धर्म

         🌟 शहीदाने क़रबला का पैग़ाम 🌟

         🌟 शहीदाने क़रबला का पैग़ाम 🌟

19th September 2018 at 11:49 pm 0 comments

 (Article by :Yakub Patel 🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹 👉 त्याग, बलिदान और समर्पण की अतूट भावनाओं का त्रिवेणी संगम भरा मोहर्रम माह पुरे मानवजात को एक अनुपम संदेश दे रहा है. इस्लामी साल की शुरुआत भी बलिदान से और साल का समापन भी बलिदान से ही होता है. अाज से १૪०० साल पेहले […]

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“कुरआन और पुनर्जन्म”

“कुरआन और पुनर्जन्म”

10th September 2018 at 4:44 am 0 comments

मो. रफीक चौहान एडवोकेट ================= विश्व के सभी धर्मों के मानने वाले इस निर्विवाद सत्य को स्वीकार करते हैं कि कोई भी व्यक्ति अमर नहीं हो सकता और उसे एक न एक दिन मौत जरुर आयेगी। लेकिन उसकी आत्मा, रूह , Soul कभी नहीं मरती है और मनुष्य अपने जीवनकाल […]

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*”शाम ए करबला”* असबाबे शहादत【 पोस्ट -1】

*”शाम ए करबला”* असबाबे शहादत【 पोस्ट -1】

10th September 2018 at 4:31 am 0 comments

Firoj Khan ================ असबाबे शहादत: जब कोई चीज यकीनी होने वाली होती है तो उसके होने असबाब भी पैदा हो जाते हैं इमाम आली मकाम की शहादत के असबाब इस तरह पैदा हुए कि जब 60 हिजरी में हजरत अमीर मुआविया रजि अल्लाहु अन्हु का इंतकाल हुआ और यजीद( जिसके […]

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सिर्फ़ एक वाक़ीया हिदायत का सबब बना, एक शख़्स ने यूरोप में इस्लाम क़बूल किया

सिर्फ़ एक वाक़ीया हिदायत का सबब बना, एक शख़्स ने यूरोप में इस्लाम क़बूल किया

8th September 2018 at 11:00 pm 0 comments

Nisha Malik ============== एक शख़्स ने यूरोप में इस्लाम क़बूल किया। उस से पूछा गया, के इस्लाम की कौन सी बात ने तुम्हे मोतासिर किया ?? उस ने कहा, “सिर्फ़ एक वाक़ीया ने मुझे हिदायत का सबब बना दिया। उस ने कहा हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहे वस्सल्लम की मजलिस लगी है। […]

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#ईश्वरीय वाणी पार्ट 39 : सूरए क़सस : : पवित्र क़ुरआन अज्ञानता और अंधकार से मुक्ति दिलाता है!

#ईश्वरीय वाणी पार्ट 39 : सूरए क़सस : : पवित्र क़ुरआन अज्ञानता और अंधकार से मुक्ति दिलाता है!

3rd September 2018 at 3:28 am 0 comments

सूरे क़सस पवित्र कुरआन का २८वां सूरा है और यह मक्का से मदीना पलायन से पूर्व मक्के में नाज़िल हुआ था। इस सूरे में ८८ आयतें हैं। इस सूरे में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पैदा होने, उनके बचपने, जवानी, पैग़म्बरी, एकेश्वरवाद की ओर निमंत्रण और फिरऔन से संघर्ष जैसी उनके […]

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आयतें और निशानियां : क्योंकि तुम सिर्फ़ नसीहत करने वाले हो : पार्ट 6

आयतें और निशानियां : क्योंकि तुम सिर्फ़ नसीहत करने वाले हो : पार्ट 6

3rd September 2018 at 3:22 am 0 comments

सृष्टि की आश्चर्य चकित करने वाली चीज़ों में से एक धरती है। धरती मनुष्य का शरणस्थल टैजी और उसके आराम करने का स्थान है। सूरे ज़ारियात की 20वीं आयत में कहा गया है कि विश्वास करने वालों के लिए धरती पर निशानियां मौजूद हैं। इस आयत में सोच-विचार करने से […]

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#मस्जिद और इबादत part 30_इस्लाम में मस्जिद की अहमियत!!”मस्जिदे गौहरशाद!!

#मस्जिद और इबादत part 30_इस्लाम में मस्जिद की अहमियत!!”मस्जिदे गौहरशाद!!

3rd September 2018 at 3:17 am 0 comments

मस्जिद, मुसलमानों का सार्वजनिक और विभिन्न वर्गों के लोगों के उपस्थित होने का स्थल है। इस प्रकार से यह स्थल इस्लामी समाज को आगे बढ़ाने और मुसलमानों के बीच वैचारिक समन्वय पैदा करने का बेहतरीन स्थान समझा जाता है क्योंकि मस्जिद यद्यपि समाज की एक छोटी इकाई समझी जाती है […]

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#इस्लाम और मानवाधिकार : पार्ट 36

#इस्लाम और मानवाधिकार : पार्ट 36

3rd September 2018 at 3:08 am 0 comments

सामूहिक आजादी भी इंसान के बुनियादी अधिकारों में है। समाज में रहने वाले लोग एक दूसरे से संपर्क और समानताओं के कारण एक साथ जमा होते हैं तथा भौतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए सामूहिक जीवन की घोषणा करते हैं। यह सामूहिक अस्तित्व एक सच्चाई है और समाज इसे मान्यता […]

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#इस्लाम ने मनुष्य को ज़िम्मेदार इन्सान बनाया : अल्लाह के ख़ास बन्दे पार्ट 16

#इस्लाम ने मनुष्य को ज़िम्मेदार इन्सान बनाया : अल्लाह के ख़ास बन्दे पार्ट 16

3rd September 2018 at 3:04 am 0 comments

पिछले कार्यक्रम में हमने हज़रत अली के जीवन के कुछ पहलुओं की चर्चा की थी और आज भी उनके जीवन के कुछ अन्य पहलुओं पर प्रकाश डालेंगे। अज्ञानता के काल में क़ुरैश का बोलबाला था, पूरे अरब में अज्ञानता की संस्कृति प्रचलित थी, उस समय अरब जगत में आर्थिक दरिद्रता […]

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पवित्र क़ुरआन पार्ट 37_हिंदी अनुवाद ‘सूरए अस साफ़्फ़ात ”क़तार”

पवित्र क़ुरआन पार्ट 37_हिंदी अनुवाद ‘सूरए अस साफ़्फ़ात ”क़तार”

3rd September 2018 at 2:55 am 0 comments

37 सूरए अस साफ़्फ़ात (क़तार) =========== सूरए साफ़्फ़ात मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी एक सौ बयासी (182) आयतें हैं ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है (इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम) (1) फिर (बदों को बुराई से) झिड़क […]

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