साहित्य

चिड़िया और अंधा साँप : अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर वक्‍त खुला है

चिड़िया और अंधा साँप : अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर वक्‍त खुला है

January 6, 2017 at 3:56 am 0 comments

Tanveer Tyagi ———————— डाकूओं का एक गिरोह डाका ज़नी के मुक़ाम पर पहुंचा जहाँ खजूर के तीन दरख़्त थे । उन दरख़्तों में से एक दरख़्त ख़ुश्‍क था और दो फलदार थे । डाकू वहाँ आराम के लिए लेटे तो डाकूओं के सरदार ने देखा कि एक चिड़िया फलदार दरख़्त से उड़ कर ख़ुश्‍क खजूर पर जा बैठी है और […]

Read more ›
“हम पश्तो जबान पहले होटल नहीं जाते ” – आदरणीय पिताजी

“हम पश्तो जबान पहले होटल नहीं जाते ” – आदरणीय पिताजी

January 6, 2017 at 3:15 am 0 comments

अबु सिद्रा असद ———————- “हम पश्तो ज़बान पहले होटल नहीं जाते ” – आदरणीय पिताजी आज मैं आपको अपने समाज यानी पश्तून समाज के बारे में कुछ बताऊंगा। पश्तून समाज से मतलब भारत में 100 या डेढ़ 100 साल से रह रहे वो पठान है जो अभी तक पश्तो भाषा और सभ्यता भूले नहीं है। मुझे गर्व तो नही की […]

Read more ›
कुरआन के मुरीद हुऐ कनाडा के सक्रिय ईसाई धर्म प्रचारक : शैतान से बचने के लिए अल्लाह की पनाह मांगों

कुरआन के मुरीद हुऐ कनाडा के सक्रिय ईसाई धर्म प्रचारक : शैतान से बचने के लिए अल्लाह की पनाह मांगों

January 5, 2017 at 8:58 pm 0 comments

एक अहम ईसाई धर्म प्रचारक कनाडा के गैरी मिलर ने इस्लाम अपना लिया और वे इस्लाम के लिए एक महत्वपूर्ण संदेशवाहक साबित हुए। मिलर सक्रिय ईसाई प्रचारक थे और बाइबिल की शिक्षाओं पर उनकी गहरी पकड़ थी। वे गणित को काफी पसंद करते थे और यही वजह है कि तर्क में मिलर का गहरा विश्वास था। एक अहम ईसाई धर्म […]

Read more ›
हज़रते इमाम ग़ज़ाली रहमतुल्लाह अलैह की अज़मत, आपने इस्लाम की श्रेष्ठता को स्थापित किया

हज़रते इमाम ग़ज़ाली रहमतुल्लाह अलैह की अज़मत, आपने इस्लाम की श्रेष्ठता को स्थापित किया

January 5, 2017 at 12:39 am 0 comments

Mohammad Arif Dagia ———————- आज कल के युवा मुस्लिमों का एक बहुत बड़ा वर्ग अक़ीदे के मामले में मतिभ्र्म और गुमराही का शिकार है। बादे वफ़ात नबियों और वलियों की ज़िन्दगी के बारे में न तो वह जानना चाहता है; और न ही बताये जाने पर विश्वास करने को तैयार होता है। तौहीद के नाम पर नबियों और वलियों की […]

Read more ›
महान उर्दू शायर फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ (1911-1984) की एक नज़्म

महान उर्दू शायर फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ (1911-1984) की एक नज़्म

January 4, 2017 at 3:37 am 0 comments

ऐ नए साल बता, तुझमें नया-पन क्या है हर तरफ़ ख़ल्क़ ने क्यूँ शोर मचा रक्खा है रौशनी दिन की वही, तारों भरी रात वही आज हम को नज़र आती है हर इक बात वही आसमाँ बदला है, अफ़सोस, ना बदली है ज़मीं एक हिंदसे का बदलना कोई जिद्दत तो नहीं अगले बरसों की तरह होंगे क़रीने तेरे किस को […]

Read more ›
”अब्बु”…”अब्बु”…मुझे चोट लग गई खून आ रहा है!

