साहित्य

उस औरत के हुस्न की सबसे बड़ी वजह उसके…@

उस औरत के हुस्न की सबसे बड़ी वजह उसके…@

5th November 2017 at 12:43 am 0 comments

एक ग़रीब.शख़्स • एक ग़रीब शख़्स की शादी निहायत हसीन-ओ-जमील औरत से हो गई। उस औरत के हुस्न की सबसे बड़ी वजह उसके लंबे घने स्याह बाल थे, जिनकी फ़िक्र सिर्फ़ उसे ही नहीं बल्कि उन दोनों को रहती थी। एक दिन बीवी ने अपने शौहर से कहा कि “कल […]

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व्यापारी और दैव्य की कहानी – पार्ट 4

व्यापारी और दैव्य की कहानी – पार्ट 4

3rd November 2017 at 8:19 pm 0 comments

एक बार वह यात्रा के लिए घर से बाहर जाता है। रास्ते में थक गया तो विश्राम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। जो रोटी और खजूर उसके साथ थी उसे उसने खाया और खजूर के बीज को ज़मीन पर फेंक दिया। इतने में एक दैत्य प्रकट […]

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“इस तरह उन्हें ये भी लगेगा कि हम औरतों ही के हक़ में काम कर रहे हैं”

“इस तरह उन्हें ये भी लगेगा कि हम औरतों ही के हक़ में काम कर रहे हैं”

3rd November 2017 at 2:13 am 0 comments

“हाँ, बताओ ज़रा मुझे। पहले तुम्हे उससे शादी करनी पड़ेगी। जिसका मतलब है उसके घर वालों को, माँ को, शक्की बाप को, सबको मनाना। फिर शादी में खर्च करना, मेहर देना वगैरा वगैरा। और ये तो बस शुरुआत है। कौन चाहता है जिंदगी भर एक औरत से बंधे रहना, उसकी […]

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और जब यही उनकी दिलरुबा, बेटी ,बहन, माँ के साथ करता है तो…!!

और जब यही उनकी दिलरुबा, बेटी ,बहन, माँ के साथ करता है तो…!!

2nd November 2017 at 1:28 am 0 comments

सोनिया गौतम =============== कितने दोगले है लोग bio में लिखेंगे खुद को इंसान बनाने की कोशिश, बदलाव का सिपाही, बस कुछ नहीं सिर्फ विचार, परिवर्तन की लड़ाई, खुद को पहचाने की कोशिश, समाजिक कार्यकर्त्ता ,बस एक कदम अच्छाई की ओर,एक योध्या, क्रांतिकारी इत्यादि … और मिलेंगे कैसे कैसे किराँतिकारी एक […]

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बेटी …बहुत प्यारी होती हैं बेटियां, न जाने लोग बोझ क्यों समझते हैं!

बेटी …बहुत प्यारी होती हैं बेटियां, न जाने लोग बोझ क्यों समझते हैं!

1st November 2017 at 11:14 pm 0 comments

बेटी शादी के मंडप से… ससुराल जाती है तब ….. पराई नहीं लगती. मगर …… जब वह मायके आकर हाथ मुंह धोने के बाद सामने टंगे टाविल के बजाय अपने बैग से छोटे से रुमाल से मुंह पौंछती है , तब वह पराई लगती है. जब वह रसोई के दरवाजे […]

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कूडेदान का सच

कूडेदान का सच

29th October 2017 at 10:17 pm 0 comments

Shikha Singh ============ कूडेदान का सच झाँक कर देखा खूड़ादान तो वो मुस्कराता नजर आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे वो खिल्ली उडा़ रहा हो फेके गये कचरे से गंध आ रही थी मगर वो गंध उस कचरे की नही समाज के सोच की गंध थी सारा खूड़ा […]

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‘शीर्षासन’

‘शीर्षासन’

29th October 2017 at 6:50 pm 0 comments

‘शीर्षासन’ इन दिनों शांत है मन पत्थर की मूर्ति की तरह अचल और अटल इन दिनों भूखे गिद्ध और बाज उतरते हैं मेरे सर पर और उठा कर ले जाते हैं मासूम बच्चों को कि घबराई सी भागती हैं माऐं पीछा करती हुईं कि उड़े चले जाते हैं शिकारी आसमानों […]

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#एक_मुसलमान_की_आप बीती…शुक्लाजी का शुक्रिया!

#एक_मुसलमान_की_आप बीती…शुक्लाजी का शुक्रिया!

29th October 2017 at 2:58 am 0 comments

जुमे की नमाज़ पढ़ने जाने के लिए मैं जल्दबाज़ी में अपने दफ़्तर से बाहर आया। मगर ऑटो मिलते ही याद आया कि मैं अपना पर्स ऑफिस में ही भूल गया हूं। मैंने ऑटोवाले से गुज़ारिश की कि वह मुझे मस्जिद तक पहुंचा दें। फिर वहीं 15-20 मिनट इंतज़ार करें और […]

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एक ही विषय पर 5 शायरों का अलग नज़रिया, ज़रूर पढें!

एक ही विषय पर 5 शायरों का अलग नज़रिया, ज़रूर पढें!

27th October 2017 at 11:39 pm 0 comments

‎Mohd Asif Khan‎ ———————– एक ही विषय पर 5 शायरों का अलग नजरिया. जरूर पढें :- आप उर्दू शायरी की महानता की दाद देने पर मज़बूर हो जाएंगे. 1- *Mirza Ghalib*: 1797 – 1869. “शराब पीने दे मस्जिद में बैठ कर, या वो जगह बता जहाँ ख़ुदा नहीं।” इसका जवाब […]

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व्यापारी और दैव्य की कहानी – पार्ट 3

व्यापारी और दैव्य की कहानी – पार्ट 3

27th October 2017 at 9:45 pm 0 comments

हमने कहा था कि एक व्यापारी था जिसने बहुत यात्रा की थी। एक बार वह यात्रा के लिए घर से बाहर जाता है। रास्ते में थक गया तो विश्राम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। जो रोटी और खजूर उसके साथ थी उसे उसने खाया और खजूर […]

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