यहां तो सिर्फ गूंगे और बहरे लोग रहते हैं, क्या हैरानी नहीं होती ?

Wasim Akram Tyagi

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मध्यप्रदेश के छात्र मोहम्मद असद का मामला अभी शान्त नही हुआ हो पाया है। गौरतलब है कि असद अरिहन्त होम्योपेथिक मेडिकल कॉलेज का छात्र था जिसे पिछले दिनों कॉलेज में दाढ़ी रखकर आने के कारण कॉलेज से निकाल दिया गया था। असद 2013 से इस कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। असद का इस सारे मामले पर कहना है कि”मैंने तीन महीनों तक इसे नज़रअंदाज़ किया। वे दबाव बनाते रहे, मुझे क्लास से बाहर भी निकाल दिया जाता था जब मैंने कहा कि दाढ़ी रखना मेरा अधिकार है और मैं नहीं कटवाउंगा तो मेरे कॉलेज में घुसने पर ही रोक लगा दी गई। कई दिन से असद का यह बयान सोशल मीडिया पर घूम रहा है, कॉल रिकार्डिंग घूम रही है जिसमें कॉलेज के निदेशक एम के जैन साफ कह रहे हैं कि दाढ़ी कटाकर ही कॉलेज आ पाओगे अन्यथा कॉलेज नहीं आना। सवाल यहीं से पैदा होता है। कॉलेज प्रशासन किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो सकता है मगर क्या पूरा कॉलेज ही असद की दाढ़ी के खिलाफ है ? क्या पूरे कॉलेज में चार छात्र भी ऐसे नहीं होंगे जो अपने ही सहपाठी के साथ होने वाली इस नाइंसाफी के खिलाफ अपना विरोध प्रकट कर सकें ? जि13479271_850688288368560_1638335733_nस कॉलेज में बीते तीन साल से पढ़ रहा था क्या उसका कोई दोस्त नहीं बना होगा जो उसके साथ खड़ा हो सके ?

एक छात्र को कॉलेज से निकाला जा रहा था, उससे उसके मौलिक अधिकार, धार्मिक अधिकार छीनने की कोशिश की जा रही थी और पूरा कॉलेज खामोशी से तमाशा देखता रहा, क्या हैरानी नहीं होती ? कि उस कॉलेज से कैसा भविष्य तैयार किया जा रहा है, जो इतना खुदगरज है कि अपने सहपाठी के साथ होने वाली नाइंसाफी के खिलाफ एक लफ्ज भी नहीं बोल पाता। जरा सोचिये कल को उसी कॉलेज से वही छात्र डॉक्टर बनकर निकलेंगे जिन्होंने अपने सहपाठी के साथ होने वाली नाइंसाफी को बगैर कोई विरोध दर्ज कराये सहन कर लिया था। कल जब वे छात्र किसी शहर में, किसी अस्पताल में जाकर प्रेक्टिस कर रहे होंगे क्या उस वक्त वे अपनी खुदगरजी से आगे सोच पायेंगे ? इस घटना के बाद समाज का तो जिक्र ही मत कीजिये क्योंकि यही लोग आगे चलकर समाज का रूप धारण करते हैं, जिन्होंने नौजवानी में नाइंसाफी और इंसाफ में फर्क ही महसूस नहीं किया वह कैसा समाज गढेंगे यह बताने की जरूरत नहीं है। दुष्यंत ने कहा था कि
यहां तो सिर्फ गूंगे और बहरे लोग रहते हैं
खुदा जाने यहां पर किस तरह जलसा हुआ होगा।
Wasim Akram Tyagi

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