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बाबरी मस्जिद को नाजायज़ क़ब्ज़े से आज़ाद कराना ही समस्या का एकमात्र हल है

बाबरी मस्जिद को नाजायज़ क़ब्ज़े से आज़ाद कराना ही समस्या का एकमात्र हल है

3rd November 2017 at 12:32 am 0 comments

Mohd Sharif ****************** आजकल जिस प्रकार मुग़ल बादशाह अकबर के किसी कथित वंशज को पेश करके बाबरी मस्जिद पर समझौता करने के हक़दार के रूप में प्रचारित किया जा रहा है वह सरासर सोची समझी साज़िश प्रतीत होती है जिससे मुसलमानों को सावधान रहना चाहिए और यह समझ लेना चाहिए […]

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शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी को वक़्फ़ बोर्ड से हटा देना चाहिए!

शिया वक़्फ़ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी को वक़्फ़ बोर्ड से हटा देना चाहिए!

2nd November 2017 at 2:01 am 0 comments

Mohd Sharif ********************** वक़्फ़ बोर्ड की ज़िम्मेदारी जिस तरह बोर्ड की दूसरी सम्पत्तियों की सुरक्षा करना है उसी तरह मस्जिदों की सुरक्षा भी इसके कार्यक्षेत्र में आती है। मस्जिदों का जहांतक सम्बन्ध है तो वक़्फ़ बोर्ड उनका मालिक नहीं होता है बल्कि उसकी हैसियत एक ख़ादिम की होती है, बिलकुल […]

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मीम ‘AIMIM’ मज़बूत होती है तो सेक्युलर दलों के ऊपर दबाव का काम करेगी!

मीम ‘AIMIM’ मज़बूत होती है तो सेक्युलर दलों के ऊपर दबाव का काम करेगी!

2nd November 2017 at 1:25 am 0 comments

Mohammad Arif Dagia ============== अगर आप देख रहे हों कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अब बदल रही है तो आपको घिसी पिटी लकीर पे चलते हुए कांग्रेस की आलोचना जारी नही रखना चाहिए , क्योंकि कांग्रेस की आलोचना करना भाजपा को मज़ीद फायदा पहुंचाना ही है।।। राष्ट्रीय स्तर […]

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नवीन सीरिया का क्या होगा प्रारूप?

नवीन सीरिया का क्या होगा प्रारूप?

1st November 2017 at 5:35 pm 0 comments

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन हमें थोड़े थोड़े अंतराल से अपनी कूटनैतिक और सैनिक सफलताओं से चौंकाते रहते हैं और इससे उनकी नेतृत्व क्षमता और निखरती है और यह अंदाज़ा होता है कि उनके पास मध्यपूर्व के संकटों विशेष रूप से सीरिया संकट के लिए बड़े ठोस और निश्चित कार्यक्रम […]

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आपका संगठन “संघ” सरदार पटेल की नज़र में देशद्रोही और गाँधी जी की हत्या का जिम्मेदार हैं!

आपका संगठन “संघ” सरदार पटेल की नज़र में देशद्रोही और गाँधी जी की हत्या का जिम्मेदार हैं!

1st November 2017 at 1:11 am 0 comments

✍Mohd Zahid ============ नरेन्द्र मोदी को सरदार पटेल जी पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है , यदि वह गाँधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल के उन पत्रों को पढ़ें जो उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखें तो पूरे संघियों और बूसी बसिया को सरदार पटेल का नाम […]

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‘शंबूक तो हर युग में मारा जाएगा’

‘शंबूक तो हर युग में मारा जाएगा’

1st November 2017 at 12:41 am 0 comments

Dilip C Mandal ===================== शंबूक तो हर युग में मारा जाएगा. अध्ययन करने की उसकी हिम्मत कैसे हुई. एकलव्य का अंगूठा तो कटकर रहेगा. वह स्पोर्ट्स का चैंपियन कैसे बन सकता है. रोहित वेमुला को मरना ही होगा. पीएचडी एंट्रेंस का टॉपर होने की उसकी हिम्मत कैसे हुई. उना के […]

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माफ़ीनामा और यू-टर्न की विचारधारा – #तनवीर_के_तेवर!

माफ़ीनामा और यू-टर्न की विचारधारा – #तनवीर_के_तेवर!

1st November 2017 at 12:24 am 0 comments

कल ताजमहल की सुरक्षा में लगे CISF के जवानों ने कुछ मूर्खों को ताजमहल में शिवमंत्र पढ़ते पकड़ लिया। जैसे ही CISF ने उन पर सख्ती कर FIR लिख आगरा पुलिस को देने की बात की वे आंदोलनकारी रोने लगे और माफीनामा देकर सस्ते में छूट गए। इस घटना से […]

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“भारत में “फ़ेमिनिज़्म” की परिपूर्णता एक मिथक है”

“भारत में “फ़ेमिनिज़्म” की परिपूर्णता एक मिथक है”

1st November 2017 at 12:18 am 0 comments

Deepali Tayday ================ नारीवाद की अवधारणा भारत में केवल सवर्ण महिलाओं का फैशन है क्योंकि यहाँ फेमिनिज़्म पितृसत्ता का बुलेटप्रूफ़ जैकेट और ब्राह्मणवाद का हथियार है। दरअसल स्त्री अधिकारों और समानता की मुनादी करने वाली सवर्ण नारीवादी ब्राह्मणवादी सिस्टम की कठपुतली हैं, जिन्हें जातीय प्रिविलेज की रक्षा करने के लिए […]

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क्या युवाओं ने चुप रहकर भारत के लोकतंत्र को निराश किया है?

क्या युवाओं ने चुप रहकर भारत के लोकतंत्र को निराश किया है?

1st November 2017 at 12:13 am 0 comments

Ravish Kumar =================== देश के विश्वविद्यालयों पर लगातार 15 एपिसोड करता चला गया। हर एपिसोड बता रहा है कि विगत बीस साल में, हर पार्टी की सरकार और हर राज्य में कालेजों को गोदाम में बदल दिया गया है। कहीं टीचर नहीं हैं, कहीं लैब नहीं है, कहीं कोर्स नहीं […]

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#नोटबंदी,,,,’#श्रृद्धांजलि दिवस’ के मौके पर……!!!

#नोटबंदी,,,,’#श्रृद्धांजलि दिवस’ के मौके पर……!!!

31st October 2017 at 11:59 pm 0 comments

Sagar PaRvez ============== पूंजीवादी जनतंत्र, फासीवाद और समाजवाद — इन तीनों को परस्पर से पूर्ण स्वायत्त अलग-अलग समाज-व्यवस्थाओं के रूप में देखा जाना चाहिए 8 नवंबर के दिन साल भर पहले हम अपने देश में एक ऐसे दृश्य के साक्षी हुए थे, जो हम सब, आजादी के बाद की पीढ़ी […]

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