शत्रु संपत्ति : मुल्क अपना, ज़मीन पराई-केंद्र सरकार मुसलमानों की रीढ़ तोड़ना चाहती है!

Nadeem Khan – DELHI
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क्या पाकिस्तान पर भारत 14721738_1246324312097719_3931349938595600078_nको तरजीह देना हमारा गुनाह था, जो आज विभाजन के 65 साल बाद हमें उसकी सजा दी जा रही है?
सुप्रीम कोर्ट में राजा महमूदाबाद के हक़ में फैसल आने के बाद भौकलाई हुई सरकार इसमें संशोधन करके लोकसभा में पेश करती है और वह से पास करवा लेती है फिर राज्यसभा में भेज बगैर राष्ट्रपति के पास ५वी बार भेजकर अध्यादेश के रास्ते शत्रु संपत्ति (संशोधन) विधेयक 2016 को ले आती है . इसमें प्रावधान है कि भारत सरकार विभाजन के समय या 1962, 1965 और 1971 युद्ध के बाद चीन या पाकिस्तान पलायन करके वहां की नागरिकता लेने वाले लोगों की संपत्ति जब्त कर लेगी. भारत में रह रहे उनके उत्तराधिकारियों का भी उनकी छूटी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहेगा. इससे मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय प्रभावित हो रहा है. विवाद कानून में ‘शत्रु’ की परिभाषा को लेकर भी है जिसके तहत किसी को शत्र-शत्रु घोषित किया जा सकता है कानून बनने पर राजा महमूदाबाद के साथ ऐसी 16,000 संपत्तियां सरकार की हो जाएंगी, जिनमें जिन्ना का बंगला और भोपाल के नवाब की संपत्तियां भी हैं जिनकी अनुमानित कीमत ५ लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है सिर्फ दिल्ली के सदर बाजार इलाक़े में ३०० से ज़्यादा दुकाने मुसलमानो के हाथ से जाने का डर है
‘यह कानून लाकर केंद्र सरकार मुसलमानों की रीढ़ तोड़ना चाहती है. संपत्ति मुसलमानों की रीढ़ है. वह अपने बांटने के एजेंडे के तहत काम करते हुए मुसलमानों के खिलाफ माहौल तैयार कर रही है’

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