साहित्य

संस्कार का मतलब क्या?

संस्कार का मतलब क्या?

1st December 2018 at 7:02 pm 0 comments

Nirmala Bhuradia =========== निर्मला भुराड़िया फिल्म ‘बधाई हो’ का एक दृश्य-एक युवा और एक किशोर पुत्र के माता-पिता, चालीस पार के एक दंपति अपने कमरे में बैठे हैं। रात का समय है, बाहर बरसात हो रही है। पति की कविता किसी पत्रिका में छपी है, वह उसे अपनी पत्नी को […]

Read more ›
ज़िन्दगी का हिसाब : दिल्ली में 207 किसान संगठन एक साथ अपनी माँगों के लिये आवाज़ बुलंद कर रहे हैं

ज़िन्दगी का हिसाब : दिल्ली में 207 किसान संगठन एक साथ अपनी माँगों के लिये आवाज़ बुलंद कर रहे हैं

29th November 2018 at 7:59 pm 0 comments

Arun Maheshwari ============ आज दिल्ली में ‘किसान मुक्ति संसद’। एक बार फिर देश के हर कोने से अ.भ. किसान सभा के आह्वान पर देश के किसानों के 207 किसान संगठन एक साथ अपनी माँगों के लिये आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस आवाज का हार्दिक अभिनंदन और इसके साथ एकजुटता […]

Read more ›
नवाब वाजिद अली शाह : ले बाबुल घर आपनो मैं चली पिया के देश !

नवाब वाजिद अली शाह : ले बाबुल घर आपनो मैं चली पिया के देश !

29th November 2018 at 2:45 am 0 comments

Sikander Kaymkhani ======= ध्रुव गुप्त – IPS office ========= बाबुल मोरा नैहर छूटल जाय – यह ठुमरी आपने बार-बार सुनी होगी। यह ठुमरी क़रीब डेढ़ सौ सालों से गायको-गायिकाओं की पहली पसंद रही है। कुंदन लाल सहगल ने 1937 की फिल्म ‘स्ट्रीट सिंगर’ में गाकर इसे लोकप्रियता का नया आसमान […]

Read more ›
मैं भी नक्सल तू भी नक्सल, जिसने सच बोला वो नक्सल…

मैं भी नक्सल तू भी नक्सल, जिसने सच बोला वो नक्सल…

29th November 2018 at 2:34 am 0 comments

Sikander Kaymkhani ============ रोहतक के युवा कवि संदीप सिंह की भीमा—कोरेगांव मामले में महीनों से नजरबंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर लिखी गई कविताएं नजरबंदी कलम में बहुत ताकत होती है वरवर राव, गौतम नवलखा, गोंजाविल्स और सुधा भारद्वाज तुमने साबित कर दिया तुम्हारे लिखे शब्दों में करोड़ों लोगों का दर्द है […]

Read more ›
🤔🤔बेबी! अगर बाबर का आक्रमण ना होता तो,,,,आज मैं कंडोम लाना ना भूलता🤔🤔

🤔🤔बेबी! अगर बाबर का आक्रमण ना होता तो,,,,आज मैं कंडोम लाना ना भूलता🤔🤔

28th November 2018 at 12:06 am 0 comments

वेदिका सिंह ============= कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादियों के बेडरूम का आलम ये है कि अगर कंडोम भूल जाते हैं भाई जी तो कहते हैं- बेबी! अगर बाबर का आक्रमण ना होता तो देश की सभ्यता और संस्कृति का हनन ना होता और आज मैं कंडोम लाना ना भूलता🤔 सेक्स की बात […]

Read more ›
कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादियों का नया नारा : हार नहीं मानूँगा रार नहीं ठानूँगा

कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादियों का नया नारा : हार नहीं मानूँगा रार नहीं ठानूँगा

22nd November 2018 at 5:37 pm 0 comments

वेदिका सिंह =============== कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादियों का नया नारा (मीडिया और नेताओं ने सिखाया है) १-मुसलमान को गाली दो तभी हिन्दू हो (टीपू सुल्तान और औरंगज़ेब को गाली देने वाले, क़ुरान को गाली देने वाले ये नहीं जानते कि शराब हराम है इस्लाम में, सामाजिक गंदगी इसलिए फैली है क्योंकि […]

Read more ›
बस यूँ ही……हां यही है मेरी जन्नत….

बस यूँ ही……हां यही है मेरी जन्नत….

21st November 2018 at 12:08 pm 0 comments

Deepshikha Sagar – दीप शिखा- ========= बस यूँ ही- ट्रेन की अपनी सीट पर आकर बैठ गई हूँ….और बस होने लगीं हैं धड़कनें तेज….साहिर बस यहीं से 2 घण्टे की दूरी पर इंतज़ार कर रहे होगे तुम…बस थोड़ी सी देर का साथ पाने के लिए न जाने कितनी प्रतीक्षा, कितनी […]

Read more ›
“माह पीशानी” : कहानी : पार्ट 3

“माह पीशानी” : कहानी : पार्ट 3

20th November 2018 at 2:31 am 0 comments

हमने कहा था कि प्राचीन समय में एक व्यक्ति अपनी पत्नी और बेटी शहरबानों के साथ बहुत आराम से रह रहा था। यहां तक कि एक दिन उसकी लड़की शहरबानो अपने स्कूल की बुरी शिक्षिका मुल्लाबाजी के षडयंत्र का शिकार हो गयी और अपनी मां को उसने सिरके के मटके […]

Read more ›
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

19th November 2018 at 12:55 am 0 comments

वेदिका सिंह _____________ आज मुझे बुख़ार है,मेरी बुख़ार की और कबूतर की एक कहानी है।जून २०१४ की बात है, कानपुर में एक दिन कोचिंग से वापस आ रही थी।रास्ते में एक कबूतर ज़मीन पर गिरा हुआ मिला।मानव होने का परिचय देते हुए मैंने उसे उठाया और लेकर हॉस्टल आ गयी।हमारे […]

Read more ›
‘सपने’ जिन्हें हक़ीक़त में बदलते-बदलते ज़िंदिगी चलती रहती है

‘सपने’ जिन्हें हक़ीक़त में बदलते-बदलते ज़िंदिगी चलती रहती है

18th November 2018 at 2:08 am 0 comments

Pratima Jaiswal ============= ‘सपने’ जिन्हें हकीकत में बदलते-बदलते जिंदगी चलती रहती है। एक ही छत के नीचे रहने वाले लोगों के सपने अलग-अलग होते हैं। हम किसी की जिंदगी को पूरी तरह जानें बिना उसके सपनों को नहीं समझ सकते। दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहने वाले 19-20 साल […]

Read more ›