”अब्बु”…”अब्बु”…मुझे चोट लग गई खून आ रहा है!

December 30, 2016 at 11:05 pm 0 comments

अब्बु अब्बु मुझे चोट लग गई खून आ रहा है 5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था कि अब्बा जान सब कुछ छोड़ छाड़ कर गोदी में उठाकर एक किलो मीटर की दूरी पर क्लिनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए दुकान कैश काउंटर सब नौकर के भरोसे छोड़ आये सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते […]

Read more ›
अपनी तमाम ख़ुशियों में अपने वालदैन को शरीक करें!

अपनी तमाम ख़ुशियों में अपने वालदैन को शरीक करें!

December 29, 2016 at 11:39 pm 0 comments

1. उनके साथ रहते अपने फ़ोन को दूर रखो. 2. वे क्या कह रहे हैं इस पर गौर करें 3. उनका मशविरा इख़्तयार करो 4. उनकी बातचीत में शामिल हों. 5. उन्हें इज़्ज़त के साथ देखें 6. हमेशा उनकी तारीफ़ और होसला अफ़ज़ाई करें. 7. अपनी तमाम ख़ुशियों में उन्हें शरीक करें 8. उन्हें ऐसी कोई भी ख़बर न सुनाएँ […]

Read more ›
30 दिसंबर 2006 को ऐन ईद-उल-अज़हा के दिन ही क्यों दी गयी थी अरब के शेर ”सद्दाम हुसैन” को फाँसी ??

30 दिसंबर 2006 को ऐन ईद-उल-अज़हा के दिन ही क्यों दी गयी थी अरब के शेर ”सद्दाम हुसैन” को फाँसी ??

December 28, 2016 at 3:23 am 0 comments

सद्दाम हुसैन दो दशक तक इराक़ के राष्ट्रपति रहे, दो दशकों तक इराक़ के राष्ट्रपति रहे सद्दाम हुसैन का जन्म वर्ष 1937 के अप्रैल महीने में बग़दाद के उत्तर में स्थित तिकरित के एक गाँव में हुआ। वर्ष 1957 में युवा हुसैन ने बाथ पार्टी की सदस्यता ली जो अरब राष्ट्रवाद के एक समाजवादी रूप का अभियान चला रही थी। […]

Read more ›
”अबू मिनियार मुअम्मर अल कज्जाफ़ी”…और इसके साथ ही साम्राज्यवादियों के ख़िलाफ़ गरजने वाली आख़िरी आवाज़ भी खामोश कर दी गयी!

”अबू मिनियार मुअम्मर अल कज्जाफ़ी”…और इसके साथ ही साम्राज्यवादियों के ख़िलाफ़ गरजने वाली आख़िरी आवाज़ भी खामोश कर दी गयी!

December 28, 2016 at 2:48 am 0 comments

इसे मत…। फिर गोलियों की आवाज… और इसके साथ ही अरब के सहरा में, साम्राज्यवादियों के खिलाफ गरजने वाली आखिरी आवाज भी खामोश कर दी गयी। यह पूरा मंजर नामा एक राहगीर ने उस वक्त रेकार्ड किया था जब लीबिया का “”मर्दे आहन”(लौह पुरुष) कहे जाने वाले पूर्व शासक कर्नल मुअम्मर कज्जाफी (गद्‌दाफी) को बेरहमी के साथ पीटा जा रहा […]

Read more ›
*हुब्बे नबी*: और वो हुजूर ﷺ के लिए ढाल बने हुये थे!

*हुब्बे नबी*: और वो हुजूर ﷺ के लिए ढाल बने हुये थे!

December 26, 2016 at 7:40 pm 0 comments

हजरत अनस( र) फरमाते है, जंगे उहद के दिन हजरत अबु तलहा(र), हूजुरﷺ के सामने खडे हो कर (दुश्मन पर) तीर चला रहे थे और हुजुर ﷺ इन के पिछे थे और वो हुजूर ﷺ के लिए ढाल बने हुवे थे और वो बडे माहिर तीरांदाज थे. जब भी वो तीर चलाते हुजुर ﷺ उपर हो कर देखते के तीर […]

Read more ›