साहित्य

इसी सबब से फ़लक़ का गिला नहीं करते,,,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर उनकी नज़्म

इसी सबब से फ़लक़ का गिला नहीं करते,,,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर उनकी नज़्म

15th February 2019 at 5:25 am 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============== मुहब्बत, बग़ावत, ख़ुद्दारी और इंसानियत की जीत में यकीन के बेमिसाल शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर, उनकी यह नज़्म जो, लगता है, देश के आज के हालात पर ही लिखी गयी है : निसार मैं तिरी गलियों के ऐ वतन कि जहाँ चली है […]

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#मसख़रा_2014 : यह मसख़रा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है

#मसख़रा_2014 : यह मसख़रा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है

9th February 2019 at 4:15 pm 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============== मसखरे आम तौर पर सीधे-सादे गरीब लोग हुआ करते हैं ! पर यह मसखरा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है I दरअसल यह मसखरा है ही नहीं ! अपनी समझ से तो यह गुरु-गंभीर बातें करता है, पर इसकी समझ ही ऐसी है कि इसकी […]

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सच में बहुत #प्यारा आदमी था,,,और मटका #कुल्फ़ी भी बहुत स्वादिष्ट थी

सच में बहुत #प्यारा आदमी था,,,और मटका #कुल्फ़ी भी बहुत स्वादिष्ट थी

8th February 2019 at 11:12 pm 0 comments

स्वामी सूर्यदेव =========== अच्छे लोगों से #भरी है यह दुनिया,, चित्र दो महीने पहले #जयपुर का है,, मुझे एक प्रोग्राम में जाना था और ट्रैन लेट थी तो देर से पहुंचा,, बाहर निकलकर ऑटो रिक्शा से पूछा तो मुझे थोड़ी जल्दबाजी में देखकर 200 रुपये मांगने लगा,, मैंने एक #पैरों […]

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एक प्रेमी हमेशा अपनी प्रेमिका के लिए पहले और अपने लिए बाद में सोचता है

एक प्रेमी हमेशा अपनी प्रेमिका के लिए पहले और अपने लिए बाद में सोचता है

8th February 2019 at 7:23 pm 0 comments

Kavita Krishnapallavi =========== प्रेम के बारे में बाल्ज़ाक के कुछ विचारप्रवण, कुछ भावप्रवण और कुछ विनोदपूर्ण विचार . ( बाल्ज़ाक समाज की सतह के नीचे सक्रिय आर्थिक संबंधों, सामाजिक संबंधों और अपने समय के राजनीतिक परिदृश्य के अनन्य चितेरे थे और इस नाते उन्होंने अपने लेखन के ज़रिये बुर्जुआ समाज […]

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हिन्दू- मुस्लिम एकता का उदाहरण : लोक गायक शाहबुद्दीन जोगी का शिव भजन, ‘अगड़ बम-बम बम-बम…बम-बम…बम लहरी’ सुना है आपने : VIDEO

हिन्दू- मुस्लिम एकता का उदाहरण : लोक गायक शाहबुद्दीन जोगी का शिव भजन, ‘अगड़ बम-बम बम-बम…बम-बम…बम लहरी’ सुना है आपने : VIDEO

8th February 2019 at 4:34 am 0 comments

साहित्यकार, इतिहासकार, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिवक्ता,,,,वो इनमे से कुछ भी नहीं हैं,,,वो केवल एक ”वक्ता” हैं,,,उनका ज्ञान किताबों पर आधारित नहीं है, वो ज्ञान जैसे,,,मैंने कहा, तुमने सुना, वो किसी और को सुनाया, उसने कहीं और उसको सुनाया,,,सुनाते सुनाते,,,जो था वो कुछ का कुछ हो गया,,,ये ज्ञान नहीं ‘किस्से/कहानियां/मग़ज़खोरी’ होती हैं,,,उनको […]

