ़ी को लेकर तरह तरह की बातें की जा रही हैं।कभी भारतीय वायुसेना में दाढ़ी रखने को लेकर 2 मुस्लिम वायुसेना कर्मियों को सस्पेंड किया जाता है तो कभी मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज से मुस्लिम युवक को दाढ़ी रखने कि वजह से कॉलेज से निकाला जाता है।वैसे दाढ़ी को लेकर मुस्लिमों का परेशानी से दो चार होने का ये कोई नया मामला नहीं इससे प15822705_931444940322684_8420828638939379539_n 14484721_868876063246239_4751001746753212529_nहले भी देश में न जा जाने कितने मुस्लिमों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है और न जाने कितने ही मुस्लिमों को अपनी सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।ख़ैर,मुस्लिमों की दाढ़ी को लेकर जो बिलकुल नए मामले सामने आए है उन मामलों से आप लोग अच्छी तरह से वाक़िफ़ है और मैं अभी बता भी चुका हूं वैसे अब ग़ौर करने वाली बात ये है कि इन मामलों में से भारतीय वायुसेना से सस्पेंड किए गए मुस्लिम कर्मियों वाला मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया था जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने सेना के ड्रेस कोड के नियम को सर्वोपरि बताते हुए दाढ़ी रखने की वजह से भारतीय वायुसेना से मुस्लिम युवकों की बर्ख़ास्तगी को जायज़ ठहराया तथा उस बात पर भी प्रकाश डाला जिसमें मुस्लिम समुदाय की ओर से ये कहा गया है कि जब सिख समुदाय के लोग सेना में रहते हुए भी अपने धर्म के नियमानुसार दाढ़ी रख सकते हैं और पगड़ी भी बांध सकते हैं तो मुस्लिम दाढ़ी क्यों नहीं रख सकते तो इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने अनाधिकारिक रूप से कहा कि सिख पगड़ी तथा दाढ़ी को अनिवार्य रूप से मानते हैं तथा उसका कठोरता से पालन करते हैं लेकिन मुस्लिम दाढ़ी रखने के नियम का कठोरता से पालन नहीं करते हैं इससे ये पता चलता है कि मुस्लिम दाढ़ी को अनिवार्य नहीं मानते हैं इस वजह से सिख दाढ़ी रख सकता है लेकिन मुस्लिम दाढ़ी नहीं रख सकता।ख़ैर,जब आप इस पूरे मामले पर ग़ौर करेंगे तो मुम्किन है कि कुछ सवाल भी आपके ज़ेहन में आएंगे उसी तरह मेरे ज़ेहन में भी कुछ सवाल हैं जैसे-

सवाल नं 1- वो कौन से मुसलमान हैं जो इस्लाम धर्म में दाढ़ी रखने को अनिवार्य मानते हैं तथा उसका कठोरता से पालन करते हैं और दूसरी तरफ़ वो कौन से मुसलमान हैं जो दाढ़ी नहीं रखते क्या उनके दाढ़ी न रखने की वजह इस्लाम में दाढ़ी की अनिवार्यता को न जानना या न मानना है और तो और अगर इस्लाम धर्म में दाढ़ी रखने वाले तथा दाढ़ी न रखने वालों की आपस में तुलना की जाए तो मेरा ख़याल है कि दाढ़ी न रखने वालों की ही संख्या अधिक होगी तो फ़िर किस आधार पर तथा कौन दाढ़ी रखने वाले मुसलमानों को इस परेशानी से छुटकारा दिलाएगा कि दाढ़ी रखने वाले मुसलमानों को दाढ़ी रखने की स्वतंत्रता हो और उन्हें दाढ़ी की वजह से परेशानी न हो जबकि, ‘तिनका तो ख़ुद की ही दाढ़ी में है।’

सवाल नं 2 – एक जैन धर्म का अनुयायी संवैधानिक विधानसभा में नंगा बैठकर भाषण देता है और उसके इस शर्मनाक कृत्य को उसके धर्म की अनिवार्यता मानकर उसे करने दिया जाता है जबकि ये अशोभनीय कार्य जहां तक मैं जानता हूं संवैधानिक नियमों के बिलकुल विरुद्ध है।

सवाल नं 3 – भारतीय लोकतंत्र मुस्लिम धर्म के मतों की तथा अन्य धर्म के मतों की व्याख्या संवैधानिक रूप से किस तरह से करता है ?

जय हिन्द!
आसिम बेग “मिर्ज़ा”
पुरवा (उन्नाव), उ.प्र.209825
B.Sc.,N.C.C.,MSW (pursing)
Shiats Deemed University,
Allahabad, U.P. INDIA
7309998111
mirzaaasimbeg@gmail.com

Share

Leave a Reply

%d bloggers like this: