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sharif khan

मछली और सूअर भी गाय के सामान रक्षा के हक़दार हैं?

April 5, 2015 at 8:50 pm Comments are Disabled

  भारत में विभिन्न धर्म और संस्कृतियों के लोग मिलजुल कर रहते आये हैं और कभी किसी धर्म या सम्प्रदाय से या उसकी आस्था से किसी को भी ऐतराज़ नहीं रहा है परन्तु गाय भक्ति का बहाना बना कर कुछ सम्प्रदायिकतावादियों ने गाय का मांस खाने को आस्था पर चोट कह कर धर्म से जोड़ दिया है ताकि इसी बहाने […]

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ज़ख़्म फिर से हरे हो गए

ज़ख़्म फिर से हरे हो गए

March 30, 2015 at 8:40 pm Comments are Disabled

तवलीन सिंह यह लेख शुरू करना चाहूंगी मजरूह सुल्तानपुरी के एक शेर से-हम ही हमेशा कत्ल हुए और तुमने भी देखा दूर से लेकिन ये न समझना हमको हुआ है जान का नुकसान तुमसे ज्यादा।हाशिमपुरा कांड का फैसला पिछले सप्ताह जब करीब अट्ठाइस साल के लंबे अर्से के बाद आया तो यह शेर मुझे इसलिए याद आया क्योंकि इस फैसले […]

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