यादव सात प्रतिशत होकर भी यूपी-बिहार की सत्ता में है और मुसलमान बीस प्रतिशत होकर भी…!!!

अगर मुलायम की जगह किसी मुस्लिम नेता ने नोटबंदी के पचासवें दिन सोशल मिडिया पर चर्चा के मुददे को इसी तरह बदल दिया होता तो उस पर दूसरी पार्टियों से जुड़े मुसलमान कार्यकर्ताओं की बड़ी तादाद टू15741135_573964056136540_7270111443512021353_nट चुकी होती, दूसरी पार्टी के मुस्लिम कार्यकर्ता हाथ पाँव धोकर उस मुस्लिम नेता को भाजपा को मदद पहुँचाने वाला भाजपाई एजेंट साबित कर रहे होते।

लेकिन समाजवादी पार्टी में जो फैमिली ड्रामा चल रहा है उस पर शायद ही कोई यादव ऐसा मिलेगा जो समाजवादी परिवार को भाजपाई एजेंट बोलेगा, दूसरी पार्टी का राजनितिक विरोधी भी ऐसा नहीं बोलेगा।

यही फ़र्क़ है यादवों में और मुसलमानो में, दूसरी पार्टी के राजनितिक विरोधी यादव कार्यकर्ता कभी भी मुलायम को भाजपाई एजेंट नहीं बोलते।

जबकि सेक्युलर पार्टियों के मुस्लिम कार्यकर्ता दिन रात मुस्लिम नेताओं को भाजपाई एजेंट साबित करने के सिवा कोई दूसरा काम नहीं करते |

ये मानसिकता का फ़र्क़ है यादव सात प्रतिशत होकर भी यूपी-बिहार में सत्ता पर है तो इसके पीछे भी यही मानसिकता कारण है और मुसलमान बीस प्रतिशत होकर भी जूते खा रहा है तो उसके पीछे भी यही मानसिकता कारण है।

–Md Iqbal
Hussain Kamal

लेखक कजे निजी विचार है, तीसरी जंग का कोई सरोकार नहीं।

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