साहित्य

आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की…नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की…।।

आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की…नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की…।।

7th March 2018 at 4:52 pm 0 comments

‎Surender Sagar‎ ================== आओ बच्चों तुम्हे दिखायें, शैतानी शैतान की… ।* *नेताओं से बहुत दुखी है, जनता हिन्दुस्तान की…।।* *बड़े-बड़े नेता शामिल हैं, घोटालों की थाली में ।* *सूटकेश भर के चलते हैं, अपने यहाँ दलाली में ।।* *देश-धर्म की नहीं है चिंता, चिन्ता निज सन्तान की ।* *नेताओं से […]

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बोधकथा : एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे को घर की छत पर ले गए….तो गधा…

बोधकथा : एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे को घर की छत पर ले गए….तो गधा…

6th March 2018 at 5:21 pm 0 comments

Ajay Tiwari ================ एक बोधकथा: एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन अपने गधे को घर की छत पर ले गए। जब नीचे उतारने लगे तो गधा नीते उतर ही नहीं रहा था.. .. बहुत कोशिश के बाद भी जब नाकाम हुए तो ख़ुद ही नीचे उतर गए और गधे के नीचे उतरने […]

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स्तनपान का ग्लैम्राइज़ेशन और हम!~

स्तनपान का ग्लैम्राइज़ेशन और हम!~

4th March 2018 at 6:50 am 0 comments

सोनाली मिश्र =============== कई दिनों से एक बार फिर से स्तनपान चर्चा में है. एक मैगजीन की फोटो पर एक मॉडल का चित्र है और उस पर लिखा है कि मुझे घूरे नहीं” शायद! हालांकि मैं चाह रही थी कि इस पर न लिखूं, क्योंकि साफ़ साफ़ लिखने से आपको […]

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मशहूर शायर #नज़ीर_अकबराबादी की होली पर लिखी शानदार नज़्म!आप भी पढ़िए..

मशहूर शायर #नज़ीर_अकबराबादी की होली पर लिखी शानदार नज़्म!आप भी पढ़िए..

3rd March 2018 at 7:56 am 0 comments

Faisal Rahmani =================== आज #होली है। उर्दू के मशहूर शायर #नज़ीर_अकबराबादी की हो ली पर लिखी एक शानदार नज़्म याद आ गई।आप भी पढ़िए.. जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की, और डफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की, परियों के रंग दमकते हों […]

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13 दिन हॉस्पिटल के

13 दिन हॉस्पिटल के

26th February 2018 at 11:33 am 0 comments

Meenakshi Sukumaran – New Delhi 13 दिन हॉस्पिटल के —————– न उम्र का न लिंग का न धर्म का न भाषा का तकाज़ा है यहाँ ये हॉस्पिटल है जहाँ दुधमुहे बच्चे से अधेड़ उम्र हर कोई है दाखिल ।। कहीं नम आंखें कहीं खामोशी से रिश्ता दर्द कहीं कराहट कहीं […]

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क्या गोपन क्या ओपन!

क्या गोपन क्या ओपन!

22nd February 2018 at 5:56 am 0 comments

Ashok Chakradhar _ कवि =================== · क्या गोपन क्या ओपन! —चौं रे चंपू! इत्ती किताबन्नै लैकै कहां चलौ? —आपके पास ही आया हूं! साहित्य अकादमी ने अपने परिसर में कविसम्मेलन कराया था। न्यौता मिला तो सुखद आश्चर्य हुआ, क्योंकि साहित्य अकादमी तो कविसम्मेलन की कविता को प्राय: साहित्य ही नहीं […]

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“किंशुक””क्या वह शुक है?

“किंशुक””क्या वह शुक है?

20th February 2018 at 8:09 am 0 comments

Sushobhit Saktawat =================== “किंशुक” __________________ किंशुक यानी “किं शुक?” (“क्या वह शुक है?”) यह एक प्रश्न नहीं, प्रश्न के छलावरण में एक फूल का नाम है। फूल का नाम ही “किंशुक” है! भारतीय परम्परा यों निरी अभिधा में किसी का नाम नहीं पुकारती, फिर यह तो वसंत का अग्रदूत है! […]

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वेश्यावृत्ति और समलैंगिकता को बढ़ावा दे कर हम विवाह संस्था और परिवार को ख़त्म कर देंगे

वेश्यावृत्ति और समलैंगिकता को बढ़ावा दे कर हम विवाह संस्था और परिवार को ख़त्म कर देंगे

9th February 2018 at 1:29 am 0 comments

मार्क्सिस्ट नारीवाद का भयानक वास्तव । अमेरिकन नारीवादी आइकॉन केट मिलेट की सगी छोटी बहन मेलरी मिलेट के अपने शब्दों में । इसके इतर, इस लेख में शुरुआत में ही एक प्रसंग वर्णित है । हाई स्कूल के बाद मेलरी मिलेट को उसके स्कूल के एक नन ने पूछा – […]

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“न तो आप बादशाह ज़ादे हो न आपका चलन बादशाहों वाला है”

“न तो आप बादशाह ज़ादे हो न आपका चलन बादशाहों वाला है”

8th February 2018 at 4:06 am 0 comments

Shaheen Khan ================= इट्स नॉट जस्ट अ “पकौड़ा” पोस्ट !! ——————- एक बादशाह के दरबार मे एक अजनबी नौकरी की तलब के लिए हाज़िर हुआ । क़ाबलियत पूछी गई, कहा, “सियासी हूँ ।” ( अरबी में सियासी अक्ल ओ तदब्बुर से मसला हल करने वाले मामला फ़हम को कहते हैं […]

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साहेब, फिर आप चुप ही रहिए, मन की बात भी मत किजिए…..!

साहेब, फिर आप चुप ही रहिए, मन की बात भी मत किजिए…..!

6th February 2018 at 1:13 am 0 comments

Ruby Arun _ senior journalist ============== साहेब, आप तो अपने सत्ता सुख के लिए ना अपनी मां से दूर रहते हैं… जब जी चाहे, आप अपनी माँ से मिल भी लेते हैं.. पर हमारे सैनिक ,अपनी जननी का पेट भरने के लिए दूर दराज़, देश की सीमाओं पर अपनी सेवाएं […]

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