#istandwithamu : क़ायदे अज़ाम मुहम्मद अली जिन्ना और भारत विभाजन की पूरी कहानी, देखें वीडियो

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Khan Junaidullah
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अब समझ में आ रहा है AMU का हंगामा क्यों?
दरअसल पाकिस्तान के सुप्रीम में कोर्ट संघियों का पैंट उतरने वाला है। पुरा डिटेल पढें ।
जिन्नाह गया क़ब्र में,,,,,,
AMU से फोटो के नाम पर खड़े किए गए संघी तमाशे का एक और सच।
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परसो एक हकीकत तो ये बताई थी कि बीजेपी के भृष्ट नेताओं की नज़र मुम्बई के जिन्नाह हाउस पर है लेकिन एक और उससे भी बड़ा सन्देह सामने आया है :-
1- तीन दिन पहले तक बीजेपी के प्रवक्ता इस विवाद पर कोई स्टैंड नही ले रहे थे लेकिन जब प्रोपर्टी का खुलासा हुआ और किसी ने फोटो हटाने का विरोध नही किया तो कल अचानक बदल गए और गलियों की शुरुआत कर दी।
2- संघियो को असलियत तो सबके सामने आ रही हैं जो उन्हें कब्र से भी नीचे दफ़न होने को मजबूर कर देगी
3- पाकिस्तान में काफी समय से शहीद भगत सिंह को कंनूनन निर्दोष करार देने और स्मारक बनाने की मांग उठ रही हैं
4- इस सम्बन्ध में दायर रिट याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास मंगवा लिया है तथा पुरानी फाइल्स खुल गई है
5- शादीलाल और शोभा सिंह का नाम तो सब जानते है लेकिन बाकी छह गवाहों की पोल खुली नही थी।
6- अपने किये दुष्कर्मो के डर से संघियो के माथे पर पसीने छूट रहे है क्योकि सभी कागज़ात सार्वजनिक होते ही ये नँगे भी हो सकते है।
7- इसी दहशत से हो सकता है कि बीजेपी के प्रवक्ता कल से चीख रहे है कि *जब बटवारा हो चुका है तो पुरानी बातों को दफ़न करो*
8- क्या संघियो को अपने लोगो के नाम का खुलासा होने का डर सता रहा है ?
9- अटल बिहारी की अंग्रेज़ो के हक में दी गई गवाही तो सब जानते है तो क्या भगत सिंह की शहादत की साज़िश में भी इनका हाथ था ?
10- जिन्नाह अगर गुनाहगार है तो सावरकर और श्यामाप्रसाद मुखर्जी के गुनाह भी कम कैसे हो सकते है।।
शेष कोई सवाल हो तो कमेंट्स में पूछ सकते हैं।
DrParmod Pahwa पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार।

वाया Arvind Srivastva
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Sikander Kaymkhani
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जिन्ना ने कहा कि एक व्यक्ति एक वोट लोकतंत्र नहीं बहुसंख्यकों का शासन क़ायम करेगा। उन्होने सेंट्रल असेंबली में कहा कि अंग्रेज़ों ने भारत के अल्पसंख्यकों के लिए वक़्त रहते प्रावधान नहीं किए तो वो बहुसंख्यकों के रहमोकरम पर ज़िंदा रहेंगे और कभी बराबरी हासिल नहीं करेंगे। जिन्ना का दावा था कि जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था की बात नेहरू और गांधी कर रहे हैं वो और कुछ नहीं हिंदू राष्ट्र ही होगा। जिन्ना ने बार बार दोहराया कि हिंदू इस मुल्क में मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाकर रखेंगे। जिन्ना का दावा था जिस लोकतंत्र का ख़्वाब कांग्रेसी दिखा रहे हैं उसमें न मुसलमानों के इदारे महफूज़ होंगे, न उनकी मस्जिदें, न तालीम और न ज़िंदगी। अंग्रेज़ों के जाने के बाद भी मुसलमानों को बराबरी और अपनी आज़ादी की लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी। नेहरू और गांधी ने जिन्ना को बार-बार झूठा साबित करने की कोशिश की लेकिन उनके लोगों ने बार बार जिन्ना को सच्चा साबित किया। सत्तर साल बाद भी जिन्ना सच्चे हैं। लेकिन इस मुल्क के मुसलमानों ने जिन्ना की बात नहीं मानी और यहां के हिंदुओं पर भरोसा किया। सेक्युरिज़्म और मुल्क के निज़ाम पर भरोसा किया। मुसलमानों को अब कुछ साबित नहीं करना है। अब हिंदुओं की ज़बान, उनका सेक्युरिज़्म और उनका भरोसा दांव पर है। जिन्ना को झूठा साबित करने की ज़िम्मेदारी इस मुल्क के बहुसंख्यकों की है। अगर नहीं कर सकते तो फिर जिन्ना की एक तस्वीर हटाने भर से जिन्ना की विचारधारा ख़त्म नहीं होगी।

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