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अल सल्‍वाडोर के क्रान्तिकारी कवि रोके दाल्‍तोन की कविता – ”तुम्‍हारी तरह”

अल सल्‍वाडोर के क्रान्तिकारी कवि रोके दाल्‍तोन की कविता – ”तुम्‍हारी तरह”

5th February 2019 at 2:53 am 0 comments

क्रान्तिकारी गीत ▼ अल सल्‍वाडोर के क्रान्तिकारी कवि रोके दाल्‍तोन की कविता – तुम्‍हारी तरह तुम्हारी तरह मैं भी प्यार करता हूँ प्यार से, ज़‍िन्दगी से, चीज़ों की भीनी-भीनी खुशबू से, जनवरी के दिनों के आसमानी भूदृश्‍यों से। मेरा ख़ून भी खौलता है और मैं हँसता हूँ उन आँखों से […]

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छि: -त्थू – धिक्…लानत है! इन चेहरों को पहचानिये

छि: -त्थू – धिक्…लानत है! इन चेहरों को पहचानिये

3rd February 2019 at 5:48 am 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============ छि: -त्थू – धिक् … लानत है! इन चेहरों को पहचानिये! ये फ़ासिस्ट बर्बरों और हत्यारों के दरबार में राग दरबारी सुनाने वालों के चेहरे हैं। जुगुप्सा और घृणा पैदा करने वाली इनकी हँसी हत्यारों की हँसी से कम नहीं है। इनमें जो पुराने क्रांतिकारी जनकवि हैं, […]

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पन्नी में पैसा नहीं मैडम “बाल” है

पन्नी में पैसा नहीं मैडम “बाल” है

30th January 2019 at 4:26 am 0 comments

Manisha Shree ================ ———————————— अरे ओ भैया पन्नी में पैसा क्यों रखा है ?पॉकेट में क्यों नहीं रखा ?बेल्ट में ऐसे बांध रखे हो जैसे कोई बहुत कीमती सामान हो।यह सवाल मैं नहीं रीता जी ने पूछा।बात समझ नहीं आई न समझाती हूँ। कटिहार के किशनगंज का एक निवासी अपने […]

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मैं उसके मरने पर उसे कोई श्रद्धांजलि नहीं दे पाती : मुर्दा ख़ामोशी में डूबे लेखकों व संगठनों को हार्दिक धिक्कार

मैं उसके मरने पर उसे कोई श्रद्धांजलि नहीं दे पाती : मुर्दा ख़ामोशी में डूबे लेखकों व संगठनों को हार्दिक धिक्कार

30th January 2019 at 3:56 am 0 comments

बेशर्मो ! अब क्या सफाई दोगे ? नहीं-नहीं, तुम अब भी कोई न कोई सफाई दे ही दोगे ! गलदोदई की कोई लिमिट नहीं होती ! तुमलोग अगर जनवाद और प्रगतिशीलता की केंचुली उतार देते तो साहित्य का और आने वाली पीढ़ियों का कितना भला होता ! पर तुम ऐसा […]

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एक लहूज़दा जन्नत में…एक ख़ौफ़!जो एक कश्मीरी माँ-बाप, एक कश्मीरी बहन और बीबी को दहला देता है…

एक लहूज़दा जन्नत में…एक ख़ौफ़!जो एक कश्मीरी माँ-बाप, एक कश्मीरी बहन और बीबी को दहला देता है…

27th January 2019 at 10:29 pm 0 comments

Arun Maheshwari =============· एक लहूज़दा जन्नत में ! सरला माहेश्वरी ============ किस डॉक्टर किस चौखट, किस दरवाज़े किस दरगाह पर नहीं दी दस्तक किस खिड़की किस रेलिंग पर बाँधे नहीं मन्नत के धागे कि कोई तो सुने कि फूटे भाग जागे कि उनकी सूनी जिंदगी में एक फूल खिलखिलाए ! […]

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