चिड़िया और अंधा साँप : अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर वक्‍त खुला है

Tanveer Tyagi
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डाकूओं का एक गिरोह डाका ज़नीtj के मुक़ाम पर पहुंचा जहाँ खजूर के तीन दरख़्त थे । उन दरख़्तों में से एक दरख़्त ख़ुश्‍क था और दो फलदार थे । डाकू वहाँ आराम के लिए लेटे तो डाकूओं के सरदार ने देखा कि एक चिड़िया फलदार दरख़्त से उड़ कर ख़ुश्‍क खजूर पर जा बैठी है और थोड़ी देर के बाद वहाँ से फिर उड़ती है और फलदार दरख़्त पर जा बैठती है । और वहाँ से उड़ कर फिर उसी ख़ुश्‍क दरख़्त पर आ बैठती है । इसी तरह उसने कई चक्कर लगाए । सरदार ने ये देखा तो तजस्सुस के लिए ख़ुश्‍क दरख़्त पर चढ़ा । ऊपर जा कर देखा कि एक अंधा साँप बुलंद टहनी पर लिपटा बैठा है और मुँह खोले हुए है । वो चिड़िया उसके लिए कुछ लाती है और उसके मुँह में डाल देती है । सरदार ने ये देखा तो मुतास्सिर हुआ और वहीं कहने लगा: इलाही! ये एक मूज़ी जानवर है जिसके रिज़्क के लिए तू ने एक चिड़िया मुक़र्रर कर रखी है फिर मेरे लिए जो अशरफ़-उल-मख़लूक़ात में से हूँ ये डाका ज़नी कब तक मुनासिब है? ये कहा तो उसने हातिफ़-ए-ग़ैबी से ये आवाज़ सुनी अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा हर वक्‍त खुला है । अब भी तौबा कर लो ।

सरदार ने ये आवाज़ सुनी तो रोने लगा और नीचे उतर कर अपनी तलवार तोड़ डाली और चिल्‍लाने लगा कि मैं अपने गुनाहों से बाज़ आया, बाज़ आया, बाज़ आया । इलाही! मेरी तौबा क़बूल फ़र्मा । आवाज़ आई कि तेरी तौबा की सच्चाई से तेरी तौबा क़बूल हुई ।

सरदार के साथियों ने ये माजरा देखा तो दरयाफ्‍त किया कि बात क्‍या है? सरदार ने सारा क़िस्सा बयान किया तो वो सब भी रोने लगे और कहने लगे कि हम भी अपने अल्लाह तआला से मुसालहत करते हैं । चुनाँचे उन्होंने भी सच्चे दिल से तौबा की और अल्लाह के बर्गुज़ीदा बंदों में शुमार हो गए ।
(सुब्‍हान अल्लाह)

सबक़: इंसान चाहे कितना ही गुनाहगार क्यों न हो मगर जब वो सच्चे दिल से तौबा कर लें तो ख़ुदा तआला उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ फ़र्मा देता है । और अपने मक़बूलों में शामिल कर लेता है । लेकिन इंसान तौबा की उम्मीद पर जानबूझ कर गुनाह करता रहे कि कल तौबा कर लूंगा आज गुनाह कर लूं तो ये बड़ी हिमाक़त की बात है । अल्लाह से दुआ है कि वो हमें पक्की सच्ची तौबा करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए । आमीन

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