साहित्य

… सपनों तथा वास्तविकता के टकराव से कोई हानि नहीं होती

… सपनों तथा वास्तविकता के टकराव से कोई हानि नहीं होती

6th March 2019 at 10:36 am 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============= सपने देखने के बारे में पीसारेव के विचार मार्फ़त लेनिन . ( व्यवहारवादी (प्रैग्मेटिस्ट) और दुनियादार लोग “ठोस वास्तविकता” के करीब होने के नाम पर सपना देखने की खिल्ली उड़ाते हैं ! जिनके पास कभी कोई भविष्य-स्वप्न नहीं होता, इरादों और मंसूबों की कोई ऊँची उड़ान भी […]

Read more ›
टैंक आगे बढें कि पीछे हटें, कोख धरती की बाँझ होती है : साहिर लुधियानवी

टैंक आगे बढें कि पीछे हटें, कोख धरती की बाँझ होती है : साहिर लुधियानवी

3rd March 2019 at 2:44 pm 0 comments

संजीत कुमार ==== साहिर लुधियानवी ख़ून अपना हो या पराया हो नस्ले-आदम का ख़ून है आख़िर जंग मग़रिब में हो कि मशरिक में अमने आलम का ख़ून है आख़िर बम घरों पर गिरें कि सरहद पर रूहे-तामीर ज़ख़्म खाती है खेत अपने जलें या औरों के ज़ीस्त फ़ाक़ों से तिलमिलाती […]

Read more ›
युद्ध की चार मंज़िलों और उसके नतीजों को दिखाता हुआ जर्मन चित्रकार ओट्टो डिक्स की कलाकृति : ब्रेष्ट की कुछ छोटी कविताएँ

युद्ध की चार मंज़िलों और उसके नतीजों को दिखाता हुआ जर्मन चित्रकार ओट्टो डिक्स की कलाकृति : ब्रेष्ट की कुछ छोटी कविताएँ

28th February 2019 at 7:57 pm 0 comments

Kavita Krishnapallavi ========= बेर्टोल्ट ब्रेष्ट की कुछ छोटी कविताएँ . (1) लड़ाई का कारोबार एक घाटी पाट दी गयी है और बना दी गयी है एक खाई I (2) यह रात है विवाहित जोड़े बिस्तरों में लेटे हैं जवान औरतें अनाथों को जन्म देंगी I (3) ऊपर बैठने वालों का […]

Read more ›
ग़ालिब की सालगिरह के मौक़े पर मुनअक़िद मुशायरे के लिए कही गई एक तरही ग़ज़ल

ग़ालिब की सालगिरह के मौक़े पर मुनअक़िद मुशायरे के लिए कही गई एक तरही ग़ज़ल

25th February 2019 at 7:48 pm 0 comments

Ashkara Khanam Kashf ============== आदाब अहबाब ग़ालिब साहब की सालगिरह के मौक़े पर मुनअक़िद मुशायरे के लिए कही गई एक तरही ग़ज़ल: “रहना है ग़मे ज़ीस्त का साया कोई दिन और साँसों से है अब जिस्म का रिश्ता कोई दिन और कुछ रोज़ चराग़ों की हिफ़ाज़त है ज़ुरूरी बाक़ी है […]

Read more ›
भटके राजा की प्राथमिकता : रामराज, हिंदूराष्ट्र, मनुराष्ट्र!! मेरे हक़ की लड़ाई….तेरा धर्म युद्ध हो गया!!

भटके राजा की प्राथमिकता : रामराज, हिंदूराष्ट्र, मनुराष्ट्र!! मेरे हक़ की लड़ाई….तेरा धर्म युद्ध हो गया!!

23rd February 2019 at 4:27 am 0 comments

Zulaikha Jabeen रामराज, हिंदूराष्ट्र, मनुराष्ट्र क्या पुकारें…..!! बड़ा ही दुःख का विषय है, अटल बिहारी जी ने अपनी पेंशन बरकरार रखते हुए अर्धसैनिक बलों की पेंशन बन्द कर दी थी, आज शहीद हुए 40 जवान जो NPS के दायरे मे थे उनकी विधवाओं को इस बलिदान के बदले जीवन यापन […]

Read more ›
मैं ज़रूर थोड़ा बहुत ऐसा करती हूं, वो भी छोड़ दूंगी….”’

मैं ज़रूर थोड़ा बहुत ऐसा करती हूं, वो भी छोड़ दूंगी….”’

21st February 2019 at 9:32 pm 0 comments

आज मन विचित्र तरीके से महसूस करने लगा है!! मैं कई चीजों को जाने देती हूं, कई लोगों को अवॉइड करती हूं, पहले मैं किसी से भी भिड़ जाती थी, अब अपनी ऊर्जा बचाती हूं. मैं किसी बहस में नहीं पड़ना चाहती क्योंकि उसके बदले कोई पैसा नहीं मिलता, कोई […]

Read more ›
प्रेमचंद और किसान आंदोलन

प्रेमचंद और किसान आंदोलन

19th February 2019 at 4:04 am 0 comments

वाया : Sikander Kaymkhani =============== Dr Raju Ranjan Prasad प्रेमचंद की रचना की भाषा किसान-चेतना और संघर्ष की भाषा है। उन्हें समझौते की भाषा में तनिक विश्वास न था। वे आन्दोलन के दौर के लेखक थे। यह अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ एक व्यापक जनांदोलन का दौर था। प्रेमचंद इस दौर […]

Read more ›
इसी सबब से फ़लक़ का गिला नहीं करते,,,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर उनकी नज़्म

इसी सबब से फ़लक़ का गिला नहीं करते,,,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर उनकी नज़्म

15th February 2019 at 5:25 am 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============== मुहब्बत, बग़ावत, ख़ुद्दारी और इंसानियत की जीत में यकीन के बेमिसाल शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के 108वें जन्मदिन पर, उनकी यह नज़्म जो, लगता है, देश के आज के हालात पर ही लिखी गयी है : निसार मैं तिरी गलियों के ऐ वतन कि जहाँ चली है […]

Read more ›
#मसख़रा_2014 : यह मसख़रा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है

#मसख़रा_2014 : यह मसख़रा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है

9th February 2019 at 4:15 pm 0 comments

Kavita Krishnapallavi ============== मसखरे आम तौर पर सीधे-सादे गरीब लोग हुआ करते हैं ! पर यह मसखरा दरअसल बर्बर हत्यारों के गिरोह का सरगना है I दरअसल यह मसखरा है ही नहीं ! अपनी समझ से तो यह गुरु-गंभीर बातें करता है, पर इसकी समझ ही ऐसी है कि इसकी […]

Read more ›
सच में बहुत #प्यारा आदमी था,,,और मटका #कुल्फ़ी भी बहुत स्वादिष्ट थी

सच में बहुत #प्यारा आदमी था,,,और मटका #कुल्फ़ी भी बहुत स्वादिष्ट थी

8th February 2019 at 11:12 pm 0 comments

स्वामी सूर्यदेव =========== अच्छे लोगों से #भरी है यह दुनिया,, चित्र दो महीने पहले #जयपुर का है,, मुझे एक प्रोग्राम में जाना था और ट्रैन लेट थी तो देर से पहुंचा,, बाहर निकलकर ऑटो रिक्शा से पूछा तो मुझे थोड़ी जल्दबाजी में देखकर 200 रुपये मांगने लगा,, मैंने एक #पैरों […]

Read more ›