साहित्य

#दिल्ली दलदलों की!

#दिल्ली दलदलों की!

31st October 2018 at 10:30 am 0 comments

Shashi Pandey ============ दिल्ली के नखरे होना लाजिम है दिल्ली नाम से स्त्रिलिंग जो है नखरे तो होंगे ही । एक गाना आया था सोंड़ी के नखरे करके …था तो सोड़ी के लिए लेकिन दिल्ली की हालत पे ये बात दिल्ली को जम गयी । दिल्ली की हर बात निराली […]

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अमृता प्रीतम की पुण्यतिथि 31 अक्टूबर पर विशेष

अमृता प्रीतम की पुण्यतिथि 31 अक्टूबर पर विशेष

31st October 2018 at 12:21 am 0 comments

मैं तुझे फिर मिलूंगी -फ़िरदौस ख़ान ======= अमृता प्रीतम की रचनाओं को पढ़कर हमेशा सुकून मिलता है. शायद इसलिए कि उन्होंने भी वही लिखा जिसे उन्होंने जिया. अमृता प्रीतम ने ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को अपने शब्दों में पिरोकर रचनाओं के रूप में दुनिया के सामने रखा. पंजाब के गुजरांवाला […]

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*उम्मीदों और विश्वास के दिये जलाता लेखक*

*उम्मीदों और विश्वास के दिये जलाता लेखक*

28th October 2018 at 5:07 pm 0 comments

“आमतौर पर कहा जाता है कि “निजी तौर” पर “लेखक(Writer)” अक़्सर “निराश” होते हैं। जो “ज़िन्दगी” की “उलझनों”, “संघर्षों”, में “तपकर” लिखना शुरू करते हैं। “दरअसल, “लेखक” जब “लिखता” है तो उसके लेखन में “निराशा” के “भाव” के साथ-साथ “आशा” और “विश्वास” की “झलक” भी दिखाई देती है, एक “सच्चा […]

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चाँद है कि …भूख है, कि आग है…..

चाँद है कि …भूख है, कि आग है…..

28th October 2018 at 1:59 am 0 comments

सरला माहेश्वरी ============= चेहरा है कि चाँद है चाँद है कि चूल्हा है चाँदनी है कि राग है राग है कि आग है भूख है की आग है आग है कि रोटी है चाँद है कि भूख है, कि झुलसी हुई ‘सुकांत’ की रोटी ‘पूर्णिमार चाँद जैनो झलसानो रुटि’ ओ […]

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“बेटा, ये बाल यूँ ही सफ़ेद नही हुए है”

“बेटा, ये बाल यूँ ही सफ़ेद नही हुए है”

26th October 2018 at 7:03 pm 0 comments

Aayaan Rana 🙄🙄🙄🙄🙄🙄👇👇👇👇👇 एक वृद्ध ट्रेन में सफर कर रहा था, संयोग से वह कोच खाली था। तभी 8-10 लड़के उस कोच में आये और बैठ कर मस्ती करने लगे। एक ने कहा, “चलो, जंजीर खीचते है”. दूसरे ने कहा, “यहां लिखा है 500 रु जुर्माना ओर 6 माह की […]

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“माह पीशानी” : कहानी : पार्ट 1

“माह पीशानी” : कहानी : पार्ट 1

26th October 2018 at 2:09 am 0 comments

प्राचीन समय में एक व्यक्ति था उसके पास एक पत्नी थी जिसे वह बहुत चाहता था उसके पास शहरबानो नाम की एक बच्ची भी थी जो बहुत सुन्दर थी और माता-पिता इस बच्ची को देख कर बहुत प्रसन्न होते थे। समय बीतता गया यहां तक कि शहरबानो सात साल की […]

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”क्या अब आपको मेरी याद नहीं आती”

”क्या अब आपको मेरी याद नहीं आती”

23rd October 2018 at 3:55 am 0 comments

Pratima Jaiswal ========= बॉलीवुड फिल्मों में प्यार में धोखा खाए या बेवफाई का दर्द झेलते सीन्स की बात करूं, तो दो फिल्मों के दो ऐसे सीन्स आज तक सबसे अलग लगे हैं। जिसमें शायद थोड़ी हंसी, बचपना दिखाते हुए बहुत गहराई से बात कह दी गई है। पहली फिल्म है […]

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नहीं आता कोई राम!!!

नहीं आता कोई राम!!!

20th October 2018 at 12:58 am 0 comments

sarla maheshwari ================ नहीं आता कोई राम ! ये जो खड़ी हैं संकरी गली के दोनों ओर ये भी तो होंगी किसी माँ के दिल्ली कोर रहा होगा इनका भी तो कोई बाप फिर भी जीवन क्यों है इनका अभिशाप आदमियों के इस जंगल में जुगनू की तरह रातों में […]

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इसीलिये Me Too !

इसीलिये Me Too !

20th October 2018 at 12:26 am 0 comments

By : सरला माहेश्वरी ======= इसीलिये Me Too ! नहीं…नहीं… तुम्हारी बंद मुट्ठी में अब नहीं सिसकूँगी अपनी सारी घृणा जमा हुआ आक्रोश ले किसी सुनामी की तरह सारे अवरोधों को तोड़ बाहर निकल आऊँगी मैं ! अब इन आँखों में तुम्हें लाचारी नहीं दहकती हुई आग दिखेगी याचना करते […]

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मीटू को नैतिकता का पैमाना न बनाइए!

मीटू को नैतिकता का पैमाना न बनाइए!

17th October 2018 at 3:31 am 0 comments

सोनाली मिश्र ============== आज चूंकि हम सब मीटू की चर्चा कर ही रहे हैं, और इरा त्रिवेदी और विंता नंदा आदि के कारण एक एक वर्ग इसका मज़ाक उड़ा ही रहा है, ऐसे में मैं फिर से कहना चाहूंगी कि यौन शोषण, या उत्पीडन जैसे मुद्दे केवल एक उच्च वर्ग […]

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