साहित्य

#सांस्कृतिक_नरसंहार : मानव और संस्कृति के हत्यारे!

#सांस्कृतिक_नरसंहार : मानव और संस्कृति के हत्यारे!

12th November 2017 at 11:41 pm 0 comments

अजेष्ठ त्रिपाठी ————– #सांस्कृतिक_नरसंहार — वर्तमान समय में कई समृद्ध सभ्यताओं का वजूद खत्म हो गया है, और उनको समाप्त करने के पीछे संसार के दो सबसे बड़े इब्राहीमी पंथों – इस्लाम और ईसाई – के चरमपंथियों का सक्रिय योगदान है। इन पंथों की ऐसी प्रवृति के पीछे उनकी विस्तारवादी […]

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मेरे बड़े होने के दौरान मेरे साथ वो सब कुछ हुआ जो किसी…!!!

मेरे बड़े होने के दौरान मेरे साथ वो सब कुछ हुआ जो किसी…!!!

12th November 2017 at 7:20 pm 0 comments

Sikander Kaymkhani ================ श्रेणिक मूथा|| अक्सर ऐसा होता है कि हमारे आस-पास हुई कोई विचलित कर देने वाली घटना हमें उससे जुड़े अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों की याद दिला देती है। आराधना समदरिया की मौत ने मेरे लिए ऐसा ही किया। मैं अपनी कहानी को इस तरह बयाँ नहीं […]

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…बस जहां चाह वहाँ राह…ठान लिया…!!!

…बस जहां चाह वहाँ राह…ठान लिया…!!!

12th November 2017 at 12:49 am 0 comments

■ Sara Nilofar ============= सेठ रमेश मोटवानी आज कुछ परेशान थे। उसके अकाउंटेंट ने काम छोड़ दिया था। और न्यूज़ पेपर मे अकाउंटेंट के लिए इश्तहार देने के बावजूद जो दो उम्मीदवार आए थे। उनका म्यार तस्सलीबक्स नहीं था ।अकाउंटस का काम टेली सॉफ्टवेयर मे पूरा करके सी ए को […]

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नकली – हीर_रांझा कहानी गौर फ़रमाये दोस्तो!

नकली – हीर_रांझा कहानी गौर फ़रमाये दोस्तो!

11th November 2017 at 3:01 am 0 comments

Firoj Khan ============ नकली – हीर -रांझा कहानी गौर फरमाये दोस्तो अच्छा लगे तो sare कॉपी करे जोगी बनने के बाद रांझा बालनाथ को अलविदा कह टिल्ला से रंगपुर की तरफ चला। रांझा का नस नस प्रेम में डूबा हुआ था। वह जब रंगपुर के इलाके में पहुंचा तो वहां […]

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सऊदी अरब के शहर बरीदह मे पेश आने वाला एक सच्चा वाकिया

सऊदी अरब के शहर बरीदह मे पेश आने वाला एक सच्चा वाकिया

11th November 2017 at 2:12 am 0 comments

‎Salman Siddiqui‎ ================= एक सऊदी व्यापारी का बयान है कि मैं और मेरा दोस्त शहर बरीदह में व्यापार करते थे, एक दिन में जुमे की नमाज के लिए बरीदह की मस्जिद अलकबीर में गया जुमे की नमाज के बाद जनाज़ा का एलान हुआ नमाज़ ए जनाज़ा अदा की ग़ई। लोगों […]

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वह रास्ते भर मस्तमौला तरीके से ऑटो चलाता रहा और बज रहे गाने गुनगुनाता रहा

वह रास्ते भर मस्तमौला तरीके से ऑटो चलाता रहा और बज रहे गाने गुनगुनाता रहा

10th November 2017 at 11:58 pm 0 comments

Parul Jain ================= हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो अपने प्रफेशन या अपने काम से खुश नहीं हैं और गाहे बगाहे उसे कोसते रहते हैं। कभी हमें लगता है कि जो काम हम कर रहे हैं, वो हमारे लायक नहीं है तो कभी हम उससे होने वाली […]

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा – जैसा नाम वैसा बुलंद मर्तबा अल्लाह ने अल्लामा इक़बाल की दिया!

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोसिताँ हमारा – जैसा नाम वैसा बुलंद मर्तबा अल्लाह ने अल्लामा इक़बाल की दिया!

10th November 2017 at 2:33 am 0 comments

होगा कोई ऐसा भी जो ग़ालिब को न जाने इंसान तो अच्छा है पर बदनाम बहुत है मिर्ज़ा ग़ालिब के इंतकाल के बाद लोगों को लगता था कि अब कभी भारत की धरती पर कोई और ग़ालिब जैसा पैदा न होगा, लकिन जब अल्लाह एक दरवाज़ा बंद करता है तो […]

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लड़कों की जींस हम लडकियां पहनती है तो….!!!

लड़कों की जींस हम लडकियां पहनती है तो….!!!

9th November 2017 at 2:21 am 0 comments

Firoj Khan =============== एक लड़की कह रही थीं की लड़कों की जींस हम लडकियां पहनती है तो लड़के हमसे जलते है इस लिये उन्हे लड़कियों का #bra पहन लेना चाहिए ,,,,,,, फिर अल्ट्रा प्रोग्रेसिव महिलाएँ अकसर ये मानसिक दिव्यांगता भरा कुतर्क देती हैं कि ‘कपड़े नही सोच बदलो,,,,, पुरुष अपनी […]

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नोटबंदी का गीत….*पंकज श्रीवास्तव*

नोटबंदी का गीत….*पंकज श्रीवास्तव*

8th November 2017 at 8:09 pm 0 comments

नोटबंदी का गीत ———————- दरबारी सब चैन से सोये, राजा का मन है चौक-चौराहे परजा रोयेे, राजा का मन है जिसकी मेहनत के मोती को डाकू लूट गये वो अपनी किस्मत को रोये, राजा का मन है बंजर धरती में गुलमोहर असगुन लगते हैं क़ैद में हो जो सपने बोये, […]

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इन चर्मकारों ने एक बेर बड़ा यज्ञ किया था, उसी यज्ञ में से चर्मण्ववती निकली

इन चर्मकारों ने एक बेर बड़ा यज्ञ किया था, उसी यज्ञ में से चर्मण्ववती निकली

8th November 2017 at 6:07 am 0 comments

भारतेंदु हरिश्चंद्र (एक पंडित जी और एक क्षत्री आते हैं) क्षत्री : महाराज देखिये बड़ा अंधेर हो गया कि ब्राह्मणों ने व्यवस्था दे दी कि कायस्थ भी क्षत्री हैं। कहिए अब कैसे कैसे काम चलेगा। पंडित : क्यों, इसमें दोष क्या हुआ? “सबै जात गोपाल की” और फिर यह तो […]

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