साहित्य

माह पीशानी : कहानी : पार्ट 4

माह पीशानी : कहानी : पार्ट 4

21st December 2018 at 11:02 pm 0 comments

आपको अवश्य याद होगा कि प्राचीन समय में एक आदमी अपनी पत्नी और बेटी शहरबानो के साथ बहुत अच्छी तरह रह रहा था कि एक दिन शहरबानो ने अपनी शिक्षिका “मुल्लाजी” के उकसावे में आकर अपनी मां को सिरके के घड़े में डाल दिया और उसके बाद मुल्लाजी उसकी सौतेली […]

Read more ›
“एक सोच…”

“एक सोच…”

17th December 2018 at 4:34 pm 0 comments

Mohd Anwar Salim Sayyad ============ “एक सोच…” पत्नी अपने पति से कहती है… पत्नी- पता नहीं क्या हो गया है हमारी पायल को, कल रात को खाना भी नहीं खाया, और रो भी रही थी…अभी सुबह जगाने गई तो फिर से रो रही थी…वजह पूछी तो, बस इतना कही की…PLEASE […]

Read more ›
मैं तिश्नगी…मैं “तिश्नगी”…… एक अधूरा “ख्वाब”!

मैं तिश्नगी…मैं “तिश्नगी”…… एक अधूरा “ख्वाब”!

12th December 2018 at 7:41 pm 0 comments

Chaitali Khattar 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 मैं तिश्नगी… मुक़म्मल मुझमें कभी कुछ भी ना था, हर लम्हा एक अनजानी सी प्यास हर खुशी एक अधूरा सा संतोष हर रिश्ता एक अजनबी कहानी हर एहसास एक अनचाहा जज़बात मैं “तिश्नगी”…… एक अधूरा “ख्वाब”! 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 🌺💝🌺ये दायरे ये बन्दिशें किसी और पे थोपो मैं हवा […]

Read more ›
अंधे राजधर्म की ख़ातिर प्राण-हवन करना होगा……

अंधे राजधर्म की ख़ातिर प्राण-हवन करना होगा……

10th December 2018 at 3:50 am 0 comments

दीपशिखा-Deepshikha Sagar Chindwara, Madhya Pradesh, India ================= बस यूँ ही- सत्य पंथ के राही होकर झूठ वरण करने वाले, नैतिकता के हामी होकर,धर्म- हनन करने वाले, शर-शैया पर भीष्म पड़े हो, मृत्यु-वरण करना होगा, अंधे राजधर्म की खातिर प्राण-हवन करना होगा…… 1- एक शपथ गंगा सुत तुमने, बरसों पहले खाई […]

Read more ›
मैं मुसलमान को गाली क्यों नहीं देती…वेदिका सिंह

मैं मुसलमान को गाली क्यों नहीं देती…वेदिका सिंह

5th December 2018 at 3:35 pm 0 comments

वेदिका सिंह ____________ पिछले पचीस सालों में मैंने ऐसा कोई मुसलमान(सारे मुल्ले मुसलमान यानी ईमान के पक्के नहीं होते) नहीं देखा, जो गाली खाने योग्य हो। गली के आशिक़ों के बारे में मैं पहले बता चुकी हूँ, वो अनपढ़ क़ुरान क्या पढ़ेंगे उर्दू की वर्णमाला तक नहीं जानते।मदरसे से बस […]

Read more ›
प्रखर और जागरुक पत्रकार, अँधेरे समय में प्रतिवाद और प्रतिरोध की बुलंद आवाज़ रवीश कुमार को उनके जन्मदिन पर बधाई

प्रखर और जागरुक पत्रकार, अँधेरे समय में प्रतिवाद और प्रतिरोध की बुलंद आवाज़ रवीश कुमार को उनके जन्मदिन पर बधाई

5th December 2018 at 1:00 am 0 comments

Arun Maheshwari ============== आज पाँच दिसम्बर ! हमारे समय के प्रखर और जागरुक पत्रकार, अँधेरे समय में प्रतिवाद और प्रतिरोध की बुलंद आवाज रवीश कुमार को उनके जन्मदिन पर सरला की इस कविता के साथ बहुत बहुत बधाई। तदात्मानम सृज्याहम !! सरला माहेश्वरी ओ रवीश कुमार ! क्या दिखा रहे […]

Read more ›
मेरा यक़ीन तो जम्हूरियत से बहुत पहले ही उठ गया था….

मेरा यक़ीन तो जम्हूरियत से बहुत पहले ही उठ गया था….

4th December 2018 at 2:10 am 0 comments

Anwar Khursheed ======== हाजी साहब के बड़े बेटे का बयान है कि मेरा यक़ीन तो जम्हूरियत से बहुत पहले ही उठ गया था…. कहने लगा कि यह उन दिनों की बात है जब एक रात को मैं और मेरे बाकी तीनों बहन भाई अम्मी अब्बू के साथ मिल कर रात […]

Read more ›
ਜੀ ਆਇਆ ਨੂੰ..जी आया नूँ : कुछ सिसकियाँ थी जो आज बन्द कमरे से बाहर सुनाई दे रहीं थीं

ਜੀ ਆਇਆ ਨੂੰ..जी आया नूँ : कुछ सिसकियाँ थी जो आज बन्द कमरे से बाहर सुनाई दे रहीं थीं

4th December 2018 at 1:57 am 0 comments

रश्मि तारिका Poets & Writers From Hisar, Haryana ========== ਜੀ ਆਇਆ ਨੂੰ..जी आया नूँ   घर में निस्तब्धता को तोड़ती केवल कुछ सिसकियाँ थी जो आज बन्द कमरे से बाहर सुनाई दे रहीं थीं।बाहर हॉल में अरविंद जी पत्नी के साथ खामोश बैठे अपनी बेटी के बाहर आने का इंतज़ार […]

Read more ›
तन्हाई कभी खलती थी, अब उसी से प्यार हो गया

तन्हाई कभी खलती थी, अब उसी से प्यार हो गया

3rd December 2018 at 1:20 am 0 comments

वेदिका सिंह ======== तन्हाई कभी खलती थी,अब उसी से प्यार हो गया।कोई साथ ना हो तो अच्छा लगता है अपनी किताबों में खोना। पन्ने पलटते वक़्त आवाज़ सुनाई देती है सन्नाटे की।ख़ामोशी अब अक्सर मुझसे बातें करती है।अब तन्हाई ही मेरी दोस्त है, अकेलापन ही मेरा जीवनसाथी बनेगा।चुन लिया है […]

Read more ›
मान जाओ! तुम ‘वो’ काम शुरू कर दो, किसी को ख़बर भी नहीं होगी”

मान जाओ! तुम ‘वो’ काम शुरू कर दो, किसी को ख़बर भी नहीं होगी”

1st December 2018 at 11:40 pm 0 comments

Pratima Jaiswal ============ “बेटी तुम नौकरी करोगी तो लोग तरह-तरह के नाम देंगे, हमारे घरानों में नौकरी नहीं करते बल्कि नौकर रखे जाते हैं। मान जाओ! तुम ‘वो’ काम शुरू कर दो, किसी को खबर भी नहीं होगी। ” “तो शरीर बेचने से आपकी इज्जत कम नहीं होगी?” “कम से […]

Read more ›